कोरोना का महाराष्ट्र और गुजरात में विकराल रूप, दो राज्यों में 41 फीसदी मरीज

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New Delhi: कोरोना वायरस का भारत में हमले का पहला दौर भले ही दक्षिण भारत के केरल और कर्नाटक जैसे राज्यों से शुरू हुआ हो, लेकिन पश्चिमी भारत के दो बड़े राज्यों महाराष्ट्र और गुजरात में यह विकराल रूप धारण कर चुका है. भारत के कुल कोरोना मरीजों में अकेले 41 फीसदी महाराष्ट्र और गुजरात में हैं. दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा समेत उत्तर भारत के प्रभावित छह बड़े राज्यों के करीब बराबर मरीज अकेले महाराष्ट्र में हैं.

दो सबसे बड़े औद्योगिक राज्यों पर मार : देश के दो सबसे बड़े औद्योगिक राज्य गुजरात और महाराष्ट्र में कोरोना के मरीजों की संख्या 11369 तक पहुंच गई है. इनमें 8068 मरीज महाराष्ट्र और 3301 गुजरात में हैं.

गुजरात में पहला मामला 19 मार्च को था, जब केरल में देश के पहले मामले 30 जनवरी के ढाई महीने हो चुके थे, लेकिन तब से लॉकडाउन के 40 दिनों में ही उसके केस 99 फीसदी बढ़ गए.

यूपी, राजस्थान, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, दिल्ली और हरियाणा उत्तर भारत के छह सर्वाधिक प्रभावित राज्य है, यहां 8088 मामले हैं. 30 करोड़ आबादी वाले तीन राज्य राजस्थान, दिल्ली में मरीजों की संख्या दो-दो हजार पार है और यूपी भी करीब है. यूपी, राजस्थान, पंजाब में कोई ऐसा शहर नहीं है, जहां अकेले 30% से ज्यादा मामले हों.

देश के पूर्वी हिस्से में बंगाल, बिहार औऱ झारखंड तीन सर्वाधिक प्रभावित राज्य हैं, जिनमें बंगाल चिंता का कारण है. वहां पहला केस 18 मार्च को लॉकडाउन के कुछ दिनों पहले आया, लेकिन 40 दिनों में संख्या 611 हो गई है. वहां लॉकडाउन के नियमों का पालन न होने से केंद्र चिंतित है.

85 जिलों में एक पखवाड़े से कोरोना का नया मामला नहीं

केंद्र सरकार ने दावा किया है कि देश में 85 जिलों में बीते 14 दिनों से कोरोना का नया मामला नहीं आया है. 16 जिले ऐसे हैं, जहां बीते 28 दिनों से नया रोगी नहीं मिला है. कुछ जिले ऐसे भी पाए गए हैं, जहां 28 दिनों के बाद नए मामले आ गए हैं. इनमें यूपी का पीलीभीत और पंजाब का एसबीएस नगर शामिल है.

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा कि सरकार की सूची में लखीसराय, गोदिया तथा दावणगेरे तीन ऐसे जिले शामिल हुए हैं, जिनमें पिछले 28 दिनों से नए मामले नहीं आए हैं.

उन्होंने संक्रमितों की संख्या का ब्योरा देते हुए यह भी बताया कि देश में कोविड से स्वस्थ होने की दर में भी लगातार सुधार हो रहा है. यह दर बढ़कर 22.17 प्रतिशत तक पहुंच गई है.

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