आजसू पार्टी राज्‍यसभा चुनाव में भाजपा की पार लगाएगी नैया

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Puskar Mahto

अखंड बिहार हो या झारखंड अलग राज्य आजसू पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी के लिए हमेशा ही एक मजबूत सहयोगी और छोटे भाई की भूमिका में रहा है. यह बात कुछ और है कि झारखंड विधानसभा चुनाव 2019 में भारतीय जनता पार्टी और आजसू पार्टी दोनों अलग-अलग चुनाव लड़े.

इस चुनाव में गठबंधन नहीं होने के कारण भारतीय जनता पार्टी को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा. वहीं आजसू पार्टी का सामाजिक और राजनीतिक गणित काफी ऊपर उभर कर आया. इसे भारतीय जनता पार्टी कभी समझ नहीं पाई थी और उसके सामाजिक और राजनीतिक हैसियत के मुताबिक सम्मान नहीं दी थी.

फलाफल आज सामने हैं कि भारतीय जनता पार्टी जैसी राष्ट्रीय पार्टी को क्षेत्रीय पार्टी आजसू पार्टी की ओर सहारा के दिए बाट जोहनी पड़ रही है. यह सिर्फ झारखंड विधानसभा चुनाव 2019 में गलत रणनीतिकारों के कारण भारतीय जनता पार्टी आज हाशिए पर आया है और अपनी प्रतिष्ठा भी खोई है.

आज राज्यसभा का चुनाव सामने है. नामांकन की तिथि समाप्त हुई है. 26 मार्च को राज्यसभा का चुनाव संपन्न होगा और 28 मार्च को परिणाम सामने आएंगे.

भारतीय जनता पार्टी के पास कुल 25 सीटें हैं. बाबूलाल मरांडी भी भाजपा के अगुवा हो गये हैं. जबकि आजसू पार्टी के पास निर्णायक दो विधायक हैं. ये दोनो विधायक ही भारतीय जनता पार्टी के लिए तारणहार का काम करेंगे. आजसू पार्टी के सहयोग सी भारतीय जनता पार्टी के पास राज्यसभा चुनाव के लिए जीत के अंक 28 पूर्ण हो जाएंगी.

ढुल्‍लू की वोटिंग को लेकर संशय

यह बात कुछ और होगी कि भारतीय जनता पार्टी के बाघमारा विधानसभा सीट से निर्वाचित विधायक ढुल्लू महतो मतदान में भाग ले सकेंगे या नहीं. यह तो समय ही बताएगा. ढुल्लू महतो के ऊपर कई अपराधिक मामले चल रहे हैं.

इन मामलों में विधायक ढुल्लू महतो फरार हैं. उनकी गिरफ्तारी के लिए वारंट जारी किए गए हैं. वह भागे भागे फिर रहे हैं. ऐसे में संभावना व्यक्त किया जा रहा है कि ढुल्‍लू मतदान मौजूद नहीं रह सकेंगे.

बाबूलाल की वोटिंग पर पेंच

बाबूलाल मरांडी राजधनवार विधानसभा सीट से झारखंड विकास मोर्चा से चुनाव जीते हैं और उन्‍होंने अपनी पार्टी का भारतीय जनता पार्टी में विलय कर दिया है. लेकिन झारखंड विधानसभा के अध्यक्ष रविंद्र महतो ने अभी तक बाबूलाल मरांडी के संदर्भ में किसी अंतिम निर्णय में नहीं पहुंचे हैं. जिसके कारण भारतीय जनता पार्टी की ओर से श्री मरांडी मतदान कर सकेंगे या नहीं यह भी संशय की बनी हुई है.

ऐसे में भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में 2 सीटें कम दिखाई दे रहे हैं. अगर दल-बदल कानून बाबूलाल मरांडी के संदर्भ में लागू नहीं होते हैं तो मतदान की तिथि के दौरान स्थितियां परिस्थितियां कुछ और ही होंगे.

फिलवक्त बाबूलाल मरांडी के संदर्भ में भी मतदान करने को लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है. भारतीय जनता पार्टी को अपनी प्रतिष्ठा बचाने एवं राज्यसभा सदस्य का पद पाने के लिए एक मजबूत रणनीति बनाकर मैदान में उतरना होगा और सभी पक्षों को ध्यान में रखते हुए दो निर्दलीय विधायकों को अपने पक्ष में अतिरिक्त करना ही होगा. अन्यथा स्थिति सामान्य नहीं है.

भाजपा की जीत की राह नहीं है आसान

भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में स्थिति सामान्य बनाने के लिए एड़ी चोटी एक करना होगा. आजसू को साथ लेकर भारतीय जनता पार्टी को ठोस रणनीति बना कर आगे बढ़ना और जीत के लक्ष्य को हासिल करना होगा.

कांग्रेस के प्रत्याशी को कमतर करके आंका जा रहा है. लेकिन कांग्रेस पार्टी के सहयोगी सत्ताधारी दल झारखंड मुक्ति मोर्चा व राजद हैं. झारखंड मुक्ति मोर्चा अपनी रणनीति के तहत भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी को रोकने के लिए हर संभव प्रयास करेगी और यूपीए के पक्ष में परिणाम सकारात्मक करने के लक्ष्य को हासिल करेगी.

भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों ही राष्ट्रीय पार्टियां हैं और दोनों ही अपने प्रतिष्ठा और राज्यसभा के पद को पाने के लिए एड़ी चोटी एक करेंगे.

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