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लोकसभा चुनावों में कांग्रेस व झामुमो का वोट शेयर लगातार घटा, बीजेपी आजसू व झाविमो को हुआ फायदा

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Ranchi: लोकसभा चुनाव की बिगूल बज चुकी है. झारखंड में चार चरणों में वोटिंग होंगे. यहां लोकसभा के 14 सीट हैं. चुनाव में बहुत कम वक्‍त बचा है. ऐसे में इसकी तैयारी को लेकर राजनीतिक दलों की कसरत बढ़ गयी है.

अभी तक यह तय नहीं हो पाया है कि कौन सी पार्टी किस खेमे से होगी. लेकिन सबसे यह जरूर तय कर लिया है कि कौन से मुद्दे जनता का मूड तय करेगा.

झारखंड में पिछले तीन लोकसभा चुनाव दर्शाते हैं कि वोटिंग प्रतिशत पहले से 13 फीसदी बढ़ गया है. लेकिन यह आंकड़े वोट शेयर सीटों का समीकरण नहीं बनता है. आइए जानते हैं पिछले लोकसभा चुनाव में वोटिंग और वोट शेयर के ट्रेंड क्‍या कहते हैं.

तीन लोकसभा चुनावों के दौरान झारखंड में मतदाताओं की संख्‍या 20 फीसदी बढ़ गयी. लेकिन मतदान घटता-बढ़ता रहा. 2009 में 2004 के मुकाबले मतदान 5 फीसदी घटा तो साल 2014 में  15 फीसदी बढ़ गया.

2014 में मतदान में रिकॉर्ड बढ़ोतरी का सबसे ज्‍यादा फायदा भाजपा को हुआ. हालांकि 2009 में मतदान प्रतिशत गिरने पर भी भाजपा को ही सबसे ज्‍यादा 8 सीटें मिली थीं.

वोटिंग ट्रेंड और नतीजे बताते हैं कि झारखंड में हर पार्टी ने गढ़ में ही मजबूत है. किसी बड़े राष्‍ट्रीय मुद्दे पर मतदान का प्रतिशत बढ़ते ही पार्टियों के किलों में सेंध लगती हैं.

कांग्रेस और झामुमो का वोट शेयर घटता गया

2004 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को एक सीट मिली थी, इसके बावजूद उसका वोट शेयरिंग 33 फीसदी रहा.  जो 6 सीटें जीतने वाली कांग्रेस के 21.4 फीसदी से भी ज्‍यादा था.

2014 के चुनाव में भाजपा का वोट शेयर सबसे ज्‍यादा था. तब 14 में से 12 सीटें भी उसके खाते में गयीं.

महागठबंधन  की खींचतान में कांग्रेस और झामुमो भले बड़े दल के तौर पर पहचाने जाते हों, मगर चुनाव दर चुनाव इन दोनों दलों को वोट शेयर लगातार घटता गया है. वहीं 2009 में पहला लोकसभा चुनाव लड़ने वाले झाविमो का वोट शेयर लगातार बढ़ा है.

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