कोरोना शोध की साइबर चोरी की फिराक में कई देश

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New Delhi: महामारी से जूझ रही दुनिया के लिए साइबर अपराधी मुश्किल खड़ी कर सकते हैं. अमेरिका, ब्रिटेन जैसे देश जहां वायरस की काट पता करने में दिन रात एक किए हुए हैं. वहीं कुछ देशों की सरकारों से समर्थित साइबर हमलावार दवा कंपनियों, रिसर्च सेंटरों से गोपनीय सूचनाएं चुराने की कोशिश करने लगे हैं.

खतरे को भांपते हुए अमेरिका की साइबर सिक्योरिटी एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सिक्योरिटी एजेंसी (सीआईएसए) और ब्रिटेने के नेशनल साइबर सिक्योरिटी सेंटर (एनसीएससी) ने मंगलवार को अलर्ट जारी किया है. एनसीएससी और सीआईएसए ने बिना किसी देश का नाम लिए कहा कि हैकर्स दवा कंपनियों और शोध संगठनों से कोरोना से जुड़ी अहम जानकारी चुराने की कोशिश कर रहे हैं.

हालांकि अमेरिकी व ब्रिटेन के अधिकारियों की मानें तो साइबर हमले की कोशिश चीन, ईरान और कुछ रूसी हैकरों की ओर से होने की आशंका है. दोनों अधिकारियों की मानें तो इस मामले में तेहरान, बीजिंग और मॉस्को लगातार साइबर हमले की बात को नकार रहे हैं.

  • सामान्य पासवर्ड अपनाते

हैकर सामान्य तरह के पासवर्ड का इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं जिसे तकनीकी भाषा में ‘पासवर्ड स्प्रेइंग’ कहते हैं. पासवर्ड स्प्रेइंग में एक साथ उन अकाउंट्स को हैक करने की कोशिश होती है जिनका पासवर्ड एक होता है.

कई बार हैकर काम के हिसाब से पासवर्ड का अनुमान लगाकर डाटा चोरी करने की कोशिश करते हैं.

  • वियतनामी हैकर्स ने चीन में की सेंधमारी की कोशिश

कोरोना से जुड़ी जानकारी चुराने के लिए वियतनाम के हैकरों ने चीन की उस रणनीति का पता लगाने की कोशिश की थी जिसके जरिए उसने कोरोना को नियंत्रण किया. इसके अलावा कुछ देशों के हैकर ने विश्व स्वास्थ्य संगठन का भी डाटा चुराने की कोशिश की है लेकिन कामयाब नहीं हो सके हैं.

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