Budget 2020: जनवरी में जीएसटी कलेक्‍शन 1.1 लाख करोड़ के पार

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New Delhi: वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) संग्रह जनवरी में 1.1 लाख करोड़ रुपये के स्तर को पार कर गया. समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार यह राजस्व सचिव अजय भूषण पांडे द्वारा तय किए गए लक्ष्य के अनुरूप है. इसके लिए उन्होंने कर विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठकें की थीं. समाचार एजेंसी ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि जनवरी में जीएसटी का घरेलू संग्रह करीब 86,453 करोड़ रुपये रहा है. वहीं आईजीएसटी और उपकर से 23,597 करोड़ रुपये जुटाए गए हैं. उन्होंने बताया कि ये आंकड़े अस्थायी हैं.

वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) कलेक्शन में चंडीगढ़ ने एक और रिकॉर्ड बनाया है. 10 माह में अभी तक एक्साइज एंड टैक्सेशन विभाग ने 1213 करोड़ का रिकार्ड कलेक्शन किया है. 2019 के मुकाबले 2020 में विभाग ने जीएसटी कलेक्शन में 12.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है.

1500 करोड़ का टारगेट

गौरतलब है कि वस्तु एवं सेवाकर विभाग ने 2019-20 वित्तीय वर्ष में 1500 करोड़ का टारगेट रखा हुआ है. इसे लेकर विभागीय अधिकारियों की ओर से बनाई गई कार्य योजना के अनुसार कार्य किया जा रहा है. विभाग की ओर से जीएसटी कलेक्शन को लेकर पंजीकृत व्यापारियों के साथ अधिकारी रू-ब-रू हो रहे हैं और उन्हें टैक्स को लेकर जागरूक कर रहे हैं.

टैक्स भरने के दौरान व्यापारियों को आने वाली समस्याओं को भी विभागीय अधिकारी दूर कर रहे हैं. निष्क्रिय रहने वाली पंजीकृत फर्मों के एकाउंट को रद्द किया जा रहा है. जो फर्में एक साल से अधिक समय से जीएसटी रिटर्न फाइल नहीं कर रही हैं, उन्हें बोगस डीलर्स की श्रेणी में डालकर सख्त कार्रवाई की जा रही है.

जीएसटी संग्रह एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा

2019 के दिसंबर माह में जीएसटी संग्रह एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया. इसमें साल दर साल के आधार पर नौ फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. दिसंबर में जीएसटी संग्रह 1.03 लाख करोड़ रुपये रहा. यह लगातार दूसरी बार है जब जीएसटी संग्रह एक लाख करोड़ रुपये के पार गया है.

नवंबर माह में यह छह फीसदी बढ़कर 1,03,492 लाख करोड़ रुपये रहा था. फेस्टिव सीजन और कानून का सख्त तरीके से पालन करने के चलते ऐसा हुआ. दिसंबर माह में सीजीएसटी संग्रह 19,962 करोड़ रुपये रहा, जबकि एसजीएसटी संग्रह 26,792 करोड़ रुपये, आईजीएसटी संग्रह 48,099 करोड़ रुपये रहा है. वहीं सेस से संग्रह 8,331 करोड़ रुपये रहा है.

सितंबर और अक्तूबर माह में जीएसटी संग्रह क्रमशः 2.7 फीसदी व 5.3 फीसदी गिर गया था. एक आधिकारिक बयान के अनुसार इस बार नवंबर में केंद्रीय जीएसटी से वसूली 19,592 करोड़ रुपये, राज्य जीएसटी से 27,144 करोड़ रुपये, एकीकृत जीएसटी से 49,028 करोड़ रुपये और जीएसटी उपकर से वसूली 7,727 करोड़ रुपये रही. एकीकृत जीएसटी में से 20,948 करोड़ रुपये आयात से वसूल हुए. इसी तरह उपकर की वसूली में 869 करोड़ रुपये आयातित माल पर उपकर से प्राप्त हुए.

तीन महीने के अंतराल के बाद नवंबर में एक बार फिर जीएसटी वसूली 1 लाख करोड़ रुपये के पार जाने से सरकार को राजकोषीय स्तर पर राहत मिली थी. नवंबर में ही देश का राजकोषीय घाटा बजट में तय लक्ष्य का 102 फीसदी पहुंच चुका था. आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि राजस्व में बढ़ोतरी होने पर सरकार के पास खर्च के लिए ज्यादा पैसे होंगे, जो विकास को गति देने में मददगार होंगे.

त्योहारी सीजन की वजह से नवंबर में 1.02 लाख करोड़ रुपये की जीएसटी वसूली

गौरतलब है कि त्योहारी सीजन की वजह से नवंबर में 1.02 लाख करोड़ रुपये की जीएसटी वसूली हुई, जो जुलाई के बाद पहली बार 1 लाख करोड़ के लक्ष्य के पार गई है. डेलॉय इंडिया के पार्टनर एमएस मणि का कहना है कि जीएसटी वसूली में इजाफा बाजार धारणा में सुधार को दर्शाता है. अगर यह बढ़ोतरी आने वाले महीनों में भी जारी रहती है, तो इससे राजकोषीय घाटे पर काबू पाने में सरकार को काफी मदद मिलेगी.

भारत के पूर्व मुख्य सांख्यिकीविद प्रणब सेन का कहना है कि सरकार को अभी राजकोषीय घाटे पर ध्यान देने के बजाए खर्च और खपत बढ़ाने पर जोर देना चाहिए. सेन ने कहा कि असली समस्या खपत के मोर्चे पर है, जिसे बढ़ाने के लिए लोगों के हाथ में पैसे चाहिए. सरकार को आरबीआई से कहना चाहिए कि वह बॉन्ड की खरीदारी करे, ताकि नए बॉन्ड जारी किए जा सकें. यह काम 3.4 फीसदी राजकोषीय घाटे के लक्ष्य के साथ पूरा नहीं होगा, बल्कि इसकी समीक्षा करनी पड़ेगी.

Categories Finance

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