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बजट सरकार के श्वेतपत्र के मापदण्ड के विपरीत: सुदेश महतो

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Ranchi: झारखंड विधानसभा में पेश किए गए बजट अभिभाषण पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए आजसू पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष सुदेश कुमार महतो ने कहा कि यह बजट चुनाव के वादों और जनादेश के अपेक्षा के अनुरूप नहीं है.

सरकार द्वारा जारी किए गए श्वेतपत्र के मापदण्ड के विपरीत है. इस बजट में राजस्व बढ़ने का कोई रोड़मैप निर्धारित किए बिना कुल आकार में हजार करोड़ से ज्यादा की वृद्धि की गई. बजट ऐसा होना चाहिए जो धरातल पर पहुंचे.

उद्योग और व्यवसायी जगत में फैली निराशा एवं मंदी से उभारने के लिए कोई नीति निर्धारण नहीं किया गया है. इससे प्रदेश में रोजगार सृजन मे सीधा असर पड़ेगा. झारखण्ड में रोजगार के प्रमुख स्रोत जैसे निर्माण, आधारभूत संरचना, माईनिंग, ट्रांसपोर्ट क्षेत्रों की अनदेखी की गई है.

जिला परिषद और पंचायती राज व्यवस्था को सुदृढ़ और सशक्त बनाने के लिए बजट में कोई प्रावधान नहीं किया गया है.

झारखण्ड का 71 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है. बजट में इसे केंद्रीत नहीं किया गया है.

राज्य में कार्यरत संविदा कर्मियों के स्थायीकरण पर कोई विचार नहीं किया गया है.

बजट निराशाजनक एवम छलावा है: बाबूलाल मरांडी

भाजपा नेता विधायकदल एवम राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सरकार के द्वारा आज विधानसभा में प्रस्तुत किये गए बजट को पूर्णतः निराशाजनक एवम प्रदेश की जनता केलिये छलावा मात्र बताया। मरांडी ने कहा कि यह बजट गांव ,गरीब ,किसान,मज़दूर,युवा बेरोजगार सबको निराश करने वाला बजट है. राज्य की जनता का इससे कुछ भी भला होने वाला नही है.

उन्होंने कहा कि इस बजट में न तो गरीबी दूर करने की दिशा में कोई प्रयास दिखाई पड़ता है,न ही मज़दूरों के मज़दूरी बढ़ाने पर विचार किया गया है. गरीबों,आदिवासियों के कल्याण की बात करने वाली सरकार ने मनरेगा के कार्यदिवस और मजदूरी की राशि बढ़ाने की दिशा में भी प्रयास नही किये. आज गांव से मजदूरी करने आये मजदूर काम के अभाव मे वापस लौट जातें हैं. जिसमे सर्वाधिक संख्या दलित,आदिवासी समाज के ही लोग रहते हैं. सरकार कुछ नही तो मनरेगा की मजदूरी ही 300 रुपये बढ़ाकर करदेती तो गरीबों की आयमे बड़ी वृद्धि होती।सरकार ने अपने आर्थिक सर्वेक्षण को आधार माना होता तो गरीबों की आय बढ़ाने की दिशा में सार्थक प्रावधान करती परंतु सरकार की सोच गरीबों केलिये नही है.

उन्होंने कहा कि सरकार कीऋण माफी की घोषणा भी धोखा है. इसे श्रेणी और दायरों में सीमित करके लाखों किसानों को धोखा दिया गया है. इसके अतिरिक्त हेमंत सरकार रघुवर सरकार द्वारा चलाई गई कृषि आशीर्वाद योजना,पंप सेट वितरण योजना को बंद करने की घोषणा करके उनके उम्मीदों पर पानी फेर दिया है.

इस बजट ने युवाओं ,बेरोजगारों को सर्वाधिक निराश किया है. युवा बेरोजगार चुनावी वायदों के अनुरूप बेरोजगारी भत्ता की आशा कर रहे थे परंतु उसे भी सीमाबद्ध कर मात्र खाना पूर्ति ही की गई है. पारा शिक्षकों को भी वेतनमान की घोषणा नही करने से वे पूरी तरह छला महशुश कर रहे हैं.

श्री मरांडी ने कहा कि कृषि प्रधान देश मे कृषि रोजगार का सबसे बड़ा क्षेत्र है।परंतु सरकार ने कृषि क्षेत्र केलिये मात्र 3हजार करोड़ का प्रावधान करके किसानों को हताश किया है.

उन्होंने कहा कि तकनीकी शिक्षा सरकार की प्राथमिकता में नही है. छात्राओं की तकनीकी शिक्षा केलिये मात्र 10 करोड़ का प्रावधान कोई मायने नही रखता,यह केवल आंखों में धूल झोंकने जैसा है.

श्री मरांडी ने कहा कि आधारभूत संरचना पर भी यह सरकार गंभीर नही है।ग्रामीण सड़क,ग्राम सेतु योजना,उच्च पथ निर्माण की दिशा में किये गए प्रावधान भी निराशाजनक है.

निराश करनेवाला है बजट: दीपक प्रकाश

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने कहा कि बजट में सरकार के लोगों की अनुभवहीनता एवम विकास विरोधी सोच स्पष्ट झलक रही है. श्री प्रकाश ने कहा कि इस बजट से विकास की रफ्तार धीमी होगी।ग्रामीण अर्थव्यवस्था को झटका लगेगा,किसान,मजदूर,युवा,बेरोजगार सभी निराश हुए हैं.

उन्होंने कहा कि यह सरकार सिर्फ वोट केलिये लंबी घोषणाओं का जाल बिछाया,जिसकी पोल आज पूरी तरह खुल चुकी है.

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