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Atal Bihari Vajpayee : दूरदर्शी, प्रखर वक्‍ता व बहुआयामी व्‍यक्तित्‍व के धनी

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भारतीय राजनीति के सियासी फलक पर अपनी अमिट छाप छोड़ने वाले पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न Atal Bihari Vajpayee का लंबी बीमारी के बाद गुरुवार शाम पांच बजे यहां अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में निधन हो गया. तीन बार देश के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने वाले अटल अपने पूरे राजनीतिक जीवन में अजातशत्रु बने रहे. सभी दलों के नेताओं के बीच वाजपेयी की छवि निर्विवाद नेता की रही. उन्होंने 16 मई से 1 जून 1996, 19 मार्च 1998 से 22 मई 2004 तक देश के प्रधानमंत्री रहे.

Atal Bihari Vajpayee सबसे लंबे समय तक संसद सदस्य रहे और जवाहरलाल नेहरू व इंदिरा गांधी के बाद सबसे लंबे समय तक गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री रहने का खिताब भी उनके ही नाम है. वह पहले प्रधानमंत्री थे जिन्होंने गठबंधन सरकार को न सिर्फ स्थायित्व दिया बल्कि उसका सफलता पूर्वक नेतृत्व भी किया. 24 दलों को साथ लेकर सरकार बनाने और सफलता पूर्वक चलाने का श्रेय उन्हें जाता है.

एक कवि, पत्रकार और प्रखर वक्ता भी थे Atal Bihari Vajpayee

वाजपेयी की पहचान राजनेता से पहले एक कवि, पत्रकार और प्रखर वक्ता की रही. वे भारतीय जनसंघ की स्थापना करने वाले नेताओं में से एक रहे और 1968 से 1973 तक उसके अध्यक्ष भी रहे. वे जीवनभर भारतीय राजनीति में सक्रिय रहे. उन्होंने लम्बे समय तक राष्ट्रधर्म, पाञ्चजन्य और वीर अर्जुन आदि राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत अनेक पत्र-पत्रिकाओं का सम्पादन भी किया. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रचारक के रूप में आजीवन अविवाहित रहने का संकल्प लेकर अपना जीवन प्रारंभ करने वाले वाजपेयी ने जीवनभर अपने संकल्प को पूरी निष्ठा से निभाया. वह राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार के पहले प्रधानमंत्री थे जिन्होंने गैर कांग्रेसी प्रधानमन्त्री पद के 5 साल बिना किसी समस्या के पूरे किए. उन्होंने 24 दलों के गठबंधन से सरकार बनाई थी जिसमें 81 मंत्री थे.

Atal Bihari Vajpayee की बायोग्राफी

उत्तर प्रदेश में आगरा जिले के प्राचीन स्थान बटेश्वर के मूल निवासी पण्डित कृष्ण बिहारी वाजपेयी और कृष्णा वाजपेयी के घर 25 दिसंबर 1924 को Atal Bihari Vajpayee का जन्म हुआ. उनके पिता मध्य प्रदेश की ग्वालियर रियासत में अध्यापक थे. अटल जी की स्नातक तक की शिक्षा ग्वालियर के विक्टोरिया कालेज (वर्तमान में लक्ष्मीबाई कालेज) में हुई. छात्र जीवन से वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक बने और तभी से राष्ट्रीय स्तर की वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में भाग लेते रहे. उन्होंने कानपुर के डीएवी कालेज से राजनीति शास्त्र में एमए की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की. उसके बाद उन्होंने अपने पिताजी के साथ कानपुर में ही एलएलबी की पढ़ाई भी प्रारम्भ की लेकिन उसे बीच में ही विराम देकर पूरी निष्ठा से संघ के कार्य में जुट गए. वाजपेयी ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पण्डित दीनदयाल उपाध्याय के निर्देशन में राजनीति का पाठ तो पढ़ा ही, इसके साथ-साथ वह पाञ्चजन्य, राष्ट्रधर्म, दैनिक स्वदेश और वीर अर्जुन जैसे पत्र-पत्रिकाओं के सम्पादन के काम का भी बखूबी निर्वहन किया.

Atal Bihari Vajpayee का राजनीतिक जीवन

भारतीय राजनीति और राष्ट्र के प्रति उनके योगदान तथा असाधारण कार्यों के लिये 2014 दिसंबर में पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी को भारत रत्न से सम्मानित किया गया. वाजपेयी ने चुनावी राजनीति में पहली बार 1955 में कदम रखा किंतु उन्हें सफलता नही मिली. उसके बाद उन्होंने 1957 में उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले की बलरामपुर लोकसभा सीट से जनसंघ के उम्मीदवार के रूप में लोकसभा चुनाव में नामांकन किया और चुनावी सफलता हासिल कर पहली बार संसद की दहलीज लांघी. 1957 से 1977 तक जनता पार्टी की स्थापना तक वे लगातार जनसंघ के संसदीय दल के नेता रहे. प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई की सरकार में उन्होंने 1977 से 1979 तक विदेश मंत्री के रूप में देश को अपनी सेवाएं दीं. 1980 में जनता पार्टी से असन्तुष्ट होकर वाजपेयी ने जनता पार्टी छोड़ दी और इसके बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की नींव पड़ी. 06 अप्रैल 1980 भाजपा की स्थापना के साथ ही वाजपेयी उसके पहले अध्यक्ष चुने गए. वह दो बार राज्यसभा के लिये भी निर्वाचित हुए. वाजपेयी ने पहली बार 16 मई 1996 से 1 जून 1996 तक प्रधानमंत्री के रूप में देश की बागडोर संभाली. 19 अप्रैल 1998 को पुनः प्रधानमंत्री पद की शपथ ली और उनके नेतृत्व में 24 दलों की गठबन्धन सरकार ने पांच वर्षों में देश में विकास के नए आयाम गढ़े.

Atal Bihari Vajpayee की रिकॉर्ड उपलब्धियां

संयुक्त राष्ट्र के इतिहास में पहली बार हिन्दी में भाषण देने का रिकार्ड भी अटल के नाम है. 2004 के आम चुनाव के बाद से Atal Bihari Vajpayee का स्वास्थ्य खराब होने लगा और उन्होंने धीरे-धीरे खुद को सक्रिय राजनीति से अलग कर लिया. वाजपेयी ने अपने प्रधानमंत्रित्व काल में देश की सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए ऐतिहासिक कदम उठाते हुए पोखरण परमाणु परीक्षण को अंजाम दिया और भारत को परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्रों की कतार में ला खड़ा किया. इसके अलावा देश के चारों छोरों को सड़क मार्ग से जोड़ने के लिए वाजपेयी सरकार ने स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना की नींव रखी. इसके अंतर्गत दिल्ली, कलकत्ता, चेन्नई व मुम्बई को राष्ट्रीय राजमार्ग से जोड़ा गया. एक राजनेता से इतर कवि के रुप में भी वाजपेयी ने कई नए आयाम गढ़े. ‘मेरी इक्यावन कविताएं’ उनका प्रसिद्ध कविता संग्रह है.

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