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एक रुपया खर्च करके अधिकारियों ने अपनी पत्नियों को जेल भेजने जुगाड़ लगा दिया

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Ranchi: हाल के दिनों में झारखंड के बड़े अधिकारियों द्वारा अपनी पत्नियों और रिश्‍तेदारों के नाम पर गलत तरीके से जमीन खरीदने का मामला सामने आया है. इसमें पूर्व डीजीपी डीके पांडे की पत्‍नी नीलीमा पांडे के अलावे 25 अधिकारियों की लंबी फेहरिस्‍त है, जिन्‍होंने अपनी पत्नियों और रिश्‍तेदारों के नाम पर जमीन खरीदी.

जमीन घोटोले के इस पूरे मामले में वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता राजीव कुमार ने हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की है. मामले की जानकारी देते हुए राजीव कुमार ने कहा- ‘लालच इंसान को कहां से कहां पहुंचा देता है. मामले से जुड़े अधिकारियों ने अपनी पत्‍नी के नाम पर एक रुपये खर्च करके सरकारी जमीन का सेल डीड बनवाया. ‘

राजीव कुमार ने बातया-‘एक रुपया खर्च करके सेल डीड बनाने वाले अधिकारियों की संख्‍या 25 है. अभी इसमें और अधिकारियों के नाम जुड़ सकता है.  कुछ ऐसे सेल डीड आने वाले हैं. इससे चौंकाने वाले नाम भी जुडेंगे, जिनमें न्‍यायिक अधिकारियों के नाम शामिल होंगे.

उन्‍होंने कहा-‘’सेल डीड से यह भी खुलासा होगा कि ये अधिकारी कैसे एक रुपया खर्च करके अपनी पत्नियों को अपराधियों की सूची में डाल दिया. यह आम लोगों के लिए एक बड़ा सबक होगा. ताकि कम से कम घर में अपनी बीवी से किसी को सुनना न पड़े.’

बता दें कि झारखंड सरकार ने  मई 2017 को महिलाओं के नाम पर एक रुपया में संपत्तियों की रजिस्‍ट्री की सुविधा का ऐलान किया था. सरकार के इस घोषणा के बाद झारखंड में कोई जमीन महिला के नाम खरीदी जाए तो उसकी रजिस्ट्री के लिए केवल एक रुपए का टोकन शुल्क लिया जाता है.

झारखंड के अधिकारियों का जमीन घोटाला

रांची के कांके अंचल के चामा मौजा स्थित रिंग रोड के पास बन रही पुलिस हाउसिंग कॉलोनी में पूर्व डीजीपी डीके पांडेय ने अपनी पत्नी पूनम पांडेय के नाम 50.90 डिसमिल सरकारी जमीन खरीदी है. इस जमीन के गैर-मजरुआ होने और इसका गलत म्यूटेशन किए जाने के आरोपों के बाद 1 जून को रांची डीसी राय महिमापत रे द्वारा गठित जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में इस जमीन को सरकारी ही पाया है.

सिर्फ पूर्व डीजीपी ही नहीं, 25 बड़े लोगों ने अपने रिश्तेदारों के नाम चामा मौजा की खाता संख्या 87 में जमीन खरीदी है. सभी का म्यूटेशन हो गया है.

जांच कमेटी में शामिल एलआरडीसी मनोज रंजन व कांके सीओ अनिल कुमार ने डीसी को रिपोर्ट सौंप दी है. जांच कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद रांची डीसी ने कहा है कि अब इस खाता की जमीन की जमाबंदी रद्द होगी. जहां घर बन गया या बाउंड्री हो गई है, उन्हें नोटिस दिया जाएगा.

जांच रिपोर्ट में गैरमजरुआ जमीन की खरीदारी करने और कागजात में छेड़छाड़ कर उसकी रजिस्ट्री और म्यूटेशन कराने की बात सामने आई है.

पूर्व डीजीपी डीके पांडेय ने खरीदी गई जमीन पर अवैध तरीके से दो मंजिले मकान का भी निर्माण करा लिया है. मकान का काम अंतिम चरण में है. लेकिन मकान का नक्शा अभी तक पास नहीं कराया गया है. यह क्षेत्र रांची नगर निगम क्षेत्र से बाहर आता है. वहां नक्शा पास करने की जिम्मेवारी आरआरडीए की है, लेकिन आरआरडीए ने उक्त मौजा में किसी भी मकान का नक्शा पास नहीं किया है, क्योंकि मास्टर प्लान में यह गांव छूटा हुआ है. मास्टर प्लान में यह गांव कैसे छूटा इसका जवाब आरआरडीए पदाधिकारियों के पास नहीं है.

सरकार द्वारा बनाई गई प्रतिबंधित सूची में उक्त खाता व प्लॉट की जमीन शामिल है. इसके बावजूद तत्कालीन सब रजिस्ट्रार राहुल चैबे ने रजिस्ट्री की. तत्कालीन सीओ प्रभात भूषण ने गलत तरीके से म्यूटेशन करके जमाबंदी कायम की. जांच कमेटी ने रजिस्ट्रार से लेकर सीओ व सत्यापन करने वाले कर्मचारी व सीआई की भूमिका संदिग्ध बताई गई है. इन पर भी कार्रवाई होगी.

जमीन बेचने वाले आमोद कुमार का नाम रजिस्टर-2 में दर्ज है, उसका नाम किस आधार पर आया इसका कोई प्रमाण नहीं मिला. रजिस्टर-2 के जिस कॉलम में परिवर्तन का पूरा डिटेल व वर्ष अंकित होता है, वहां बस 1073 त् 27 अंकित है. ऐसे में यह स्पष्ट नहीं हो रहा है कि इस व्यक्ति का नाम रजिस्टर-2 में कब और किस आधार पर अंकित किया गया है. जांच कमेटी में इस तरह से अवैध रूप् से पूर्व डीजीपी डीके पांडे का जमीन पर कब्जा साबित होना उनपर कानूनी कार्रवाई की तलवार लटका रहा है.

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