Vodafone-Idea को बचाने के लिए बिड़ला ग्रुप सरकार को हिस्‍सेदारी देने को तैयार

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New Delhi: वोडफोन-आइडिया लिमिटेड भारी कर्ज में डूबा हुआ है. इसे लेकर अब आदित्‍य बिड़ला ग्रुप के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला ने अपने हाथ खड़े कर दिए हैं. वह अब कंपनी में अपनी प्रमोटर हिस्‍सेदारी छोड़ने के लिए तैयार हो गए हैं.

कुमार मंगलम बिड़ला ने कहा कि वोडाफोन-आइडिया को बचाने के लिए वो किसी भी सरकारी या घरेलू फाइनेंशियल कंपनी को अपनी हिस्‍सेदारी देने के लिए सहमत हैं.

कुमार मंगलम बिड़ला ने कैबिनेट सचिव राजीव गौवा को एक पत्र लिखा है. इस पत्र में उन्‍होंने कहा है कि कंपनी पर अपना नियंत्रण छोड़ने के लिए भी तैयार हैं.

घाटे में Vodafone-Idea

बता दें कि वोडाफोन इंडिया के प्रमोटर और चेयरमैन हैं कुमार मंगलम बिड़ला. कंपनी में उनकी 27% (6401 करोड़ रुपये) और ब्रिटेन की कंपनी वोडाफोन पीएलसी की 44% हिस्‍सेदारी है.

कंपनी का मौजूदा मार्केट कैप 23,706.70 करोड़ रुपये है. कंपनी की खस्‍ता हाल देख दोनों प्रमोटर्स ने कंपनी में ताजा निवेश नहीं करने का फैसला किया है. वोडाफोन पहले ही कंपनी में अपने पूरे निवेश को बट्टे में डाल चुकी है. वोडाफोन इंडिया पर करीब 1.8 लाख करोड़ रुपये का कर्ज है.

कंपनी के बोर्ड ने सितंबर 2020 में 25 हजार करोड़ रुपये की पूंजी जुटाने की मंजूरी दी थी, पर सरकारी मदद के बिना निवेशक कंपनी को पूंजी देने के लिए तैयार नहीं है. दरअसल ये स्थिति लाइसेंस फीस और स्‍पेक्‍ट्रम यूसेज चाज्र को परिभाषित करने के विवाद से बनी थी.

क्‍यों घाटे में Vodafone-Idea

आपरेटर चाहते थे कि सिर्फ टेलीकॉम संबंधी जरूरी सेवाओं से होने वाली कमाई को ही साझा किया जाए. जब‍कि सरकार किराए, डिविडेंट, ब्‍याज से और अचल संपत्ति से बेचने पर कमाई जैसी सभी चीजों में हिस्‍सा चाहती है. 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की मांग को जायज ठहराया.

वोडाफोन आइडिया ने भारती एयरटेटल के साथ मिलकर सुप्रीम कोर्ट में एजीआर की दोबारा गणना को लेकर याचिका दाखिल की थी. कोर्ट ने पिछले हफ्ते इसे खारिज कर दिया था.

वोडाफोन पीएलसी और आइडिया का विलय अगस्‍त 2018 में पूरा हुआ था. उस वक्‍त कंपनी का मूल्‍यांकन 1.55 लाख करोड़ आंका गया था. जो अब 85% घट चुका है. कंपनी पर 58,254 करोड़ रुपये का एजीआर बकाया है. इसमें से कंपनी ने 7,854 करोड़ चुका दिए हैं. वहीं 50,400 करोड़ रुपये बकाया है.

JIO से Vodafone-Idea को कितना हुआ घाटा

रिलायंस जियो इंफोकॉम की कम डेटा दरों के कारण भी कंपनी को बाजार में टिके रहने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है. तीन साल में कपंनी 40 करोड़ ग्राहकों में से एक तिहाई को खो चुकी है.

एक्‍सपर्ट्स का मानना है कि जब तक बाजार में हिस्‍सेदारी पर दबदबा रखने के लिए जियो के दाम कम रखेगी, तब तक बाकी कंपनियों के लिए अर्थतंत्र में सुधार की बहुत उम्‍मीद नहीं है.

Categories Finance

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