अटल जी की अस्थि कलश पहुंची रांची, प्रार्थना सभा में दी गई श्रद्धांजलि

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Ranchi: पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का अस्थि कलश लेकर बुधवार की शाम प्रदेश भाजपा अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुवा और विधायक अनंत ओझा रांची पहुंचे. बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर प्रदेश भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की. रांची एयरपोर्ट से अस्थि कलश यात्रा निकाली गयी.

भारतीय राजनीति के पुरोधा, प्रखर वक्ता और मृदभाषी भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का अस्थि कलश बुधवार शाम 5.30 बजे रांची के डिबडीह स्थित कार्निवल हॉल लाया गया, जहां सार्वजनिक प्रार्थना सभा हुई .

सार्वजनिक प्रार्थना सभा में मुख्यमंत्री रघुवर दास, प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुवा सहित मंत्री, केंद्रीय मंत्री, सांसद, विधायक, प्रदेश भाजपा पदाधिकारियों के अलावा विपक्षी दल झारखंड मुक्ति (झामुमो) की ओर से प्रवक्ता और महासचिव सुप्रीयो भट्टाचार्य पहुंचे ,वहीं झारखंड विकास मोर्चा (झाविमो) की ओर से प्रवक्ता योगेंद्र प्रताप सिंह ने हिस्सा लिया.

मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि हम आज उनके प्रति अपनी सच्ची श्रद्धांजलि समर्पित करते हैं. उनके सपनों का झारखंड हम बनाए; यह हमारा कर्त्तव्य है. उनके सपनो को साकार करें, यह हमारे लिए एक अवसर है. हम इस कार्य में सफल होंगे. प्रधानमंत्री पद पर आसीन होने के बाद भी उनकी कथनी और करनी एक ही बनी रही. इसका प्रमाण है – झारखंड राज्य का निर्माण.राज्य की सवा तीन करोड़ जनता की ओर से राज्य के जनक श्रद्धये अटल बिहारी वाजपेयी जी को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं.

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उन्होंने कहा कि देश के महान सपूत अटल जी के आदर्श और जीवन के प्रति जो उनका रूख था, वह आज भी प्रेरणा प्रदान करता है.अटल जी जैसी विभूतियां पृथ्वी पर सदियों में कभी-कभी ही जन्म लेती है. वे कर्मयोगी थे. अटल जी कुशल राजनेता, प्रभावशाली वक्ता और साहत्यिकार भी थे. अटल जी हिन्दुस्तान के एकमात्र ऐसे वक्ता थे, जो सड़क से लेकर संसद तक के श्रोताओं को समान रूप से प्रभावित करते थे.बुधवार शाम साढ़े पांच बजे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि देने के लिए आयोजित प्रार्थना को मुख्यमंत्री संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि अटल जी का भाषण केवल सुना नहीं जाता, देखा जाता था.

वे कभी अपनी आंखें बंद कर बोलते थे तो देश के श्रोताओं की आंखें खोल देती थी. आवाज में उतार-चढ़ाव करना कोई उनसे सीखें. शरीर का कण-कण और जीवन का क्षण-क्षण राष्ट्र सेवा को समर्पित कर दिया भारतीय राजनीति के शिखर पुरूष भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्य और भारतीय जनता पार्टी के प्रथम अध्यक्ष श्रद्धेय वाजपेयी एक ऐसे व्यक्ति थे, जिनके बिना भारतीय राजनीति की कल्पना भी अधूरी लगती है. वो सबको जोड़ने वाले व्यक्तत्वि थे.

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राष्ट्रीय स्तर पर देश भर के सभी राजनीतिक दलों के वरष्ठि नेताओं का श्रद्धांजलि देना प्रमाणित करता है कि अटल जी का व्यक्तित्व कैसा था. आज इस सभागार में भी सभी दलों के प्रमुख नेता, धार्मिक-सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, व्यापारीगण, वरष्ठि संपादक-पत्रकारगण की उपस्थिति इसी का प्रमाण है. अटल जी का जीवन एक समर्पित जीवन था. शरीर का कण-कण और जीवन का क्षण-क्षण उन्होंने राष्ट्र सेवा को समर्पित कर दिया था.

वह संगठन के सर्वोच्च पद पर रहे. वे विदेश मंत्री से लेकर प्रधानमंत्री पद पर रहें, उन्हें पद का मद, घमंड कभी नहीं हुआ. झारखंड के साथ जुड़ी हैं अटल जी की अनगिनत यादें मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि अटल जी का झारखंड के साथ अनगिनत यादें जुड़ी हुई हैं. राज्य में दो बार वर्ष 1988 और 2004 में कार्य समिति की बैठक सम्पन्न हुई.

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वर्ष 2004 में वनवासी कल्याण केन्द्र के स्वर्ण जयंती समारोह में शामिल हुए. मेरे निर्वाचन क्षेत्र जमशेदपुर में चुनाव प्रचार के लिए 9 फरवरी, 2000 को बारी मैदान और दूसरी बार 2005 में साकची में पधारे. झारखंड के साथ उनका काफी लगाव था, जिसके कारण राज्य के अनेक जिलों में उनका प्रवास हुआ. 12 सितम्बर 1999 में रांची चुनावी सभा में बोले थे कि आपको संसद में हम वनांचल, झारखंड राज्य देंगे.

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