कोरोना से बचने के लिए लॉकडाउन बाद भी करें ये काम

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Ram Krishna Prasad

Ranchi: शताब्दि का महाप्रकोप कहा जाने वाला कोरोना वायरस जनित महामारी कोविड 19 ने जो चीन से प्रारम्भ होकर पूरे विश्व को महज कुछ ही महीनों में अपनी चपेट में ले लिया है. अभी तक लाइलाज है कोरोना.

कहा जाता है कि यह वायरस मानवजनित है, इसी वजह से वायरस का संक्रमण पहले व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति पर होने पर भी उसका प्रभाव कम नहीं होता. अर्थात यह वायरस जन्म के समय जितना प्रभावशाली था, हजारों व्यक्ति से गुजरने के बाद भी अंतिम व्यक्ति पर भी उतना ही प्रभावशाली रहेगा.

साधारणतया कृत्रिम महामारी की अपेक्षा प्राकृतिक बीमारी पर अनुसंधान कर नियंत्रण ज्यादा आसान होता है. इस महामारी से बचने के लिए विश्व के करीब सारे देशों में घोषित या अघोषित लाकडाउन है.

भारत ने भी वायरस के फैलाव को रोकने के लिए शुरुआती दौर में एक दिन का फिर 21 दिन का तत्पश्चात इसे बढ़ाकर तीन मई तक का किया गया. कई मायनों में कहा जाए तो प्रधानमंत्री के द्वारा लिया गया यह निर्णय उस वक्त आया, जबकि देश में संक्रमित मरीजों की संख्या महज नगण्य थी. जिससे भारत में वायरस के फैलाव को रोकने में यह निर्णय कारगर साबित हुआ साथ ही साथ जांच व इलाज की प्रक्रिया को स्थापित करने का समय रहते मौका भी मिल गया.

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हालांकि एक विशेष समुदाय की उदासीनता और अज्ञानता की वजह से यह वायरस का फैलाव जरूर हुआ. कोरोना का भारत में असर की बात की जाए तो भारत अग्रणी देशों की श्रृंखला में करीब सबसे पीछे के स्थान पर है और इसके कई कारण हैं. लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अन्य विकसित देशों की तुलना में बेहतर है, जिससे कोरोना से संक्रमण की संख्या अन्य देशों की तुलना में कम है.

वहीं कोरोना से ठीक होने वाले मरीजों की दर अन्य देशों से बहुत बेहतर है. देश में लोगों की औसत आयु करीब 29 वर्ष है, जबकि ऐसा मानना है कि कोरोना से संक्रमण का खतरा 16 वर्ष से कम एवं 58 वर्ष से ज्यादा आयु वर्ग के लोगों पर अत्यधिक होता है और यह भी एक वजह हो सकता है कि भारत पर कोरोना का असर कम रहा है.

पहला सवाल सामने आता है कि क्या लॉकडाउन ही इसका स्थायी समाधान है? तो जवाब है नहीं. आज महीने भर के लॉकडाउन से हम संक्रमण को जरूर कम कर पाये हैं, लेकिन यह इसका स्थायी समाधान नहीं है. लॉकडाउन की वजह से जहां देश आर्थिक मंदी से गुजर रहा है, वहीं छोटे एवं मध्यम उद्योगों के साथ-साथ कर्मचारी, कारीगर व मजदूर की अवस्था अत्यंत दयनीय हो गयी है. आम जनजीवन स्थिर है और व्यवस्था को पटरी पर आने में कई महीनों का सफर तय करना पड़ सकता है. दूसरा यह सवाल सामने आता है कि कोविड-19 बीमारी के समूल उन्मूलन की क्या संभावना है?

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संभवत: भारत जैसे देश में जहां जनसंख्या का वितरण असमान्य है और शहरी क्षेत्रों में अत्यधिक सघनता होने की वजह से संक्रमण का खतरा तो रहेगा ही और यही कारण है कि कोरोना जनित बीमारी के समूल उन्मूलन की संभावना कम प्रतीत होती है. हां इसका सटिक इलाज से इस पर कुछ हद तक काबू जरूर किया जा सकता है. उम्मीद के अनुरूप निकट भविष्य में कोरोना के निजात के लिए टीका बना लिया गया तो अन्य बीमारियों की तरह ही एहतियात संभव हो सकेगा.

संक्रमण के आकड़े को देखते हुए सरकार ने रेडजोन एवं ग्रीनजोन घोषित किया है, लेकिन लॉकडाउन खुलने के बाद हमें अपनी मानसिकता ऐसी बनानी होगी कि अपने दैनिक क्रियाकलापों एवं जीवनशैली में उचित बदलाव करके संक्रमण से बचने की कोशिश करें.

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जैसे हम लॉकडाउन में जी रहे हैं लगभग समान अवस्था में जीवन व्यतित करें.
सैनिटाइजेशन एवं मास्क का रेगुलर उपयोग करें एवं नियत समय पर बदलाव करें.
खान पान की चीजों पर पूरी तरह से ध्यान दें, ज्यादातर समय घरों में रहें, आवश्यक हो तभी घरों से निकलें.
अनावश्यक एवं अनजान लोगों से नियत दूरी बनाएं रखे, लंबी दूरी की यात्रा न करें या जरूरी पड़ने पर करें भी तो पूरी तरह से
एहतियात बरतें.
खुद के एवं आसपास सफाई का पूरा ध्यान रखें.
सरकार के आरोग्य सेतु मोबाइल ऐपलिकेशन को जरूर डाउनलोड करें.
नियमित तौर पर सरकारी आदेश एवं हिदायतों का पालन करें.

अगर संक्रमण हो भी जाए तो घबराने की जरूरत नहीं, सर्वप्रथम खुद को क्‍वारंटाइन करें, एवं कोरोना के लिए निर्गत अस्पताल में ही जांच एवं इलाज कराएं, तभी हम इस बीमारी पर नियंत्रण कर पायेंगे.

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