टाटा रांची सड़क निर्माण पर हाई कोर्ट ने दिया सीबीआई जांच का आदेश

by
#Ranchi : रांची-जमशेदपुर रोड (एनएच-33) के फोर लेनिंग कार्य के लिए संवेदक को मिली राशि के विचलन (राउंड ट्रिपिंग) की जांच सीबीआइ करेगी. झारखंड हाइकोर्ट ने बुधवार को इससे संबंधित पीइ दर्ज कर मामले की जांच करने का आदेश सीबीआइ को दिया है. जस्टिस अपरेश कुमार सिंह व जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की खंडपीठ ने मामले में स्वत: संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सीबीआइ को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है.

भारत सरकार के कॉरपोरेट मंत्रालय की सीरियस फ्रॉड इंवेस्टीगेशन अॉर्गेनाइजेशन (एसएफआइअो) को सीलबंद प्रारंभिक जांच रिपोर्ट की प्रति सीबीआइ को हैंड ओवर करने और जांच में पूरा सहयोग करने का निर्देश दिया है. साथ ही नेशनल हाइवे अथॉरिटी अॉफ इंडिया (एनएचएआइ) को भी संबंधित दस्तावेज सीबीआइ को उपलब्ध कराने को कहा है.

कार्य रुकना नहीं चाहिए
मामले की सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने मौखिक रूप से कहा कि रांची-जमशेदपुर रोड के फोर लेनिंग पर 80 प्रतिशत राशि खर्च होने के बाद 50 प्रतिशत कार्य दिखाया गया. दोनों में भारी अंतर है. एनएचएआइ, कांट्रेक्टर व बैंक के आपसी विवादों से जनहित का नुकसान नहीं होना चाहिए. असीमित काल तक के लिए मामले को लंबा खींचने का मौका नहीं दिया जा सकता है. जनहित में रांची-जमशेदपुर राष्ट्रीय राजमार्ग का जल्द बनना जरूरी है. सड़क निर्माण कार्य जारी रहना चाहिए. कार्य किसी भी परिस्थिति में रुकना नहीं चाहिए.
आशुतोष आनंद नये एमीकस क्यूरी : खंडपीठ ने एग्रीमेंट समाप्त करने से संबंधित एनएचएआइ के आवेदन (आइ) को देखते हुए प्रतिवादी कांट्रेक्टर व बैंक आदि को जवाब दाखिल करने को कहा है. अधिवक्ता दिलीप जेरथ के निधन के बाद अधिवक्ता आशुतोष आनंद को एमीकस क्यूरी नियुक्ति किया है. उन्हें केस से संबंधित सभी आदेश की प्रति व रिकॉर्ड उपलब्ध कराने को भी कहा. मामले की अगली सुनवाई के लिए नाै अगस्त की तिथि निर्धारित की.
सीबीआइ का पक्ष
सीबीआइ की ओर से अधिवक्ता राजीव सिन्हा ने खंडपीठ को बताया कि एजेंसी रांची-जमशेदपुर राष्ट्रीय राजमार्ग के फोर लेनिंग कार्य में राशि विचलन की जांच के लिए तैयार है. उन्होंने एसएफआइअो की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट का अध्ययन रजिस्ट्रार जनरल के समक्ष किया है. जांच रिपोर्ट सहित अन्य जरूरी दस्तावेज उपलब्ध होने पर जांच शुरू करने की बात कही. साथ ही प्रारंभिक जांच रिपोर्ट तीन माह में सौंपने की बात कही.
इन्होंने भी रखा पक्ष
राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता राजीव रंजन मिश्रा ने पक्ष रखा. एनएचएआइ की अोर से वरीय अधिवक्ता अनिल कुमार सिन्हा, बैंक की ओर से वरीय अधिवक्ता जय प्रकाश, संवेदक कंपनी रांची एक्सप्रेस-वे की तरफ से अधिवक्ता अनूप कुमार मेहता ने पक्ष रखा. सुनवाई के दौरान सीबीआइ एसीबी धनबाद के एसपी नागेंद्र सिंह व एसीबी रांची के एसपी उपस्थित थे.

Read Also  Durga Puja 2021 में जारी रहेगी कोरोना के खिलाफ जंग, कोविड गाइडलाइंस पालन करने की अपील

एसएफआइअो की रिपोर्ट पर सीबीआइ करेगी प्रारंभिक जांच, तीन माह में सौंपेगी रिपोर्ट

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने कहा था : एनएचएआइ, संवेदक और बैंक की भूमिका की भी जांच की है जरूरत
पिछली सुनवाई के दाैरान खंडपीठ ने एसएफआइअो की सीलबंद प्रारंभिक जांच रिपोर्ट को गंभीरता से लेते हुए कहा था कि फोर लेनिंग के लिए आवंटित राशि की राउंड ट्रिपिंग की स्वतंत्र एजेंसी से समुचित जांच कराने की आवश्यकता है. एसएफआइअो ने अपनी जांच में आवंटित राशि की राउंड ट्रिपिंग की बात कही है. खंडपीठ ने यह भी कहा था कि ऐसा प्रतीत होता है कि एनएचएआइ के ढीले रवैये के कारण निर्माण कार्य निर्धारित समय पर पूरा नहीं हो पाया. एनएचएआइ, संवेदक व बैंक की भूमिका की भी जांच की जरूरत है.

Read Also  2 अक्टूबर को झारखंड के सभी 4404 पंचायतों में एक साथ पंचायत सम्मेलन करेगी आजसू पार्टी

2011 में शुरू हुआ था काम, कोर्ट दे चुका है 37 आदेश

रांची-जमशेदपुर राष्ट्रीय राजमार्ग- 33 की दयनीय स्थिति को झारखंड हाइकोर्ट ने गंभीरता से लेते हुए उसे 2014 व 2015 में जनहित याचिका में तब्दील कर दिया था. फोर लेनिंग कार्य वर्ष 2011 से शुरू हुआ था. जून 2015 में पूरा करना था. लेकिन आज भी अधूरा पड़ा है.
संवेदक कंपनी रांची एक्सप्रेस-वे ने पिछले वर्ष अगस्त में कोर्ट में अंडरटेकिंग दी थी कि जुलाई 2018 तक 128 किमी लंबे एनएच का निर्माण कार्य पूरा हो जायेगा. लेकिन फिर भी अधूरा है. सड़क पर प्रतिदिन 7000 से अधिक वाहन चलते हैं. इस सड़क पर दुर्घटनाअों में 1000 से अधिक लोग घायल हुए. 500 से अधिक लोगों की माैत हो चुकी है. कोर्ट इस मामले में अब तक 37 आदेश पारित कर चुका है.

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.