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देशज औषधियों का विकल्प नहीं: कोरोना वायरस के बहाने तुलसी, हल्दी,नीम, गोलमिर्च, लौंग,पपीता

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Pushkar Mahto

Ranchi: लक्ष्मण जी मूर्छित हुए तो उन्हें संजीवनी बूटी देकर ठीक किया गया. मतलब साफ है देसी तकनीक का कोई विकल्प नहीं. जितना हम देशज तकनीक, देशज औषधियों से दूर भाग रहे हैं. उतना अधिक हम बीमारियों से और बीमारियों के कारणों से घिरते ही जा रहे हैं, मरते जा रहे हैं.

हर दिन किसी न किसी मुसीबतों का सामना करते रहे हैं. हमारे पूर्वज अपने आंगन में तुलसी का पौधा देवता के रूप में पूजते रहे हैं .तुलसी की पूजा करना नियमित और आसपास नियम के साथ ही कई प्रकार के औषधीय पौधा लगाते रहें, देखरेख करते रहें है. विकास के इस दौर में हम सब कुछ खोते और भूलते जा रहे हैं. खोना और भूलना हमारी परंपरा जैसे बनते जा रहे हैं.

आज भूलने और खोने के कारण ही कोरोना वायरस का प्रकोप हमें अपने आगोश में ले रहा है. पुरी दुनिया में कोरोना वायरस विभीषिका का रूप ले चुका है. तुलसी का सेवन करने वाले, अदरक का सेवन करने वाले, गोलमेज, लॉन्ग ,नीम, हल्दी आदि का सेवन करने वाले इन बीमारियों से, इन वायरल से कोसों दूर हैं. कोरोना जैसा वायरल भी इन औषधि से डरते हैं, डर रहे हैं.

एमबीबीएस किए हुए डॉक्टर आज कोरोना वायरस से बचाव के लिए देशज उपाय बता रहे हैं. जैसे हल्दी डालकर दूध का सेवन करें, अदरक, गोलकी वगैरह डालकर लाल चाय पियें, गर्म पानी पिए पपीता खाएं, वगैरा-वगैरा. यह देसी तकनीक या उपाय आज के नहीं हैं. आदि काल से ही हमारे पूर्वज इसका सेवन करते आ रहे हैं. आज भी गांव में, सुदूरवर्ती क्षेत्रों में थोड़ी सी खांसी, सर्दी वगैरा होने पर अदरक गोलकी तुलसी लौंग वगैरह डालकर लाल चाय पीने की सलाह देते हैं.

आज हम पढ़ लिख कर भी उन्हीं बातों को फॉलो कर रहे हैं तो जमाना हमसे बेहतर तो कल था,अच्छे थे, तो हमें अच्छे दिनों को याद करते हुए बेहतर जिंदगी जीना चाहिए. हमें अपने बीते हुए कल को नहीं भूल कर आने वाले कल को संभालना चाहिए.

आने वाला कल सुनहरा होगा तो हम अपने देशज औषधियों को बचाकर. इसलिए बेहतर कल के लिए हमें अपने बेहतर संस्कृति-औषधियों को बचाना होगा. यह औषधि रहेंगे तो हम दीर्घायु होंगे. आने वाले मुसीबतों से सुरक्षा और जीने में मजा आएगा.

कोरोना वायरस हमसे है, हम कोरोना वायरल से नहीं.

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