कोरोना काल के दौरान झारखंड से देश के 18 राज्यों में 20 करोड़ की साइबर ठगी

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Ranchi: मध्य प्रदेश पुलिस ने Jharkhand Police के साथ मिलकर फर्जी कॉल करके बैंक खाते से रुपए निकालने और बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों से ऑनलाइन मोबाइल खरीद कर करोड़ों रुपए की साइबर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है.

गिरोह का संचालन झारखंड के देवघर से हो रहा था. गिरोह का मास्टरमाइंड संतोष महतो है.

एमपी पुलिस ने सोमवार को जब बालाघाट से दो साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया. तब उनसे पूछताछ में पूरे नेटवर्क का पता चला. इसके बाद वह Jharkhand पहुंची और स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर राज्य के 3 शहरों रांची, जमशेदपुर और देवघर में छापेमारी कर चार अपराधियों को गिरफ्तार किया. रांची के अरगोड़ा थाना अंतर्गत पटेल चौक हरमू से सुशांत अग्रवाल, संत फ्रांसिस स्कूल के पास से प्रभात कुमार, जमशेदपुर से विकास कुमार उर्फ nitin Kumar और देवघर से मास्टरमाइंड संतोष महतो को गिरफ्तार किया गया.

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इन साइबर अपराधियों ने पूछताछ के दौरान पुलिस के समक्ष कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. यह लोग कोरोना काल के दूसरी लहर के दौरान चार से पांच माह के अंदर ₹20 करोड़ से ज्यादा के साइबर फ़्रॉड कर चुके हैं. 18 राज्यों में इनका नेटवर्क चल रहा है. इनके पास से 300 मोबाइल से और 1000000 रुपए बरामद हुए हैं.

गिरोह में सभी टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट

गिरफ्तार आरोपियों ने पुलिस को बताया कि गिरोह में पढ़े लिखे और टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट को ही रखा जाता है. गिरोह में अलग-अलग राज्यों में 700 ऑपरेटरों को रखा गया है. यह सभी लोगों को फर्जी कॉल करके ओटीपी, क्रेडिट कार्ड, ई-कॉमर्स में धोखाधड़ी करने में मास्टर है. इनके ठगी का तरीका भी नया है. यह पहले आम लोगों को बैंक कर्मी बनकर कॉल करके उन्हें बताते हैं कि उनका एटीएम कार्ड इनवेलिड हो गया है. क्रेडिट कार्ड और केवाईसी अपडेट के नाम पर अपने झांसे में लेते हैं. फिर उनसे उनके अकाउंट का डिटेल लेकर उनके सारे रुपए निकाल लेते हैं. फिर उसी रुपए से एक कॉमर्स कंपनियों से मार्केट डिमांड के मुताबिक मोबाइल फोन खरीद कर खुदरा दुकानदारों को बेच देते थे. ऐसा करके वह ऑनलाइन ठगी के पैसे को कैच में बदल लेते थे. इस पूरे कांड का खुलासा तब हुआ जब एमपी पुलिस ने बालाघाट से दो साइबर अपराधी पकड़े गए.

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ऐसे करते थे फर्जीवाड़ा

साइबर अपराधी सबसे पहले amazon, flipkart जैसी बड़ी कॉमर्स कंपनियों से फर्जी पते पर आईफोन समेत महंगे मोबाइल फोन बुक करते थे. फिर बैंक कर्मी बनकर किसी व्यक्ति को फोन करके उसे बैंक अकाउंट बंद होने का डर दिखाकर ओटीपी मांगते थे. उनके झांसे में आकर लोग ओटीपी शेयर कर देते थे. उसी के जरिए यह साइबर अपराधी ऑनलाइन शॉपिंग के जरिए महंगे मोबाइल खरीद कर पीड़ित के बैंक खाते से पेमेंट कर देते थे. जब पीड़ित के मोबाइल पर ऑनलाइन खरीदी का मैसेज आता था, तब उसे पता चलता था कि वह ठगी का शिकार हो गया है. उधर साइबर अपराधी फर्जी बिल बनाकर मोबाइल को बेचकर कैश कर लेते थे.

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गिरफ्तार आरोपियों के पास से बरामद सामान

गिरफ्तार अपराधियों के पास से 300 से ज्यादा महंगी मोबाइल हैंडसेट, ₹1000000 नगद, 75 से अधिक क्रेडिट कार्ड, हार्ड डिस्क, लैपटॉप, TV और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद हुए हैं. 30 से ज्यादा फ्रीज Bank account की भी जानकारी मिली है.

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