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जम्‍मू-कश्मीर पर बीबीसी की भारत विरोधी फेक वीडियो रिपोर्ट!

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जम्‍मू कश्‍मीर से धारा 357 हटने के बाद विदेशी मीडिया बीबीसी ने भारत के खिलाफ भ्रामक खबरें और वीडियो प्रसारित कर रहा है. सबसे पहले तो बीबीसी ने ‘अनुच्छेद-370 के समर्थन में कश्मीरी मुसलमानों के जुलूस निकालने का सच: फ़ैक्ट चेक’ शीर्षक से भारत सरकार की कोशिशों पर पानी फेरने जैसा काम किया.

उसके बाद एक दूसरी रिपोर्ट में बीबीसी ने कश्‍मीर पर एक वीडियो जारी किया और दावा किया कि वह वीडियो श्रीनगर का है. हजारों लोग सड़क पर दिखाई दे रहे हैं. आजादी के नारे लगाए जा रहे हैं. पुलिस उनके उपर फायरिंग कर रही है.

भारत के एक यूट्यूब चैनल आज की ताजा खबर ने इस वीडियो की पड़ताल की है. आज की ताजा खबर ने अपनी पड़ताल में सबसे पहले बीबीसी के इस पूरे वीडियो को दिखाया है. बीबीसी की यह वीडियो करीब ढाई मिनट की है.

बीबीसी की वीडियो खत्‍म होने के बाद चैनल में कश्‍मीर के एक बड़े पुलिस अधिकारी का बयान दिखाया जाता है. जिसमें पुलिस अधिकारी श्‍याम प्रकाश पाणी इस वीडियो को फेक बता रहे हैं.

आज की ताजा खबर में बताया गया है कि बीबीसी की यह वीडियो 10 अगस्‍त को प्रसारित की गई थी. इसे कई वीडियो फुटेज को जोड़कर तैयार किया गया है. कहा गया कि यह वीडियो कई पार्ट्स में हैं.

वीडियो के पहले हिस्‍से में भागते-दौड़ते, गिरते-पड़ते लोग दिखते हैं. फायरिंग की आवाज सुनाई दे रही है. एक भागते हुए आदमी के पास एक झंडा भी दिखता है. झंडे का रंग है पीला, सफेद और हरा. झंडे के बारे में गूगल पर सर्च करने पर पता चलता है कि यह पीओके का झंडा है. वीडीओ के दूसरे पार्ट में जैश-ए-मोहम्‍मद के झंडे भी दिखते हैं. वीडियो के इन दोनों भाग में कहीं से यह पता नहीं चलता है कि यह भारत शाशित कश्‍मीर में शूटिंग हो रही हैं. 

वीडियो के तीसरे पार्ट में भी लोग भागते हुए दिखते हैं. इस वीडियो के फ्रेम में एक बोर्ड दिखाई पड़ता है. इसे जूम करने से पर इस बोर्ड पर रमजान मेमोरियल लिखा हुआ दिखता है. गूगल पर सर्च करने पर पता चलता है कि यह शोजा नाम के जगह पर है. यह कश्‍मीर के श्रीनगर में पड़ता है. यह वीडियो इंडिया में ही शूट हुआ है. लेकिन इस फ्रेम में धारा 370 के बारे में बोर्ड, बैनर या स्‍लोगन कुछ नहीं दिखता है.

वीडियो के चौथे पार्ट में शोजा का बोर्ड दिखता है. वीडियो का यह हिस्‍सा भी श्रीनगर के अंदर का है. इस पार्ट में पीओके और जैश-ए-मोहम्‍मद के झंडे दिखते हैं.

वीडियो के चौथे हिस्‍से में जैश-ए-मोहम्‍मद और पीओके के झंडे दिखते हैं. लेकिन यहां पर एक बैनर भी दिखता है. यह बैनर धारा 370 हटने के खिलाफ है. इस दौरान जाकिर मुसा के नारे भी लगते हैं.

आज की ताजा खबर चैनल में कहा गया है कि वीडियो के तीसरे और चौथे पार्ट में जिस तरह से कश्‍मीर के शोजा और रमजान मेमोरियल के बोर्ड दिखे, लेकिन धारा 370 से जुड़ा कोई बैनर-पोस्‍टर नहीं दिखता है. लेकिन वीडियो के पांचवे हिस्‍से में धारा 370 का एक बैनर भी दिखाई देता है. लेकिन, इसमें ऐसा कुछ और नहीं दिखता है कि जिससे पता चले कि यह कश्‍मीर के हिस्‍सा का वीडियो है.

वीडियो के अगले हिस्‍से में बुजुर्ग का बाइट (बयान) है. वह कहते हैं कि हमें यह मंजूर नहीं है. बयान में यह स्‍पष्‍ट नहीं है कि क्‍या मंजूर नहीं है. जहां यह बयान दे रहे हैं, उनके पीछे एक दुकान है. वहां एयरटेल का एक साइनबोर्ड लगा हुआ है. इससे जाहिर होता है कि यह वीडियो कश्‍मीर का हो सकता है.  पीछे की भीड़ से भी भी कुछ स्‍पष्‍ट नहीं होती है. उनके पास न कोई बैनर है और न नारेबाजी हो रही होती है.

वीडियो के अगले हिस्‍से में एक हुजुम भीड़ को संबोधित करते हुए आजादी मांगी जा रही है. वीडियो के इस पार्ट में भी पीओके और जैश-ए-मोहम्‍मद के झंडे दिखाई देते हैं. वीडियो के इस हिस्‍से में भी कही कुछ ऐसा नहीं दिखाई देता है कि यह भारत शाशित कश्‍मीर है.

वीडियो के अगले फ्रेम में पीडब्‍लूडी का एक बोर्ड दिखता है, जो भारत सरकार की पब्लिक वेलफेयर का एक विभाग है. यह भी कश्‍मीर, श्रीनगर का वीडियो हो सकता है. यहां पर इतनी भीड़ है. यहां भी किसी के हाथ में धारा 370 को लेकर कोई बोर्ड बैनर नहीं है. इनके हाथों में एक काले रंग का बैनर है. इसमें लिखा है-नो कंप्रोमाइज, वी वांट फ्रीडम.

बीबीसी के इस पूरे वीडियो के अलग-अलग फ्रेम का विश्‍लेषण करने से पता चलता है कि वीडियो के जिन हिस्‍सों में भारत शाशित कश्‍मीर के सबूत मिले हैं, जैसे एयरटेल का बैनर, पीडब्‍लूडी का बोर्ड, रमजान मेमोरियल, शोजा का बोर्ड. इनमें कहीं भी धारा 370 के खिलाफ बोर्ड, बैनर या स्‍लोगन नहीं मिले हैं.

वहीं दूसरी ओर कमाल की बात यह है कि वीडियो में जहां पर धारा 370 के खिलाफ बोर्ड, बैनर और स्‍लोगन मिले हैं वहां ऐसा कुछ भी ऐसा नहीं दिखा है जिससे कोई दावे के साथ कह दे कि वह वीडियो भारत शाशित कश्‍मीर में शूट किया गया है.

एक और चौंकाने वाली बात यह है कि वीडियो के पहले हिस्‍से में जहां लोग गिरते, भागते दिख रहे हैं. फायरिंग की आवाज सुनाई पड़ रही है. वहां पुलिस को कहीं भी दिखाया नहीं गया है. वहीं दूसरी ओर वीडियो के अगले हिस्‍से में जो भारत शाशित कश्‍मीर का हो सकता है, वहां लोग विरोध कर रहे हैं. लोग बैनर लेकर आ रहे हैं, शोर मचा रहे हैं. वहां पुलिस चुपचाप खड़ी है.

पूरे वीडियो के विश्‍लेषण के बाद निष्‍कर्ष निकलता है कि बीबीसी के वीडियो के जिस हिस्‍से में धारा 370 के खिलाफ विरोध हो रहा है वह पीओके में हो रहा है. वीडियो के जिन हिस्‍सो में भारत के कश्‍मीर के सबूत मिलते हैं, वह कश्‍मीर के प्रोटेस्‍ट के पुराने वीडियो हैं.

सिर्फ बीबीसी ने ही नहीं, बल्‍कि अल जजीरा ने भी अपनी खबर में इसे 10 अगस्‍त को कश्‍मीर में धारा 370 का विरोध बताया है. लेकिन इसके वीडियो के अंदर भी पीओके के झंडे दिखते हैं. गौर करने पर उपरी हिस्‍से में एक बोर्ड भी लगा दिखता है. इस बोर्ड पर लिखा हुआ है कायदे आजम ब्रिज. यहां जिन्‍ना के मेमोरियल का ब्रिज बना हुआ है. साथ ही साथ इस बोर्ड पर लिखा हुआ है गोरमेंट ऑफ आजाद जम्‍मू एंड कश्‍मीर. गूगल पर चेक करने से पता चलता है कि यह ब्रिज मुजफ्फराबाद में है, जो पीओके की राजधानी है. लेकिन, अल जजीरा ने लिखा है कि यह वीडियो श्रीनगर का है.

धारा 370 के खिलाफ जो बैनर जो बीबीसी में दिखते हैं वही बैनर अल जजीरा के वीडियो में भी दिखते हैं. दोनों दावा कर रहे हैं कि ये वीडियो श्रीनगर के हैं. लेकिन, अल जजीरा ने यह साफ दिखा दिया कि वीडियो के हिस्‍से पीओके के मुजफ्फराबाद के हैं.

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