आजसू बैठक में12 बिंदुओं पर चर्चा, सुदेश बोले- सरकार को आईना दिखाएगी पार्टी

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Ranchi: आजसू पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में आज केंद्रीय समिति की बैठक सम्पन्न हुई जिसमें मुख्य रुप से बारह बिंदुओं पर चर्चा हुई. बैठक को संबोधित करते हुए पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष सुदेश कुमार महतो ने कहा कि समय के साथ पंच के महत्व को कम किया गया है लेकिन आजसू पार्टी गांव की सरकार की कल्पना को हर हाल में साकार करेगी. हमें वक्त के साथ सोच को बदलने की आवश्यकता है और झारखंड में भी पंचायत चुनाव को संजीदगी से लेने की ज़रूरत है, जैसा कि बंगाल, ओडिसा और राजस्थान में होता है. हमें कार्यकर्ताओं को तैयार करना होगा और राज्य के साथ ब्लॉक स्तर पर एजेंडा सेट करना होगा.

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सरना धर्म कोड से केंद्र सरकार को अवगत कराएगी

जहां तक सरना धर्म कोड की बात है तो इस विषय पर आजसू पार्टी को छोड़कर किसी ने सदन में इस मुद्दे को नहीं उठाया, लेकिन वर्तमान सरकार इसका क्रेडिट लेने में दिन-रात जुटी हुई है. सरना धर्म कोड प्रकृति पूजक समाज की मांग है और उनके आस्था एवं विश्वास की बात है.

आज विधानसभा में विपक्ष की आवाज़ को दबाने की पूरजोर कोशिश की जा रही है. विधानसभा में बहस नहीं होगा तो हमारा झारखंड कमजोर होगा. यह समय झारखंड की जनता के बीच एक विकल्प देने का समय है. पिछड़ों को उनका अधिकार दिलाने के लिए अब निर्णायक लड़ाई की जरुरत है. 29 दिसम्बर को वर्तमान सरकार के एक साल के कार्यों का लेखाजोखा लेकर आजसू पार्टी इस महागठबंधन सरकार को आईना दिखाने का कार्य करेगी. साथ ही उन्होंने कहा कि बंगाल में झारखंडी विचारधारा को उभारने का वक्त आ चुका है. जनहित के सभी मुद्दों को लेकर चरणबद्ध आंदोलन एवं निर्णायक लड़ाई लड़ने के लिए आजसू पार्टी ने कमर कस ली है और सड़क से लेकर सदन तक हमारी आवाज़ गूंजेगी.

बैठक को सम्बंधित करते हुए पार्टी के केंद्रीय उपाध्यक्ष सह गिरिडीह के सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी ने कहा कि झामुमो महागठबंधन की सरकार को अगर केंद्र का सहयोग प्राप्त नहीं होता तो कोरोना काल में राज्य में कोरोना से कम और भूखमरी से ज्यादा लोगों की मौत होती. यह सरकार हर मोर्चे पर विफल है. मजदूरों के नाम पर सिर्फ और सिर्फ राजनीति हुई. आज भी राज्य के सभी स्कूल कॉलेज बंद हैं और ऑनलाइन पढ़ाई के नाम पर लूट जारी है. ट्रांसफ़र पोस्टिंग का उद्योग जोरों पर है.

सदस्यों को संबोधित करते हुए पार्टी के केंद्रीय महासचिव सह गोमिया विधायक डॉ. लंबोदर महतो ने पार्टी के द्वारा उठाये गए सभी बिंदुओं पर समर्थन करते हुए कहा कि इन बिंदुओं को लेकर सड़क से सदन तक संघर्ष करने का समय आ चुका है. राज्य सरकार ट्रांसफ़र-पोस्टिंग और बालू-कोयला के उद्योग में लगी हुई है. झारखंड आंदोलनकारी चिह्नितीकरण आयोग का कार्यकाल पिछले अप्रैल माह में ही समाप्त हो चुका है. आयोग में 50 हज़ार झारखंड आंदोलकारियों का आवेदन मंजूरी के लिए लंबित है. इसके साथ ही आंदोलकारियों का पेंशन भुगतान भी कई महीनों से लंबित था. साथ ही राज्य सरकार ने अभीतक नियोजन नीति को लेकर कोई स्पष्टीकरण नहीं किया है.

पार्टी के प्रधान महासचिव एवं पूर्व मंत्री रामचंद्र सहिस जी ने कहा कि जहां अन्याय होता है वहीं न्याय की बात होती है और आज झारखण्ड की जनता के न्याय के लिए आंदोलन ही एकमात्र उपाय है. झूठे वादे और आश्वासन को लेकर सत्ता में काबिज हुई झामुमो सरकार ने जनता के साथ धोखा किया है. कला संस्कृति में समृद्ध झारखंड के कलाकारों के साथ कभी न्याय नहीं हुआ. आजसू पार्टी इस विषय को गम्भीरता से लेते हुए कलाकारों के हितों के लिए संघर्ष करने को लेकर प्रतिबद्ध है.

पिछड़ों के आरक्षण के लिए आंदोलन

पार्टी के मुख्य केंद्रीय प्रवक्ता डॉ. देवशरण भगत ने सभी सम्मानित सदस्यों का स्वागत करते हुए कहा कि आज की बैठक का मुख्य विषय कोरोना काल में सरकार के द्वारा चिकित्सा तथा रोज़गार की दिशा में की गयी पहल, गठबंधन सरकार की चुनावी घोषणाएं जैसे कि 1932 के खतियान के आधार पर स्थानीय नीति बनाने के संबंध में, झारखंड आंदोलन के मुद्दे पर सरकार की प्राथमिकता, पिछड़े वर्ग के 27 प्रतिशत आरक्षण पर सरकार की भूमिका, सरना आदिवासी धर्म कोड पर पार्टी का निर्णय, पंचायत चुनाव की तैयारी, बंगाल चुनाव के संबंध में पार्टी का सम्मेलन तथा विधानसभावार कार्यक्रम, झारखंड में विधानसभा के परिसीमन के संबंध में, संगठन के विस्तार एवं पुनर्गठन तथा कृषि बिल एवं राज्य में व्याप्त भ्रष्टाचार मुख्य रुप से शामिल हैं.

उन्होंने कहा कि जेपीएससी तथा कर्मचारी चयन आयोग के चेयरमैन के चयन से झामुमो सरकार की मंशा साफ नज़र आ गयी है और झारखंडी जनता तथा स्थानीयता को लेकर यह सरकार कितनी संवेदनशील है यह भी साफ हो गया है. सरना धर्म कोड को लेकर झारखंड में अगर सबसे पहले किसी पार्टी ने पहल की तो आजसू पार्टी थी. साथ ही कहा की संख्या के आधार पर बूथ और बूथ के आधार पर विधानसभा का गठन होता है. राज्य की जनसंख्या को देखते हुए राज्य में अब विधानसभा के परिसीमन पर चर्चा करने की जरुरत है. ईश्वर की कृपा से इस साल के अंत के साथ कोरोना जैसे अदृश्य शत्रु का अंत भी होगा और 2021 में पार्टी बेहतर सांगठनिक तथा राजनीतिक रुप से नए जोश के साथ एक नयी शुरुआत करेगी.

बैठक में मुख्य रूप से गिरिडीह लोकसभा के सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी, गोमिया विधायक लम्बोदर महतो, पूर्व मंत्री रामचंद्र सहिस, पूर्व मंत्री उमाकांत रजक, कमल किशोर भगत, अकिल अख्तर, पूर्व विधायक शिवपूजन मेहता, रौशनलाल चौधरी, मधुलाल महतो, पार्टी के केंद्रीय पदाधिकारी, केंद्रीय सदस्य, आमंत्रित सदस्य, विधानसभा प्रभारी, जिला प्रभारी, जिलाध्यक्ष एवं सचिव, जिला परिषद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं सदस्य, प्रमुख एवं उपप्रमुख, महानगर अध्यक्ष एवं सचिव शामिल हुए.

साथ ही सभी अनुसंगी इकाई (अखिल झारखण्ड महिला संघ, अखिल झारखण्ड छात्र संघ, आजसू बुद्धिजीवी मंच, अखिल झारखण्ड श्रमिक संघ, अखिल झारखण्ड किसान संघ, अखिल झारखण्ड अधिवक्ता संघ, अखिल झारखण्ड उद्योग एवं व्यापार संघ, अखिल झारखण्ड पिछड़ा वर्ग महासभा, अखिल झारखण्ड अल्पसंख्यक महासभा, अखिल झारखण्ड अनुसूचित जनजाति महासभा, अखिल झारखण्ड अनुसूचित जाति महासभा एवं आजसू पार्टी कला-संस्कृति प्रकोष्ट) के केंद्रीय अध्यक्ष एवं महासचिव उपस्थित थे.

केंद्रीय समिति के बैठक में लिए गए प्रस्ताव-

1. पिछड़ों के 27 प्रतिशत आरक्षण को लेकर पार्टी चरणबद्ध निर्णायक आंदोलन करेगी.

2. सरना धर्म कोड पर सदन में वृहत चर्चा होनी चाहिए थी यह राष्ट्रीय मुद्दा है. प्रकृति पूजक समाज का अलग धार्मिक पहचान का सवाल है. इसको लेकर पार्टी अलग अलग प्रदेश में रह रहे प्रकृति पूजक समाज के लोगों को गोलबंद करते हुए वहां की सरकार की सहमति की पहल करेगी साथ ही केंद्र सरकार को इससे अवगत कराएगी.

3. झारखण्ड में परिसिमन को लेकर झारखण्ड विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर केंद्र को भेजा गया है. आजसू पार्टी राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृह मंत्री परिसिमन आयोग एवं चुनाव आयोग से मिलकर झारखण्ड में परिसिमन लागू करने के लिए पहल करेगी.

4. वृहत झारखण्ड अलग राज्य के आंदोलन में बंगाल के पुरूलिया, बांकुड़ा एवं मिदनापुर के लोगों ने जुझारू संघर्ष में अपनी भागीदारी सुनिश्चित की थी, जेल गए, जान गवाऐ आज वे अपने आप को उपेक्षित महसुस कर रहें हैं. आजसू पार्टी वृहत झारखंड क्षेत्र के इन जिलों के लोगों के साथ सम्मेलन कर जनमत संग्रह करेगी. आजसू पार्टी इस क्षेत्र के मान, सम्मान, पहचान को अक्षुण्ण रखने के लिए स्वायत्तशासी परिषद गठन करने की मांग करेगी.

5. बैठक में पार्टी के निचले ईकाई से लेकर केंद्रीय समिति तक पुनर्गठन करने एवं नए लोगों को दायित्व देने का निर्णय लिया गया.

6. पार्टी सरकार के चुनावी वादा 1932 के खतियान के आधार पर स्थानीय नीति, बेरोजगारों को रोजगार देने अनुबंद कर्मियों को नियमित करने जैसे कई वादे जो इरादा में नहीं बदले हैं. उसके खिलाफ मुखर होगी.

7. झारखण्ड आंदोलनकारियों के चिंहितिकरण के लिए गठित आयोग, उनको मिलने वाले सम्मान, वर्तमान सरकार में प्राथमिकता सूची में नहीं है. आजसू पार्टी झारखण्ड और झारखण्ड आंदोलनकारियों के सम्मान के लिए संघर्ष करेगी.

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