बिरसा मुंडा की सबसे ऊंची मूर्ति के लिए निर्माण कार्य शुरू

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  • प्रधाननगर बुंडू के पास पंद्रह फीट पहाड़ को काट कर की गयी नींव की ढलाई
  • उलगुलान फाउंडेशन ने बीड़ा उठायी है इस काम का

Ranchi: धरती आबा बिरसा मुंडा की 150 फीट ऊंची प्रतिमा की स्थापना के लिए बुधवार को बुंडू के प्रधान नगर में नींव खुदाई के बाद ढलाई का काम शुरू कर दिया गया. यह स्थान सूर्य मंदिर के बगल में पहाड़ पर है.

पहाड़ को काटकर 15 फीट नीचे से ढलाई का काम शुरू हो जाने के बाद लोगों में भारी उत्साह देखा गया. लोगों ने ढलाई स्थल पर श्रद्धा के फूल चढ़ाये. उलगुलान फाउंडेशन ने 150 फीट ऊंची मूर्ति की स्थापना की बीड़ा उठाया है.

फाउंडेशन में महत्वपूर्ण भागीदारी निभा रहे संजय बसु मल्लिक और डॉ देवशरण भगत इस मौके पर विशेष तौर पर उपस्थित थे. मौके पर झारखण्ड आंदोलनकारी आजसू के संस्थापक महासचिव रहे सूर्य सिंह बेसरा भी उपस्थित थे. उलगुलान फॉउंडेशन के सदस्यों में उत्साह का महौल था.

मूर्ति निर्माण कार्य शुरू होने से पहले ही बिरसा मुंडा की समाधि स्थल से पवित्र माटी ले जाकर पारंपरिक तौर पर पूजा की गई थी. जिसमें बिरसा मुण्डा समाधि स्थल से पवित्र मिट्टी ले जाकर पूजा की गयी.

हर घर से सहयोग

मूर्ति निर्माण के लिए हर घर से सहयोग लिया जा रहा है. यह सहयोग तन-मन और धन का होगा. जिससे जो बन पड़ेगा वह धरती आबा के लिए समर्पित करेगा. इसका उद्देश्य है कि लोगों की आस्था बिरसा मुंडा के प्रति बनी रहे. इस जन भागीदारी को भी देश-दुनिया जान सकेगी.

सबसे ऊंची मूर्ति निर्माण को लेकर फाउंडेशन के संरक्षक सुदेश कुमार महतो का कहना है कि इसका मकसद बस यही है कि उलगुलान के महानायक को दुनिया जाने. उन्होंने कहा कि बिरसा की यह प्रतिमा 150 फीट ऊंची, लेकिन उनका कद और वीर गाथा इससे लाखों गुणा ज्यादा ऊंचा होकर हमारे दिलों में समाया रहेगा.foundation.jpg

गौरतलब है कि 9 जून 2017 को उलगुलान फाउंडेशन के संरक्षक सुदेश कुमार महतो ने इससे पहले प्रधान नगर, बुण्डू में भगवान बिरसा मुंडा की विश्व में सबसे उंची 150 फीट की प्रतिमा निर्माण को लेकर बिरसा मुंडा के वंशजों के साथ पारंपरिक विधि-विधान के साथ भूमि पूजन की थी.

भूमि पूजन कार्यक्रम में बिरसा की समाधि स्थल से लायी गई पवित्र मिट्टी को भी डाला गया है. साथ ही पत्थलगड़ी की गयी है. इस अनुष्ठान को संपन्न कराने में दिउडी मंदिर के पुजारी गुड्डू कमल समेत बुण्डू, अडकी, तमाड, सिल्ली सोनाहातु के अलावा रांची, सराईकेला, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिम सिंहभूम, रामगढ़ के सैकड़ों पहान एवं ग्राम प्रधान शामिल हुए थे.

बिरसा गोष्‍ठी का निर्णय

मूर्ति स्थापित करने के बीच कई कार्यक्रम किए जाएंगे और इस दौरान फाउंडेशन ने हर स्कूल कॉलेज में बिरसा गोष्ठी के आयोजन का निर्णय लिया है.

बिरसावाद फैलेगा

डॉ संजय बसु मल्लिक ने कहा कि आज सुभाष चंद्र बोस के जयंती के अवसर पर भगवान बिरसा मुण्डा के 150 फीट ऊंची प्रतिमा के नींव की ढलाई कार्य पूर्ण होने के अवसर पर उपस्थित होकर मै गौरवांवित महसूस कर रहा हूं. आज हमने इस निर्माण कार्य की सबसे बड़ी चुनौती को पार कर लिया है. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में यहां राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों का मेला लगा रहेगा. भगवान बिरसा की गाथा पर शोध बढ़ेगा. देश विदेश तक बिरसा मुण्डा को पढ़ा एवं जाना जाएगा. देश में बिरसावाद फैलेगा. यही बिरसा मुण्डा के प्रति हमारी श्रद्धांजलि है.

सूर्य सिंह बेसरा ने कहा कि उलगुलान फॉउंडेशन ने चुनौतीपूर्ण कार्य का बेड़ा उठाया है. उन्होंने सभी झारखण्डवासियों से अपील करते हुए कहा कि इस महान एवं पुनीत कार्य में अपना सहयोग देकर इस ऐतिहासिक कार्य को सफलीभूत करने में सहयोग करें.

डॉ देवशरण भगत ने कहा कि आज भी कई आदिवासी संघर्ष और उनके नायक स्वाधीनता संघर्ष के राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में गुमनाम हैं, आजादी के बाद हमने बिरसा मुण्डा की शहादत को तो याद रखा, लेकिन हम उनके विचारों से दूर होते गये. स्टैच्यू ऑफ उलगुलान भगवान बिरसा के जीवन मूल्यों को राष्ट्रीय पटल पर लाने की कोशिश है, जिससे उनकी अगुवाई में किया गया मुण्डा विद्रोह सदा के लिए स्वर्णिम अक्षरों में अंकित हो जाये.

इसके जरिए धरती आबा के विचार, संघर्ष और गौरवशाली अतीत से युवा वाकिफ हो सकें. साथ ही अमर शहीदों के बलिदान को छोटा समझने की कोई हिमाकत नहीं करे.

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