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बाबूलाल 15 जनवरी को कर सकते हैं जेवीएम का भाजपा में विलय

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Ranchi: बाबूलाल मरांडी अपनी पूरी पार्टी झारखंड विकास मोर्चा के साथ भारतीय जनता पार्टी में विलय करेंगे. यह कब और कहां होगी, इसकी रूपरेखा तैयार कर ली गई है. जेवीएम सुप्रीमो बाबूलाल अभी विदेश दौरे में हैं और भाजपा के बड़े नेतओं के संपर्क में हैं. खास करीबी बताते हैं कि वह निजी दौरे में देश से बाहर गए हैं. 15 जनवरी तक वापस लौट जाएंगे.

जानकारों के अनुसार बाबूलाल मरांडी 15 जनवरी के दिन ही भारतीय जनता पार्टी की सदस्‍यता लेंगे. वह भाजपा के बड़े नेताओं की मौजूदगी में पार्टी में शामिल होंगे. यह कार्यक्रम दिल्‍ली में आयोजित होगा.

चर्चा है कि भाजपा में शामिल होने के बाद बाबूलाल मरांडी को झारखंड में बड़ी जिम्‍मेदारी सौंपी जाएगी. उन्‍हें प्रतिपक्ष का नेता का दायित्‍व दिया जाएगा. विधानसभा के चुनाव नतीजों के बाद भाजपा ने अभी तक इस पद को खाली रखा है.

पार्टी की ओर से कहा गया है कि खरमास के बाद ही भाजपा में विधायक दल का नेता का चयन किया जाएगा. हालांकि, उनके समक्ष प्रदेश अध्यक्ष जैसे अन्य विकल्प भी खुले रहेंगे.

राजनीतिक पंडितों का मानना है कि झारखंड विधानसभा के चुनाव परिणाम ने भाजपा और बाबूलाल को इस कदर तोड़ दिया है कि उनके पास अब एक-दूसरे से जुडऩे के अलावा कोई रास्ता नहीं रह गया है. बाबूलाल मरांडी ने पांच जनवरी को झाविमो की कार्यसमिति को भंग कर दिया था, तभी से उनके भाजपा में शामिल होने की अटकलों ने ज्यादा जोर पकड़ लिया है.

हालांकि बाबूलाल की पार्टी में वापसी को लेकर प्रदेश भाजपा में सन्नाटा है. इस मामले से सभी खुद को अनभिज्ञ बता रहे हैं. भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष प्रदीप वर्मा ने ऐसी किसी भी जानकारी ने इन्कार किया, लेकिन इतना अवश्य कहा कि अगर बाबूलाल मरांडी जैसे नेता भाजपा में वापस आते हैं तो उनका स्वागत होना चाहिए.

झारखंड चुनाव से पहले ही हो गया था तय

बाबूलाल की घर वापसी का प्लॉट झारखंड विधानसभा चुनाव से पूर्व ही तैयार हो गया था. विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा और झाविमो दोनों को ही मौजूदा परिणाम से बेहतर की उम्मीद थी. यह माना जा रहा है कि भाजपा बहुमत से जितना पीछे रहेगी उसकी भरपाई बाबूलाल की पार्टी के विलय से पूरी हो जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका. भाजपा को चुनाव में महज 25 और झाविमो को तीन सीटें ही हासिल हुईं.

क्‍या करेंगे बंधु व प्रदीप

झाविमो की कार्यसमिति भंग हो चुकी है ऐसे में अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी के पास सर्वाधिकार सुरक्षित हो गए हैं. वे चाहें तो अपनी पूरी पार्टी का विलय भाजपा में कर सकते हैं.

हालांकि, ऐसी स्थिति में भी उनके विधायकों के पास अलग राह पकडऩे का विकल्प खुला रहेगा. पार्टी में बाबूलाल के अलावा प्रदीप यादव और बंधु तिर्की को मिलाकर कुल तीन विधायक है. बाबूलाल के अलावा बाकी के दोनों विधायक यदि एक साथ किसी अन्य दल में शामिल होना चाहें या कोई अन्य दल बनाना चाहें तो बहुमत उन्हें इसकी इजाजत देता है.

अगर बाबूलाल भाजपा में अपनी पार्टी का विलय करते हैं तो भाजपा उन्हें विधायक दल का नेता घोषित कर सकती है. ऐसी स्थिति में भाजपा के पास सत्तापक्ष को चुनौती देने के लिए एक मजबूत आदिवासी चेहरा होगा.

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