लखनऊ में सजी एशिया की सबसे बड़ी हथियारों की मंडी, पीएम मोदी ने किया उद्घाटन

लखनऊ में सजी एशिया की सबसे बड़ी हथियारों की मंडी, पीएम मोदी ने किया उद्घाटन

Lucknow: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एशिया की सबसे बड़ी हथियारों की मंडी डिफेंस एक्सपो कस उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया. इस अवसर पर देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, उप्र की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उपस्थित रहे. मौके पर सेना के जवानों ने करतब दिखाना शुरू कर दिया है.

उद्घाटन के बाद पीएम मोदी ने कहा, आज भारत में दो बड़े डिफेंस मैन्यूफैक्चरिंग कॉरिडोर का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें से एक तमिलनाडु में और दूसरा यहीं उत्तर प्रदेश में हो रहा है. ऐसे कदमों से World Supply Chains में भारतीय उद्योगों की भागीदारी बढ़ेगी. दुनिया के टॉप डिफेंस मैन्यूफैक्चरर्स को अधिक कंपिटेंट इंडियन पार्टर्नर्स मिलेंगे.

2014 में भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट लगभग 2 हज़ार करोड़ रुपए का था जो बीते 2 साल में बढ़कर 17 हज़ार करोड़ हो चुका है.

डिफेंस मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र में भारत कई वर्षों तक भारत प्रमुख शक्तियों में से एक रहा. लेकिन आजादी के बाद हमने अपनी इस ताकत का उपयोग उस गंभीरता से नहीं किया, जितना हम कर सकते थे. हमारी नीति और रणनीति इंपोर्ट तक सीमित रह गई.

टेक्नोलॉजी का गलत इस्तेमाल हो और आतंकवाद हो या फिर साइबर खतरा, ये पूरे विश्व के लिए एक बड़ी चुनौती हैं. नई सुरक्षा चुनौतियां को देखते हुए दुनिया की तमाम डिफेंस फोर्सेस, नई टेक्नोलॉजी को विकसित कर रही हैं. भारत भी इससे अछूता नहीं है.

हमारी सरकार चाहती है कि डिफेंस मैन्यूफैक्चरिंग सिर्फ सरकारी संस्थानों तक सीमित न हो, बल्कि इसमें निजी क्षेत्र की भी बराबर की साझेदारी हो. मैं समझता हूं कि उपयोगकर्ता और उत्पादक यानि User और Producer के बीच भागीदारी से राष्ट्रीय सुरक्षा को और अधिक शक्तिशाली बनाया जा सकता है.

‘डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन ऑफ डिफेंस’ की थीम

डिफेंस एक्‍सपो ‘डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन ऑफ डिफेंस’ की थीम पर आयोजित हो रहा है. यह डिफेंस एक्सपो हथियारों की दृष्टि से यह एशिया का सबसे बड़ा ‘बाजार’ है. यह यूपी की राजधानी लखनऊ स्थित वृंदावन योजना के सेक्टर-15 में 43 हजार वर्गमीटर में फैला हुआ है. इसके अलावा आयोजन के कुछ कार्यक्रम गोमती रिवर फ्रंट पर भी होंगे.

इस महा समागम में 70 से ज्यादा देशों की 1028 कंपनियां अपने उत्पादों और तकनीकों का प्रदर्शन कर रही हैं. इनमें 856 भारतीय और 172 विदेशी कंपनियां हैं. इस पांच दिवसीय डिफेंस एक्सपो में रक्षा सौदों से जुड़े तकरीबन 200 से ज्यादा सहमति पत्र (एमओयू) हस्ताक्षरित होंगे. इस आयोजन का बड़ा फायदा उत्तर प्रदेश से गुजरने वाले डिफेंस कॉरिडोर को होगा.

39 देशों के रक्षा मंत्री कर रहे हैं शिरकत

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डिफेंस एक्सपो के कर्टेन रेजर कार्यक्रम में मंगलवार देर शाम बताया कि इसमें 70 से अधिक देशों की रक्षा कंपनियां और 39 देशों के रक्षा मंत्री हिस्सा ले रहे हैं. इसमें अमेरिका, यूके, यूएई, साउथ कोरिया, चेक रिपब्लिक, रूस, मेक्सिको, इजरायल जैसे देश शामिल हैं.

रक्षा कंपनियों में प्रमुख रुप से लॉकहिड मॉर्टिन (अमेरिका), साब (स्वीडन), बोइंग (अमेरिका), रोहड एंड श्वार्ज (जर्मनी), रोसोबोरन एक्सपोर्ट्स (रूस), एयरबस (फ्रांस), दसां एविएशन (फ्रांस), यूनाइटेड एयरफ्रॉफ्ट (रूस), सिबत (इजरायल), मैगलन एयरोस्पेस (कनाडा), बीएई सिस्टम्स (यूनाइटेड किंगडम) इस आयोजन में अपने उत्पादों का प्रदर्शन कर रही हैं. डिफेंस एक्सपो में 500 से अधिक व्यवसायिक बैठकें और 20 से ज्यादा सेमिनार प्रस्तावित हैं.

पांच दिन तक चलने वाले इस मेगा इंवेंट में भारत का अफ्रीकी देशों से हथियारों के निर्यात का सौदा भी हो सकता है. इस डिफेंस एक्सपो में 15 से अधिक अफ्रीकी देशों के रक्षा मंत्रियों के साथ विशेष कॉन्फ्रेंस का आयोजन भी पहली बार होने जा रहा है.

रक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इन अफ्रीकी देशों के साथ रक्षा उत्पादों के निर्यात का सौदा हो सकता है. इसके अलावा अमेरिका और नाइजीरिया से भी रक्षा कारोबार को लेकर कई करार होने की उम्मीदें हैं.

इस पांच दिवसीय डिफेंस एक्सपो में भारत अपने सैन्य शौर्य के साथ कूटनीतिक कौशल का भी प्रदर्शन करेगा. दरअसल हथियारों की लगी इस मंडी में जहां दुनिया भर के कई देश भारत के साथ एक मंच पर दिखेंगे वहीं दो प्रमुख पड़ोसी देश चीन और पाकिस्तान इस आयोजन से बाहर हैं.

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