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क्‍या कोलेबिरा उपचुनाव के नतीजे बड़े उलटफेर के संकेत हैं?

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Ranchi: कोलेबिरा उपचुनाव में कांग्रेस ने भाजपा को करीब 10 हजार वोटों से हराया है. 3 राज्यों के विधानसभा चुनावों में हार के बाद झारखंड में यह सत्‍ता उलटफेर के संकेत माना जा रहा है. इस जीत के बाद कांग्रेस पार्टी का मनोबल बढ़ता नजर आ रहा है. वहीं बीजेपी खेमे में भी खलबली मच गयी है. कोलेबिरा उपचुनाव में क्रांगेस की जीत के बाद विपक्षी गठबंधन 2019 चुनाव को लेकर उत्‍साहित है.

हत्या के एक मामले में झारखंड पार्टी के विधायक एनोस एक्का के सजा पाने के बाद खाली हुई कोलेबि‍रा विधानसभा सीट पर यह उपचुनाव कराए गए थे. अब यहां कांग्रेस के नमन विक्सेल कोंगाडी को जीत मिली है. जिसके बाद सूबे की सियासत में चहलकदमी तेज होने की आशंका जताई जा रही है. कोलेबिरा में कांग्रेस के खाते में 40343 वोट आए हैं. वहीं बीजेपी प्रत्याशी को 30685 वोट मिले.

विपक्ष ने किया झारखंड के सभी 14 लोकसभा सीट जीतने का दावा

जेविएम के प्रधान महासचिव प्रदीप यादव ने कहा कि यह परिवर्तन के संकेत हैं. प्रदीप यादव ने कहा कि जल्द ही राज्य की बीजेपी सरकार का सफाया होगा और महागठबंधन की सरकार बनेगी. उन्होंने कहा कि राज्य के सभी 14 लोकसभा सीट पर महागठबंधन की जीत होगी. बता दें कि जेविएम ने कांग्रेस के उम्मीदवार खुल कर समर्थन दिया था. पार्टी सुप्रीमो बाबुलाल मरांडी ने कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में प्रचार भी किया था.

कांग्रेस ने बताया जनता ने क्‍यों कोलेबिरा उपचुनाव में जीत दिलाया

कोलेबिरा विधानसभा में जीत के बाद कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता किशोर नाथ शाहदेव ने बताया कि जिस तरह से लगातार तीन राज्यों के बाद कोलेबिरा में भी कांग्रेस ने जीत हासिल की है. इससे पता चलता है कि केंद्र और राज्य सरकार जो भी फैसले लिए हैं वह जनविरोधी हैं. सरकार किसानों को लेकर सरकार उदासीन दिख रही है. महिलाओं का उत्पीड़न और महंगाई जैसी कई समस्याएं को सरकार लगातार नजरअंदाज कर रही है.

उन्होंने कहा कि झापा के प्रत्याशी से जनता के मन में भय का माहौल बना था और हमारे प्रत्याशी नमन विक्सल कोंगड़ी ने जिस तरह से जनता के लिए और जल जंगल जमीन के लिए लगातार संघर्ष किया है, इसीलिए जनता ने उन्हें जिताया है और इसलिए हम कोलेबिरा के जनता का आभार व्यक्त करते हैं.

शाहदेव ने बताया कि कांग्रेस के जीत के बाद महागठबंधन के लिए भी एक संदेश जाता है. उन्होंने कहा कि आने वाले चुनाव में अपनी छोटी-छोटी महत्वाकांक्षाओं को नजरअंदाज करें और जनता से जुड़ी समस्या को सामने रखकर अच्छे से सीट शेयरिंग कर आम चुनाव की तैयारी करें.

महागठबंधन की दुविधा दूर करने की जरूरत

जेएमएम के कार्यकारी अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन ने कोलेबिरा चुनाव में कांग्रेस को जीत के लिए बधाई दी है. वहीं जल्द से जल्द महागठबंधन का चेहरा तय करने की बात कही है. हेमंत ने कहा उनके पार्टी हमेशा ही महागठबंधन कर चुनाव लड़ने की हिमायती रही है लेकिन इस और अब तक किसी ने भी गंभीरता से नहीं सोचा. इस वजह से ऐसा हुआ उन्होंने कहा अब तक महागठबंधन का समय रहते अंतिम रूप दे दिया जाता तो किसी प्रकार की दुविधा नहीं रहती.

वोट बैंक कायम और बरकरार

कोलेबिरा विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी बसंत सोरेंग की हार के बाद बीजेपी के प्रवक्ता प्रतुल नाथ शाहदेव ने बताया कि कोलेबिरा हमारे लिए हमेशा से एक चुनौती रहा है. क्योंकि इस क्षेत्र मे लगभग 60% माइनॉरिटी वोटर्स मौजूद है यह सीट हम लोग आजादी के बाद कभी नहीं जीत पाए हैं. इसके बावजूद भी हम यहां के नतीजे से खुश हैं क्योंकि हमारा जो वोट बैंक है वह आज भी कायम और बरकरार है.

लंबे समय से एनोस एक्का के कब्जे वाली सीट इस सीट पर मेनन एक्का को मजबूत उम्मीदवार के तौर पर देखा जा रहा था. मेनन को जेएमएम और आरजेडी ने भी अपना समर्थन दिया था. इधर कांग्रेस को झारखंड विकास मोर्चा ने समर्थन दिया था.

इस परिणाम से कांग्रेस उत्साह से लबरेज है. दरअसल 13 सालों के बाद कोलेबिरा सीट पर कांग्रेस की वापसी हो रही है.रांची में पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय ने मीडिया से बातचीत में कहा है कि इस परिणाम ने साफ कर दिया है कि कांग्रेस के प्रति लोगों का विश्वास बढ़ा है. झारखंड में आने वाले लोकसभा और विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस बेहतर प्रदर्शन करेगी.

गौरतलब है कि कांग्रेस ने कोलेबिरा में जेएमएम से समर्थन मांगा था. कांग्रेस के झारखंड प्रभारी आरपीएन सिंह, प्रदेश अध्यक्ष डॉ अजय कुमार पिछले तीन दिसंबर को हेमंत सोरेन से समर्थन मांगने गए थे. लेकिन हेमंत सोरेन ने समर्थन देने से मना कर दिया था. बाद में 18 दिसंबर को हेमंत सोरेन मेनन एक्का के समर्थन में चुनाव प्रचार करने कोलेबिरा गए थे.

एनोस एक्का पहली बार 2005 में कोलेबिरा से चुनाव जीते थे. झारखंड में अर्जुन मुंडा, मधु कोड़ा और शिबू सोरेन की सरकार मे वे मंत्री भी रहे. हालांकि कई मामलो में वे बीजेपी की मदद करते रहे हैं. बाद में अपराध और भ्रष्टाचार के आरोपों में फसते चले गए. आय से अधिक संपत्ति के मामले में भी उनके खिलाफ कार्रवाई चल रही है.और प्रवर्तन निदेशालय ने बड़े पैमाने पर उनकी संपत्ति जब्त की है. कोलेबिरा के इस परिणाम के साथ एक्का की राजनीति अर्श से फर्श पर जाती हुई दिखाई पड रही है.

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