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बाबा रामदेव की भागीदारी वाली मेगा फूड पार्क पर बैंक करोड़ों कर्ज, होगा नीलाम 

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#Ranchi: पतंजलि प्रमुख बाबा रामदेव की भागीदारी वाली मेगा फूड पार्क, गेतलसूद खुलने से पहले ही बंद हो गया. नौ साल में भी यह फूड पार्क चालू न हो सका और अब बैंक ने इसे लगभग अपने कब्जे में ले लिया है.

दो वर्ष पूर्व इसका उदघाटन भी कर दिया गया था. पर एक भी यूनिट यहां लगी ही नहीं. वर्तमान में स्थिति यह है कि मशीन सड़ रहे हैं. वेयर हाउस, कोल्ड स्टोरेज, पावर सब स्टेशन समेत 12 वाहन बेकार पड़े हुए हैं. पूरे परिसर में लंबी-लंबी झाड़ियां उग आयी हैं.

फूड पार्क का निर्माण कर रही झारखंड मेगा फूड पार्क प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का अब कोई रांची में कोई अधिकारी नहीं है. केवल 12 कर्मचारी यहां हैं, जिन्हें आठ माह से वेतन नहीं मिला है. मेगा फूड पार्क का भविष्य अब अधर में है.    इधर बैंक ने उपायुक्त को पत्र देकर  फूड पार्क का पोजेशन मांगा है.

इलाहाबाद बैंक का लोन एनपीए हुआ

मेगा फूड पार्क के निर्माण के लिए उद्योग विभाग ने स्पेशल पर्पस व्हेकल (एसपीवी) बनवा दिया था. एसपीवी का नाम झारखंड मेगा फूड पार्क प्राइवेट लिमिटेड है. इसके निदेशक नितिन शिनोई थे.

कंपनी द्वारा  इलाहाबाद बैंक की हरमू शाखा से 33.95 करोड़ रुपये का लोन लिया गया. इसके अलावा खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय द्वारा 43 करोड़ रुपये   अनुदान स्वरूप दिये गये थे. फरवरी 2009 में तत्कालीन केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्री सुबोधकांत सहाय, बाबा रामदेव और तत्कालीन राज्यपाल सैयद सिब्ते रजी ने इसका शिलान्यास किया था. रियाडा ने 56 एकड़ जमीन दी थी.

धीरे-धीरे  काम बढ़ता गया. निर्माण होता रहा. फरवरी 2016 में उदघाटन भी हुआ. पर कोई यूनिट नहीं लगी थी. इधर पिछले वर्ष निदेशक नितिन शिनोई का दुबई में निधन हो गया. इसके बाद ही पूरा प्रबंधन फेल हो गया.

बैंक के लोन पर ब्याज भी बढ़ता रहा, जो बढ़ कर  40 करोड़ रुपये हो गया. इसके बाद बैंक द्वारा सरफेसी एक्ट के तहत नोटिस दिया गया और आंशिक रूप से पोजिशन भी लिया गया. अंतिम रूप से पोजिशन लेने के लिए बैंक प्रबंधन द्वारा रांची के उपायुक्त को पत्र भेजा गया है. इधर परियोजना पदाधिकारी राकेश सहाय कंपनी से इस्तीफा दे चुके हैं. अभी कंपनी की तरफ से कोई भी जवाब देनेवाला नहीं है.

क्या कहते हैं बैंक मैनेजर: झारखंड मेगा फूड पार्क लिमिटेड पर 40 करोड़ रुपये का एनपीए हो गया था. जिसके कारण बैंक द्वारा सरफेसी एक्ट के तहत नोटिस दिया गया था. पर प्रबंधन की ओर से किसी प्रकार की राशि का भुगतान नहीं किया गया.

इसके बाद इन प्रिसिंपल पोजेशन बैंक द्वारा लिया गया है. अंतिम रूप से पोजेशन लेने के लिए रांची के उपायुक्त को पत्र भेजा गया है. पोजेशन मिलते ही इसकी नीलामी करायी जायेगी और नया प्रबंधन इसे चला सकता है.

सोमनाथ सिन्हा, ब्रांच मैनेजर, इलाहाबाद बैंक, हरमू ब्रांच

निर्माण कार्य हो चुके हैं पूरे 

मेगा फूड पार्क में 21 बड़े खाद्य प्रसंस्करण व 12 छोटे खाद्य प्रसंस्करण यूनिट लगाने का प्लॉट तैयार है. एक 10 एमवीए क्षमता  (33/11 केवी) का पावर सब स्टेशन भी बना हुआ है. पर वह  बंद है.  फूड पार्क के अंदर सड़कें बनी थी, पर वह अब टूट रही है.

दो वेयर हाउस हैं, जो खंडहर हो रहे हैं. वर्कर हॉस्टल भी खंडहर हो चुका है. प्रशासनिक भवन है, पर वीरान है.  वे ब्रिज भी बना हुआ है. कोल्ड स्टोरेज भी हैं, जो जहां-तहां से टू गये  हैं.  इसमें एसी लगा हुआ है. एक फूड टेस्टिंग लैब भी बना हुआ है. इसके अलावा 10 ट्रक और दो फ्रीजर वैन भी गोदाम में पड़े हैं.

पतंजलि के प्लांट का प्रस्ताव था

मेगा फूड पार्क में एक एकड़ से अधिक का एक प्लॉट रांची के ही  विजय केशो इंडस्ट्रीज को आवंटित किया गया था. इस कंपनी द्वारा काजू प्रोसेसिंग प्लांट लगाया जाना था. दूसरा प्लॉट  भी रांची के ही किचनमैट को आवंटित किया गया था.

पतंजलि वाणिज्य को 8.28 एकड़ का प्लॉट आवंटित किया था. फसर एग्रो को 3.2 एकड़ और ग्रीन कोस्ट को 4.32 एकड़ का प्लॉट आवंटित किया था. इनके अलावा राहा इंटरप्राइजेज, सूर्या हनी एग्रो, एवीसीआइएल एग्रो व स्वदेश प्रगति को भी प्लॉट दिया गया था. इन निवेशकों द्वारा लगभग दो करोड़ रुपये कंपनी प्रबंधन को दिये जा चुके हैं.

क्या कहते हैं उद्योग निदेशक: एनपीए होने की वजह से बैंक ने मेगा फूड पार्क को अपने कब्जे मे ले लिया है. हमने भारत सरकार को पत्र भेजा है. बैंक परिसर का अॉक्शन करायेगा, तो कोई नया प्रमोटर आने की संभावना बन सकती है.

के रवि कुमार, उद्योग निदेशक

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