अयोध्या फैसला: राम मंदिर आंदोलन में नींव के पत्थर रहे हैं कारसेवक

Rae Bareli: अयोध्या विवाद (Ayodhya Verdict) पर फैसला आने के बाद वर्षों चले आ रहे विवाद का अंत होने के साथ ही लोगों के जेहन में राममंदिर आंदोलन की यादें (Ram Mandir Andolan ki Yaaden) भी ताजा हो गई हैं.

रामजन्म भूमि पर मंदिर निर्माण को लेकर आंदोलन तो काफी पहले से ही चल रहा है लेकिन विगत तीस वर्षों में आंदोलन को धार कारसेवा और कारसेवकों ने दी. देश के अन्य भागों की तरह रायबरेली के लोगों ने भी इस कारसेवा और आंदोलन में हिस्सा लिया.

समाज के सभी वर्गों ने कारसेवा में की थी भागीदारी

रामजन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के लिए हर कारसेवा में रायबरेली के लोगों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया. आम आदमी से लेकर शिक्षक, चिकित्सक, सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी, व्यापारी, सभी ने आंदोलन के दौरान जेल काटी. विहिप के प्रांत मंत्री रामगोपाल त्रिपाठी के अनुसार लोगों ने अपना चल रहा कारोबार छोड़कर, नौकरी से छुट्टी लेकर कारसेवा की है. उनके त्याग के बल पर ही यह आंदोलन यहां तक पहुंचा है.

पेशे से वरिष्ठ चिकित्सक और आंदोलन में रहे डॉ. अमरनाथ त्रिपाठी ने कहा कि मंदिर के लिए इतना जूनून था कि कितना और क्या नुकसान हो रहा है, इसकी चिंता ही नहीं थी. पूर्व मंत्री गिरीश नारायण पांडे, पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह, मुकेश कक्कड़, श्रीकांत मिश्रा, ओमप्रकाश सहित हजारों कारसेवक लखनऊ, रायबरेली और सुल्तानपुर की जेलों में बंद रहे.

कई कारसेवकों ने बताया कि जेल में बाहर के लोगों ने खानपान सहित अन्य सुविधाओं का काफी ख्याल रखा. यहां तक कि जेल प्रशासन ने भी सभी कारसेवकों को जेल मैनुअल के विपरीत सुविधाओं की व्यवस्था की. रायबरेली के ही रहने वाले सेवानिवृत्त डीजीपी श्रीश चंद्र दीक्षित भी 1990 की कारसेवा में प्रमुख नेतृत्व करने वालों में थे.

पुलिस से बचने के लिए रात-रात भर चलकर पहुंचे अयोध्या 

जबरदस्त पुलिस की पहरेदारी की वजह से कारसेवकों ने चलने के लिए रात का समय और अन्य रास्ता चुना. रायबरेली के रामआसरे बताते है कि वह अपने अन्य साथियों के साथ पहले ही घर से निकल गए थे और  सीधे न जाकर गांवां और खेतों से अयोध्या के लिए चले. उन्होंने बताया कि सभी को रात-रात भर चलना पड़ा था. लेकिन जिस तरह रास्ते भर ग्रामीणों ने उनका सेवा सत्कार किया वह अभिभूत करने वाला था. रामचंद्र पाल ने बताया कि रात में ही वह लोग साधु वेश में सरयू के दूसरी तरफ अयोध्या पहुंच गए थे. शंख नाद सुनने के बाद उन लोगों ने किसी तरह सरयू पार की और अयोध्या पहुंच गए. रामचन्द्र पाल को कोर्ट के फैसले से उम्मीद है कि अब जल्द ही भगवान राम का मंदिर  बनेगा.

जब पूर्व डीजीपी ने कारसेवकों की बचाई जान

विहिप नेता रामगोपाल त्रिपाठी के अनुसार कारसेवा के दौरान की कई बातें आज भी यादों में ताजा है. उन्होंने बताया कि कई साथियों ने उनसे एक घटना का जिक्र किया, जिसमें रायबरेली के ही निवासी और यूपी के डीजीपी रहे श्रीश चंद्र दीक्षित के सामने कैसे पुलिस वालों ने अपनी बंदूकें तक नीचे कर ली थी और अयोध्या में तैनात कई अधिकारियों और सिपाहियों ने उन्हें देखते हुए सैल्यूट भी किया था. उल्लेखनीय है कि श्रीश चन्द्र दीक्षित ने 30 अक्टूबर और दो नवम्बर 1990 की कारसेवा में प्रमुख नेताओं में से एक थे. वह बाद में वाराणसी से सांसद भी बने.

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