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कोरोना वॉरियर या विलेन: न सोशल डिस्‍टेंसिंग और न हैंडवॉश

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Ranchi: कोरोना वायरस का अभी तक कोई इलाज नहीं है. इसके संक्रमण का चेन तोड़कर ही बीमारी से जीता जा सकता है. इसी मकसद से पूरा देश दो महीने से लॉकडाउन में है. झारखंड में कोरोना के पुराने मामले लॉकडाउन से नियंत्रित हो गए हैं. वहीं प्रवासी मजदूरों के घर वापसी के बाद कोरोना पॉजिटिव के मामले पहले से कई गुना बढ़ते जा रहे हैं. वहीं अभी भी प्रवासी मजदूरों का आना जारी है. झारखंड में एंट्री के साथ ही सामाजिक संगठन के लोग प्रवासी मजदूरों को वाहनों को रोकर उनके लिए हर तरह का भोजन परोस रहे हैं. इस दौरान कई बसें ऐसी भी देखी जा रही हैं जिनमें क्षमता से अधिक सवारी बैठे होते हैं.

आगंतुकों के इस सेवा भाव के बीच उत्‍साह में कई चूक भी देखने को मिल रहे हैं. यह असावधानी कहीं न कहीं कोरोना संक्रमण के चेन को तोड़ने के प्रयास को विफल करता दिखता है. ऐसी ही छोटी-छोटी लेकिन बड़ी बातों को अब हम लगातार सामने लाने की कोशिश करेंगे. ताकि सभी उस तरह की गलतियां दोबारा नहीं करें और कोरोना के खिलाफ जंग में सबका सामूहिक प्रयास सफल हो सके.

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