दारू प्रखंड के पंचायतों में कमीशनखोरी का बोलबाला, वार्ड सदस्‍य के सगे-संबंधी कर रहे अवैध वसूली

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Hazaribagh: जिले के अंतर्गत सभी प्रखंडों के पंचायत में वार्ड सदस्य अपने मूल कर्तव्‍य से भटक गए हैं. हम यहां दारू प्रखंड के पंचायतों के जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली की पोल खोलने जा रहे हैं. इस पूरी रिपोर्ट में आप पढ़ेंगे कि किस तरह प्रखंड के पंचायतों में सरकारी योजनाओं का लाभ लाभुकों तक पहुंचाने के लिए सरेआम कमीशनखोरी चलता है और इसकी भनक जिम्‍मेदार अधिकारियों को भी नहीं है.

दारू प्रखंड के पंचायतों के वार्ड सदस्‍य अनैतिक तरीके से धन उपार्जन में लगे हुए हैं. पैसों के लिए हर हथकंडा अपना रहे हैं. दरअसल पंचायत के वार्ड सदस्‍यों का चुनाव इसलिए हुआ है कि सरकारी योजनाओं की जानकारी इलाके के जन-जन तक पहुंचायें. वृद्धा पेंशन, पीएम आवास योजना, शौचालय निर्माण योजनाओं का लाभ जरूरतमंद लाभुकों तक पहुंचाए. लेकिन ये सब काम काम बिना पैसों के उपरी चढ़ावे के यहां नहीं होता है. इसके लिए वार्ड सदस्‍यों ने एक निश्चित रेट तय कर रखा है.

कमीशन बिना नहीं मिलता योजना का लाभ

योजनाओं के लाभ के एवज में तय रेट के साथ डील के लिए आदमी भी तय रहता है. आम तौर पर सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए कमीशन की सेटिंग के लिए वार्ड सदस्‍य के सगे-संबंधी होते हैं. यदि वार्ड सदस्‍य महिला है तो कमीशन सेटिंग का काम पति के जिम्‍मे होता है. जिससे कमीशन तय हो जाता है उसी को सरकारी योजना का लाभ मिलता है.

सरकारी योजना के लिए तय है कमीशन की रेट

इलाके में हर सरकारी काम के लिए अलग-अलग रेट तय किया हुआ है. जिसकी सेटिंग-गेटिंग वार्ड सदस्‍य का कथित प्रतिनिधि या एजेंट पति या रिश्‍तेदार करता है. यहां प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए 15 से 20 हजार तक तय किया जाता है. वृद्धा पेंशन के लिए 200 से ₹500 तक लिया जाता है. वहीं शौचालय निर्माण में 1000 से ₹2000 तक वसूल किया जाता है.

कमीशन देने के बाद भी नहीं होता काम

यहां के स्थानीय लोगों का कहना है कि वार्ड सदस्य के रिश्तेदारों के द्वारा काम करवाने के एवज में पैसे तो लिए जाते हैं, लेकिन वह काम भी नहीं होता है. काम के लिए उन्हें बार-बार दौड़ाया जाता है. कई ग्रामीणों का कहना है कि वह इसकी लिखित शिकायत प्रखंड स्तर पर बीडीओ और संबंधित अधिकारी को जमा करेंगे.

मामले में संबंधित अधिकारियों का आश्‍वासन देते हुए कहाना है कि शिकायतों पर जांच करते हुए कार्यवाही की जाएगी. साथ ही उन्‍होंने कहा है कि ऐसे कोई भी वार्ड सदस्य या उनके सगे संबंधी की शिकायत की पुष्टि होती है तो तो उन्हें बख्शा नहीं जाएगा.

वहीं जब हमने अलग-अलग पंचायतों के मुखिया से इस संबंध में बात की तो मुखिया का कहना है कि ऐसे वार्ड सदस्य की जानकारी अगर उन्हें प्राप्त होती है तो निश्चित तौर पर वह इसे संज्ञान लेंगे और मामले की जांच की जाएगी. वैसे वार्ड सदस्य से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा.

बता दें कि जल्द ही झारखंड पंचायत चुनाव 2022 की घोषणा होने वाली है. ऐसे में हमारी लोकल खबर की टीम राज्‍य के गांव-गांव तक पहुंचेगी और जमीनी सच्चाई आप तक पहुंचाने का काम करेगी. किस क्षेत्र में क्या हुआ है काम? किस मुखिया ने लोगों के दिलों में बनाई जगह अपने काम से? किस वार्ड सदस्य ने अपने पद का किया दुरुपयोग और कहां है ग्रामीण नाखुश. खोलेंगे  परत दर परत सभी सच्चाई जुड़े रहे हमारे साथ.

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