बागुन सुम्बु्रई : जीते जी झारखंड की राजनीति में कहानी बन इतिहास रच गये

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#Ranchi: कोल्हान की राजनीति में लगभग 50 वर्षों तक अपनी बादशाहत रख चुके बागुन सुम्बु्रई का जन्म 1924 में पश्चिम सिंहभूम जिले के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के एक छोटे से गांव भूता में हुआ था. प्रारंभिक जीवन भूख, अभाव व गरीबी के बीच गुजरा. प्राथमिक शिक्षा गांव के स्कूल से प्राप्त की तथा जिला स्कूल में पढ़ाई की, लेकिन गरीबी के कारण बीच में ही स्कूल छोड़ दर्जी का काम शुरू कर दिया. इसी बीच 1946 में  22 वर्ष की उम्र में गांव के मुंडा बन गये. यहीं से शुरू हुई राजनीतिक जीवन में कभी न रुकने वाली यात्रा.

एक दर्जी के रूप में काम करने वाले बागुन सुम्ब्रुई सिंहभूम की राजनीति में एक ऐसा नाम थे जो जीते जी एक कहानी बन गये थे. नंगे बदन सिर्फ एक धोती पहनकर रहना बागुन बाबू की पहचान बन गई थी. अपनी शादियों को लेकर भी बागुन हमेशा चर्चे में रहे. लगभग 50 वर्षों से भी अधिक समय तक जिले की राजनीति का केंद्र रहे बागुन बाबू की पहचान झारखंड से लेकर राष्ट्रीय राजनीति तक रही. ‘मरांग गोमके’कहे जाने वाले जयपाल सिंह के बाद इन्होंने झारखंड पार्टी की कमान संभाली और झारखंड अलग राज्य आंदोलन की अग्रिम पंक्ति के नेता रहे. सुम्ब्रुई के नेतृत्व वाली झारखंड पार्टी ने 1969 के चुनाव में बिहार में 6 सीटों पर जीत दर्ज की. एक समय सुम्ब्रुई बिहारी भगाओ आंदोलन को लेकर भी काफी चर्चा में रहे.

1989 से पहले अपराजेय नेता की थी छवि

वर्ष 1989 के पहले बागुन बाबू की छवि एक ऐसे अपराजेय नेता की थी जिसे चुनाव में हरा पाना असंभव दिखता था. वे पांच बार सिंहभूम लोकसभा से सांसद और चार बार विधायक रहे. वर्ष 1999 में वे बिहार के लालू प्रसाद यादव की सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे. झारखंड अलग राज्य बनने के बाद बागुन झारखंड के पहले विधानसभा उपाध्यक्ष चुने गए.

पिता मानकी सुम्ब्रुई थे गांव के मुंडा:

पांच बार चाईबासा से सांसद और चार बार विधायक रहे बागुन सुम्बु्रई के पिता मानकी सुम्बु्रई गांव के मुंडा थे. माता का नाम दशमती सुम्ब्रुई था. बागुन सुम्बु्रई वर्ष 1946 में राजनीति में आये. 1967 में पहली बार विधायक चुने गए और बिहार सरकार में मंत्री बनाये गये. इसके बाद 1969 और 1972 में तथा फिर 2004 में चाईबासा से विधायक बने. बागुन बाबू 1977, 1980, 1989 और फिर 2004 में सिंहभूम संसदीय सीट से सांसद चुने गए. झारखंड बनने के बाद 24 अगस्त 2002 को विधानसभा उपाध्यक्ष चुने गये.

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