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भारत बंद (LIVE Updates) : राहुल की अगुवाई में राजघाट से मार्च शुरू

चैंबर ऑफ कॉमर्स और कारोबारी संगठनों के अलावा 21 विपक्षी दल इस भारत बंद का समर्थन कर रहे

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#New Delhi: पेट्रोल-डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों से आम आदमी परेशान है. इसे लेकर विपक्ष लगातार केन्द्र सरकार को घेर रहा है. लिहाजा बढ़ते दामों के खिलाफ कांग्रेस समेत पूरे विपक्ष ने आज भारत बंद का आह्वान किया है. इस भारत बंद की अगुवाई कांग्रेस पार्टी कर रही है, जिसके साथ लगभग 20 राजनीतिक पार्टियों का समर्थन है.

कांग्रेस ने कहा कि कई चैंबर ऑफ कॉमर्स और कारोबारी संगठनों के अलावा 21 विपक्षी दल इस भारत बंद का समर्थन कर रहे हैं.

एनसीपी प्रमुख शरद पवार, द्रमुक प्रमुख एम के स्टालिन और वामपंथी नेताओं ने कांग्रेस की ओर से बुलाए गए ‘भारत बंद’ का खुला समर्थन किया है जबकि तृणमूल कांग्रेस ने इस बंद से दूर रहने का निर्णय किया है.

पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस ने कहा है कि जिन मुद्दों पर बंद बुलाया जा रहा है, वह उस पर साथ है, लेकिन पार्टी सुप्रीमो और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की घोषित नीति के मुताबिक वह राज्य में किसी तरह की हड़ताल के खिलाफ है.

भारत बंद LIVE Updates

-कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी सहित कांग्रेस के कई बड़े नेता राजघाट से रामलीला मैदान तक मार्च कर रहे हैं.

– कांग्रेस नेता अशोक गहलोत का कहना है कि वे प्रदर्शन के जरिए मोदी सरकार पर दबाव बनाना चाहते हैं ताकि वे पेट्रोल-डीजल के दाम कम करें. जिस तरह उन्होंने हमारे दबाव के कारण राजस्थान में VAT में कटौती की है.

-गुजरात के इसनपुर में एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं ने स्कूल बंद करवाया, इसके अलावा भी कई प्राइवेट स्कूलों की छुट्टी घोषित की गई है.

-बिहार के दरभंगा में प्रदर्शनकारियों ने कमला फास्ट पैसेंजर को रोका. जहानाबाद में राजद कार्यकर्ताओं ने रेलवे ट्रैक पर आगजनी की. खगड़िया में बंद समर्थकों ने NH-31 को जाम किया, बस स्टेशन पर भी RJD नेताओं को प्रदर्शन.

-ओडिशा के भुवनेश्वर में भारत बंद का असर, सड़कों पर विपक्षी पार्टियों का प्रदर्शन, ट्रेन रोकी.

कर्नाटक के कलबुर्गी में भारत बंद का असर, बस सर्विस पूरी तरह से ठप

-आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में सीपीआई(एम) के कार्यकर्ताओं ने सुबह-सुबह प्रदर्शन किया.

शिवसेना नहीं ले रही हिस्सा , मनसे ने किया समर्थन

भारत बंद में हिस्सा लेने के कांग्रेस के अनुरोध को शिवसेना ने रविवार को ठुकरा दिया. संवाददाताओं से बात करते हुए महाराष्ट्र के कांग्रेस अध्यक्ष अशोक चव्हाण ने कहा कि उन्होंने शिवसेना से आग्रह किया था. चव्हाण ने कहा कि ”हमें उम्मीद है कि शिवसेना इसका समर्थन करेगी. कीमत में बढ़ोतरी के खिलाफ खुलकर आने के लिए मैंने निजी तौर पर (शिवसेना के राज्यसभा सदस्य) संजय राउत से बात की है लेकिन हम उनके जवाब का इंतजार कर रहे हैं.”

कांग्रेस के आग्रह पर जवाब देते हुए राउत ने कहा कि शिवसेना बंद में हिस्सा नहीं लेगी.

राज ठाकरे की मनसे ने रविवार को कहा कि वह बंद में हिस्सा लेगी. ठाकरे ने एक बयान में कहा कि मनसे केवल बंद में हिस्सा ही नहीं लेगी बल्कि सक्रिय भागीदारी भी करेगी.

पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाया जाए : कांग्रेस

कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी सरकार ने पिछले 52 महीनों में देश के लोगों से 11 लाख करोड़ रुपए ”लूटे” हैं और भाजपा सरकार चलाने की बजाय ”मुनाफाखोर कंपनी” चला रही है.

उन्होंने कहा कि जिस तरह गैस, डीजल और पेट्रोल की कीमतें हर रोज बढ़ रही हैं, उससे किसानों को काफी नुकसान हुआ है.

सुरजेवाला ने कहा, ”हम मांग करते हैं कि पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाया जाए. भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में पेट्रोल और डीजल की आसमान छूती कीमतों का कोई जिक्र नहीं किया गया, क्योंकि उन्हें लोगों के दुख-दर्द से कोई मतलब ही नहीं है.”

पार्टी की मांग है कि पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के तहत लाया जाए जिससे तेल के दाम 15 से 18 रूपये तक गिर सकते हैं. उन्होंने लोगों से अपील की कि वे भाजपा को सत्ता से बेदखल करके देश में बदलाव लाएं.

कार्यकर्ताओं से शांति पूर्ण प्रदर्शन की अपील

बंद के आह्वान के मद्देनजर कांग्रेस ने पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे किसी हिंसक प्रदर्शन में शामिल नहीं हों.

कांग्रेस प्रवक्ता अजय माकन ने एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा, ”मैं सभी कांग्रेस कार्यकर्ताओं से बंद को हिंसा मुक्त बनाने का अनुरोध करता हूं. हम महात्मा गांधी की पार्टी के हैं और हमें अपने आप को किसी हिंसा से नहीं जोड़ना चाहिए.”

रविवार को पेट्रोल और डीजल के दाम नई ऊंचाई पर पहुंच गए. रविवार को पेट्रोल के दामों में 12 पैसे प्रति लीटर और डीजल के दाम में 10 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई.

माकन ने कहा कि उन्हें यह देखकर ”दुख” हुआ कि भाजपा की यहां हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में कच्चे तेल के बढ़ते दामों पर चुप्पी साधे रखी गई और महंगाई या रूपये के अवमूल्यन पर कोई चर्चा नहीं हुई. ये ऐसे मामले हैं जो सीधे आम आदमी से जुड़े हैं.

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