झारखंड पुलिस के 6800 जवानों की नियुक्ति पर संकट, हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस

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Ranchi: झारखंड पुलिस में 2017 में बहाल 6800 जवानों की नियुक्ति पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं. हाई कोर्ट से जारी एक आदेश के बाद पुलिस मुख्यालय ने 2017 में बहाल सभी जवानों को नोटिस भेजकर बताया है कि उनकी नियुक्ति हाई कोर्ट के अंतिम निर्णय से प्रभावित होगी.

उन्हें अपने पक्ष में कुछ भी कहना है कि तो वे जवानों की सूची के साथ पुलिस मुख्यालय को अवगत कराएं, ताकि ससमय हाई कोर्ट में उनका पक्ष रखा जा सके. पुलिस मुख्यालय ने जवानों को यह नोटिस सभी जिलों के एसएसपी-एसपी, इकाई प्रमुख के माध्यम से तथा समाचार पत्रों में जारी विज्ञापन के माध्यम से जारी किया है.

सिपाही बहाली के लिए वर्ष 2015 में विज्ञापन संख्या 04/2015 निकला था, जिसके तहत वर्ष 2017 में 6800 जवान बहाल किए गए थे. इस बहाली में नियुक्ति प्रक्रिया, नियुक्ति नियमावली को चुनौती देकर वर्ष 2017 में हाई कोर्ट में एक याचिका सुनील टुडू बनाम झारखंड राज्य व अन्य दायर किया गया था. यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है और अगली सुनवाई 18 अक्टूबर 2021 को है.

गत 23 अगस्त को ही हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि इस याचिका में अदालत का जो अंतिम निर्णय होगा, उससे यह पूरी नियुक्ति प्रक्रिया प्रभावित होगी. हाई कोर्ट के आदेश के बाद राज्य सरकार ने पुलिस मुख्यालय को इससे अवगत कराया था, जिसके बाद ही पुलिस मुख्यालय से एडीजी मुख्यालय ने सभी जिला व इकाइयों को उक्त नोटिस से अवगत कराया है.

धैर्य रखें जवान, पुलिस मेंस एसोसिएशन है उनके साथ: अध्यक्ष

झारखंड पुलिस मेंस एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष राकेश कुमार पांडेय ने वर्ष 2017 में बहाल सभी जवानों को धैर्य रखने को कहा है.

उन्होंने कहा है कि उनके साथ झारखंड पुलिस मेंस एसोसिएशन खड़ा है उन्होंने ऐसे सभी जवानों से अपने शाखा के माध्यम से पुलिस मेंस एसोसिएशन कार्यालय को अपनी सूची भेजने को कहा है. झारखंड पुलिस मेंस एसोसिएशन सबसे सुझाव लेने के बाद संघ की ओर से अदालत में सूचना आवेदन देगा और आग्रह करेगा कि सुनील टुडू बनाम झारखंड सरकार व अन्य वाली याचिका को खारिज की जाय.

उनके जवानों ने चार साल तक अपनी सेवा दे दी है, अब वे कहां जाएंगे. एसोसिएशन अदालत को बताएगा कि नियुक्ति में अगर किसी प्रकार की कोई गड़बड़ी हुई है तो इसकी सभी जवाबदेही सरकार व प्राधिकार तथा नियुक्ति समिति के पदाधिकारियों की होगी. पीड़ित जवान किसी के बहकावे या भ्रम में न पड़ें और किसी तरह के चंदे एवं जल्दबाजी में कोई उगाही न करें. 

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