Take a fresh look at your lifestyle.

Cheap car insurance Tips in Hindi, IDV का ध्यान रखना जरुरी

0

Cheap car insurance: Car Insurance रिन्यू करते वक्त अगर आप भी Insurance Companies के ऑफर से भ्रमित हो जाते हों तो यह खबर आपके लिए ही है. पॉलिसी लेने वाले कुछ ग्राहक अलग-अलग Insurance Companies Premium में तुलना करने में जुट जाते हैं. इसमें कोई बुराई नहीं है, लेकिन इतना ध्यान रखें कि यह तुलना करते वक्त Insured Declared Value (IDV) कम न हो जाये. कंपनियों के प्रीमियम की गणना IDV पर निर्भर करती है. कई कंपनीयां प्रीमियम की रकम कम कोट करती हैं, लेकिन वे इस हिसाब से IDV भी कम कर देती हैं.

IDV किसी कार पॉलिसी का सम एस्योर्ड होती है. यह वह रकम है जो कार के डैमेज या चोरी होने की स्थिति में आपको मिलती है. इसलिए अगर यह अलग Insurance Companies के मामले में अलग है तो उसके लिए प्रीमियम की रकम भी अलग हो सकती है. जहां आपको सबसे कम प्रीमियम दिखता है, जरूरी नहीं कि वहां IDV भी ठीक हो.

एक कंप्रिहेंसिव Car Insurance में दो जोखिम कवर होते हैं. पहला रिस्क कार को होने वाले नुकसान (ऑन डैमेज) है तो दूसरा थर्ड पार्टी रिस्क है.थर्ड पार्टी टैरिफ कानून द्वारा बाध्य है, ऑन डैमेज का प्रीमियम IDV पर निर्भर करता है. जब आप पहली बार Car Insurance लेते हैं या जब आप रिन्युअल करते हैं, IDV का हमेशा महत्वपूर्ण रोल होता है.

नयी कार की IDV शुरुआत में जब आप कार खरीदते हैं तो इसकी IDV कार बनाने वाली कंपनी के ब्रांड और मॉडल की लिस्टेड सेलिंग प्राइस से तय होती है. पॉलिसी बाजार डॉट कॉम के हेड (मोटर इंश्योरेंस) नीरज गुप्ता ने कहा, ‘नयी कार के लिए IDV कार के एक्स शोरूम प्राइस में डेप्रिशिएशन को घटाकर की जाती है. नयी कार में आम तौर पर डेप्रिशिएशन पांच फीसदी होता है. इस हिसाब से डिफॉल्ट डेप्रिशिएशन कार के एक्स शोरूम प्राइस का 95 फीसदी होता है.’ शोरूम से बाहर जाने पर कार की IDV आप जैसे ही कार को शोरूम से बाहर ले जाते हैं, IDV में कमी शुरू हो जाती है. कवरफॉक्स डॉट कॉम के निदेशक (हेल्थ, लाइफ एंड स्ट्रेटेजिक इनिशिएटिव्स) महावीर चोपड़ा ने कहा, ‘कार खरीदने के छह महीने में इसकी IDV पांच फीसदी गिर जाती है. कार की IDV लगातार गिरती रहती है और कई बार पांच साल बाद इसकी IDV 50 फीसदी तक हो जाती है.’

Cheap car insurance in india : रिन्यूएल के समय IDV

जिस समय पॉलिसी खरीदी जाती है और जब इसका रिन्यूएल किया जाता है, प्रीमियम की गणना कार की घटी हुई कीमत पर की जाती है. हालांकि कार के मालिक के रूप में आप IDV की घोषणा के लिए स्वतंत्र हैं. चोपड़ा ने कहा, ‘Car Insurance को रिन्यू करते समय बीमा खरीदने वाला व्यक्ति इसकी IDV में बदलाव कार सकता है. इसकी सीमा और मैक्सिमम कैप हालांकि बीमा करने वाली कंपनी पर निर्भर करता है.’

IDV में कितना अंतर हो सकता है?

एक टेबल में कार का डेप्रिशिएशन रेट डालने पर इसकी IDV फिक्स हो जाती है. इसके बाद भी हालांकि इस बात की गुंजाईश है अगर कार मालिक इसे बदलना चाहता हो. गुप्ता ने कहा, ‘यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपकी बीमा कंपनी इसमें कितना बदलाव करने की इजाजत देती है. कई बार यह 15 फीसदी तक होता है. अगर किसी कार के लिए IDV तीन लाख रूपये ऑफर किया जा रहा है तो आप इसे 2 .55 लाख रूपये से लेकर 3 .45 लाख रूपये तक तय कर सकते हैं.’ किसी दुर्घटना की स्थिति में हालांकि यह जरूरी नहीं है कि आप IDV के बराबर रकम का दावा करें. आपका दावा क्लेम के प्रकार और कार को हुए नुकसान के हिसाब से तय होता है. चोपड़ा ने कहा, ‘आपको यह ध्यान रखने की जरूरत है कि IDV वह अधिकतम वैल्यू है जिसके लिए कार का बीमा किया गया है. अधिक IDV का मतलब अधिक प्रीमियम है.’

अधिक IDV पर क्लेम सेटलमेंट

अगर बीमा कंपनी और कार मालिक अधिक IDV के लिए तैयार हो जाते हैं तो क्लेम सेटलमेंट में कोई दिक्कत नहीं आती.चोपड़ा ने कहा, ‘अगर दोनों पक्ष अधिक IDV के लिए तैयार हो जाते हैं तो बाद में उस IDV पर क्लेम के भुगतान के लिए कंपनी पीछे नहीं हट सकती. यहां यह ध्यान रखना जरुरी है कि क्लेम वास्तविक होना चाहिए और सभी औपचारिकता पूरी होनी चाहिए.’ समझदारी हालांकि इसी में है कि IDV को तय लिमिट में ही रखा जाय.

गुप्ता ने कहा, ‘कई बार सिस्टम या तकनीकी गड़बड़ी की वजह से IDV अधिक हो जाती है, इस तरह के मामलों में जांच में यह पता लगाया जाता है कि IDV की गणना सही तरीके से की गयी थी या नहीं.’ अगर IDV अधिक है तो बीमाकर्ता यह कहकर क्लेम देने से इंकार कार सकता है कि फ्रॉड करने के लिए जान बूझकर IDV अधिक रखी गयी.

IDV के बराबर क्लेम सेटलमेंट

दो तरह के मामलों में क्लेम IDV के बराबर हो सकता है. अगर कार चोरी हो जाती या किसी दुर्घटना के मामले में कार को हुई क्षति 75 फीसदी से अधिक है. गुप्ता ने कहा, ‘पुलिस द्वारा कई महीने की जांच के बाद या बीमा कंपनी की तरफ से नियुक्त एजेंट की तहकीकात के बाद भी अगर कार का पता नहीं लगे तो क्लेम IDV के बराबर हो सकता है. इसके अलावा किसी दुर्घटना की स्थिति में अगर कार 75 फीसदी से अधिक डैमेज है तो यह भुगतान IDV के बराबर हो सकता है.’

पुरानी कारों के मामले में IDV

अगर कार पांच साल से अधिक पुरानी है या उस मॉडल की है जिसे अब कंपनी बंद कर चुकी है तो उसकी वैल्यू बीमा कंपनी और कार मालिक की बीच की समझदारी पर तय की जाती है. कई बार पुरानी कारों का इंश्योरेंस रिन्यू करते वक्त बीमाकर्ता को दिक्कत होती है. गुप्ता ने कहा, ‘अगर यह एक चालू पॉलिसी है तो बीमा कंपनी इसे रिन्यू करने से मना नहीं कर सकती. यहां हालांकि कई तरह की छूट जैसे जीरो डेप्रिशियेन्स जैसी सुविधाएं न मिलें. इसके अलावा बीमा करने वाली कंपनी प्रीमियम के अलावा कई लोड लगा सकती हैं. दूसरे शब्दों में बीमा कंपनियां इसका इंश्योरेंस बहुत महंगा कर सकती है, जिससे बीमा करने वाला पॉलिसी रिन्यू करने से पहले दो बार इसके बारे में सोचे.’ इसके बाद भी थर्ड पार्टी कवर के लिए कंपनियां माना नहीं कर सकतीं क्यों यह कानूनन जरूरी है.

आप क्या करें

Cheap car insurance : अगर कार की IDV अलग बीमा कंपनियां अलग बताती हैं तो लोग क्या करें? चोपड़ा ने कहा, ‘किसी एक कार के लिए अलग अलग IDV हो सकती है. इससे प्रीमियम की रकम भी बदल सकती है. आपको जहां सही प्रीमियम पर अधिकतम IDV मिले, वहीं से बीमा कराएं.’

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More

%d bloggers like this: