Hemant Soren के लिए Bandhu Tirkey ने खोला मोर्चा, कहा- कितना इंतज़ार कराएंगे झारखंड के राज्यपाल

Ranchi: झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के कार्यकारी अध्यक्ष एवं झारखंड सरकार समन्वय समिति के सदस्य बंधु तिर्की ने राँची मोराबादी स्थित अपने आवास पर प्रेस वार्ता आयोजित किया. इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से संबंधित खनन पट्टा मामले पर अपनी बातों को रखा.

उन्होंने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा राज्यपाल को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से संबंधित मामले पर मंतव्य प्राप्त हुआ है. लेकिन अब तक राज्यपाल महोदय द्वारा मामले को गुप्त रखा गया है. बंधु तिर्की ने बताया कि 1 सितंबर को राजभवन में उन्होंने यूपीए के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ राज्यपाल महोदय से मुलाकात की थी.

जिसमें राज्यपाल महोदय को राज्य में उत्पन्न वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों से संबंधित एक पत्र सौंपा गया था. पत्र में राज्यपाल महोदय को महत्वपूर्ण बिंदुओं से अवगत कराया गया था. प्रतिनिधिमंडल ने निर्वाचन आयोग द्वारा झारखंड के मुख्यमंत्री के संबंध में आए मंतव्य पर पर्दा हटाने का निवेदन किया गया था. राज्यपाल को यह भी अवगत कराया कि इस समय राज्य में उत्पन्न राजनीतिक हलचल से झारखंड सरकार के कार्यों में व्यवधान उत्पन्न हुआ है. ऐसे में मामले को सार्वजनिक किया जाना चाहिए.

राज्यपाल महोदय ने भरोसा दिलाया था कि 2-3 दिनों के भीतर मंतव्य भारत निर्वाचन आयोग को भेज दिया जाएगा. लेकिन अब तक झारखंड के राज्यपाल महोदय द्वारा कोई निर्णय नहीं लिया गया है.

भाजपा द्वारा सरकारी एजेंसियों का दुरुपयोग कर झारखंड में महागठबंधन की सरकार को बेवजह परेशान किया जा रहा है. बंधु तिर्की ने कहा कि महागठबंधन की सरकार अपने सभी वादों को पूरा करने के लिए संकल्पित है. पैसे और खरीद-फरोख्त की राजनीति को झारखंड में हम किसी भी कीमत पर स्थापित नहीं होने देंगे. राज्य में सवा 3 करोड की जनता की आकांक्षाएं यूपीए महागठबंधन सरकार से जुड़ी है.

भारतीय जनता पार्टी यह बर्दाश्त नहीं कर पा रही है कि आदिवासियों और मूलवासियों की सरकार इतने बड़े जनसमर्थन और बहुमत के साथ लगातार कैसे चल रही है. उन्होंने कहा कि हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि हम चुनौतियों से नहीं घबराते हैं. भले ही भाजपा सरकारी एजेंसियों का दुरुपयोग कर हमें डराने की कोशिश करें. लेकिन यूपीए महागठबंधन डरने वाला नहीं है,

भाजपा कितना भी महागठबंधन सरकार को डिगाने का प्रयास कर ले, यह सरकार अपना कार्यकाल पूरा करेगी और अपने अपने संकल्पों को निभाएगी. सरकार जनहित और समाज कल्याण के लिए कटिबद्ध है. उन्होंने राज्यपाल से अनुरोध किया की जल्द ही संशय को दूर किया जाए.

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बीजेपी और बाबूलाल से भी उन्होंने सवाल किया. उन्होंने कहा कि आदिवासी के नाम पर राजनीति करने के बजाय महागठबंधन की सरकार ने सरना कोड का प्रस्ताव पास कराकर केन्द्र को भेजा. लेकिन इस मामले में बाबूलाल और भाजपा की चुप्पी आदिवासी समाज के प्रति उदासीनता को दर्शाता है. एक आदिवासी मुख्यमंत्री इनसे हजम नहीं हो पा रहा है.

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