सीएम हेमंत सोरेन के लाइव न्‍यूज कवरेज में कांग्रेस नेता ने महिला पत्रकार से कहा- बाथरूम जा रहा हूं, चलेंगी क्‍या?

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Ranchi: किसी एक लड़की को बेइज्जत कैसे किया जाता है, यह झारखंड में ही देखा जा सकता है. यहां एक महिला पत्रकार के साथ बदसलूकी मुख्यमंत्री और राज्यपाल के सामने हो जाती है. हेमंत सोरेन सरकार के दो साल पर आयोजित राज्येस्तरीय कार्यक्रम के दौरान महिला पत्रकार को एक कांग्रेस नेता द्वारा न्यूज कवरेज करने से रोकने की कोशिश की जाती है. महिला पत्रकार के साथ बदसूलकी करते हुए लाइव न्यूज में कांग्रेस नेता कहता है- बाथरूम जा रहा हूं, साथ चलेंगी क्या ?

हेमंत सरकार के दो साल के जश्न पर रांची के मोरहाबादी मैदान में राज्य स्तरीय बड़ा कार्यक्रम आयोजित हुआ. पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार इसमें मुख्यशमंत्री कई बड़ी घोषणाएं कर रहे थे. उम्मीद थी कि मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में पूरे राज्य से लोग जुटेंगे. आयोजन स्थल की कुर्सियां भरी होंगी. इसके लिए खूब प्रचार-प्रसार हुआ. अखबारों और न्यूज चैनल के साथ इस बार न्यूंज पोर्टलों को भी विज्ञापन दिया गया. कार्यक्रम के आयोजन में करोड़ों रूपये पानी की तरह बहाये गए. लेकिन एक सच्ची खबर फुले हुए गुब्बारे पर पिन चुभोने का काम कर गया.

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रांची की एक महिला पत्रकार गौरी रानी ने अपने चैनल के फेसबुक लाइव पर मुख्युमंत्री के कार्यक्रम की खाली कुर्सियां दिखाना शुरू कर दिया. तब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन मंच से सभा को संबोधित कर रहे थे. वहां राज्य पाल रमेश बैश, सरकार के मंत्री, विधायक और कई गणमान्य बैठे हुए थे. तभी एक आदमी वहां पहुंचता है. उसके चेहरे पर मास्क रहता है. वह महिला पत्रकार को न्यूज कवरेज करने से रोकने की कोशिश करता है. बहस करता है. महिला पत्रकार से बदतमीजी करता है. इस दौरान वह यह भी कहता है कि बाथरूम जा रहा हूं… साथ चलेंगी क्या?

फेसबुक पर यह लाइव वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. वहां अपने कमेंट में कांग्रेस के कथित नेता को लोग भला बुरा कह रहे हैं. साथ ही यहां हेमंत सोरेन की सरकार की तीखी आलोचना भी हो रही है.

झारखंड के वरिष्ठ पत्रकार कृष्ण बिहारी मिश्र अपने ब्लॉग विद्रोही 24 में घटना की कड़ी निंदा करते हुए लिखते हैं कि इस कांग्रेसी नेता ने जिस प्रकार की भाषा का प्रयोग एक महिला पत्रकार के लिए किया हैं, और जिन-जिन भाषा का प्रयोग किया है, उसे कोई भी सभ्य महिला या पुरुष बर्दाश्त नहीं कर सकता. अब सवाल उठता है कि किसी पत्रकार को चाहे वह महिला हो या पुरुष उसे जनता को क्या दिखाना है, वह इन छुटभैये नेताओं से पूछकर दिखायेगा. हमें किस प्रकार की पत्रकारिता करनी हैं, कैसे करनी हैं, अब सत्ता में शामिल पार्टियां हमें बतायेंगी.

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केबी मिश्र आगे लिखते हैं कि सारे पत्रकार को आप खरीद तो नहीं सकते, जो बिकाऊ हैं, उन्हें आप खरीद कर अपने पक्ष में जो लिखवा रहे हैं, या जो वो लिख रहे हैं, उनको कौन मना कर रहा हैं, पर जो बिकाऊ नहीं हैं, उन्हें भी अपने बाहुबल से, गालियों से, बदतमीजी से स्वयं के पक्ष में समाचार लिखने और दिखाने को कहेंगे तो ये तो संभव नहीं हैं.

इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस या किसी दूसरे सत्तांधारी पार्टी के जिम्मेदार नेताओं और पदाधिकारियों के द्वारा किसी तरह की आधिकारिक बयान नहीं आया है.

घटना के बाद गौरी रानी कहती हैं कि निर्भिक और निष्पक्ष पत्रकारिता करना मैंने सीखा है. सच्ची तस्वीर के साथ आईना दिखाना मेरा कर्तव्य है, चाहे वो काई भी हो. मैंने आज भी वही किया. मुख्य्मंत्री हेमंत सोरेन के दो साल के जश्न में खाली कुर्सियों की तस्वीेरें दिखाई जो शायद कोई नहीं दिखा रहा था. यह मेरी ड्यूटी है. लेकिन इस दौरान मेरे साथ जो हुआ वह किसी भी बेटी, बहन बर्दाश्‍त नहीं कर सकती है. वहां मौजूद कांग्रेस कार्यकर्ता के द्वारा मुझे अपना काम करने से रोकने की कोशिश की गई. लाइव रिपोर्टिग में मुझसे उसने बदसलूकी हुई. जो किसी भी लड़की के मान-मर्यादा को तार-तार करता है. मैं बहुत आहत हूं. लेकिन डरी नहीं हूं. अपनी ड्यूटी निडर होकर करती रहूंगी. साथ-ही-साथ आज की घटना का विरोध हर मोर्चे पर करूंगी. इस घटना को लेकर रांची प्रेस क्लब से भी सथ देने की अपील करती हूं. आज जो मेरे साथ हुआ वह कल किसी भी पत्रकार के साथ हो सकता है. कोई भी अप्रिय घटना आगे घटे इसके पहले इसका विरोध हर मंच पर होना जरूरी है.

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