सौदेबाजी की राजनीति से जुड़े झामुमो को गिरिडीह के नाम से घबराहट क्यों: आजसू

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Ranchi: आजसू पार्टी (AJSU) ने कहा है कि झामुमो (JMM) पहले अपने गिरेबां में झांके इसके बाद सवाल पूछने के लिए आगे आये. फिर भी आजसू पार्टी झामुमो के सवालों का जवाब शौक से देती है. साथ ही झारखंड (Jharkhand) जिन सवालों का जवाब चाहता है उसे भी सामने लाना चाहती है.

आजसू के केंद्रीय प्रवक्‍ता डॉ देव शरण भगत द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के जरिए झारखंड मुक्ति मोर्चा से 12 तीखे सवाल पूछे हैं.

आजसू के 12 सवाल

1- केंद्र में नरसिंहा राव की सरकार को बचाने के लिए झामुमो पर जो आरोप लगे और मुकदमे हुए उसमें झामुमो ने क्या झारखंड के वोट की सौदेबाजी नहीं की थी?

2- झारखंड में पहले एनडीए की सरकार में शामिल होना फिर सरकार को गिराने के पीछे सिर्फ और सिर्फ हेमंत सोरेन का सत्तालोलुपता था या कुछ और? पांच महिनें में ही षड़यंत्र कर गुरूजी को मुख्यमंत्री पद से हटवा दिया और पुनः पांच महिने बाद इन्हीं आजसू और भाजपा के सहयोग से सरकार में उपमुख्यमंत्री बन बैठे. आखिर क्यों? अगर ये नीतिगत लड़ाई थी तो हेमंत सोरेन को उसी गठबंधन में उपमुख्यमंत्री नहीं बनना चाहिए था.

3- स्थानीयता के सवाल पर जेएमएम ने अर्जुन मुंडा की सरकार गिरा दी, लेकिन खुद सरकार में आकर स्थानीय नीति नहीं बना सके क्यों?

4- पहले मधु कोड़ा की सरकार बनाने के लिए आगे आना फिर समर्थन देना और बाद में उसे गिराकर सत्ता में बैठ जाना ये सौदेबाजी की राजनीति नहीं तो और क्या है? वर्तमान महागठबंधन में भी पहले यह तय हुआ कि विधानसभा चुनाव हेमंत सोरेन के नेतृत्व में होगा तभी महागठबंधन हुआ. ये सौदेबाजी नहीं तो और क्या है?

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5- क्या सीएनटी एवं एसपीटी एक्ट में संशोधन के प्रस्ताव पर हेमंत सोरेन ने सहमति दी थी?

6- गिरिडीह संसदीय सीट पर आजसू के चुनावी मैदान में उतरने से इतनी बेचौनी क्यों है. और सबसे बड़ा दल होने का गुमान था तो कांग्रेस के सामने चार सीटों पर घुटने क्यों टेके?

7-एक दलित पुलिस अधिकारी की हत्या के आरोपी को गिरिडीह से उम्मीदवार बनाने के पीछे जेएमएम की मजबूरी रही या दागियों को संरक्षण देने की जेएमएम की फितरत रही है. जेएमएम को इसी चुनाव में बताना चाहिए कि उसके दो विधायकों को किन मामले में सजा सुनाई गई थी, जिससे उनकी सदस्यता भी खत्म हो गई?

8- क्या एक ही दिन में अलग अलग जगहों पर सोलह संपत्तियों की रजिस्ट्री नहीं कराई गई थी. सीएनटी/एसपीटी एक्ट का उल्लंघन उनके परिवार द्वारा कई जगहों पर किया है, जो एक आपराधिक कृत्य है.

9- हरमू में सीएनटी-एसपीटी एक्ट का उल्लंघन कर गरीब आदिवासी की जमीन कौड़ी के भाव नहीं खरीदें?

10- क्या बसंत सोरेन ने पाकुड़ में खनन के काम गलत तरीके से हासिल नहीं किए हैं. और जेएमएम नेताओं पर मुम्बई के बालू माफियाओं को संरक्षण देने के आरोप क्यों लगते रहे हैं. अनुमति से अधिक खनन करने का आरोप भी लगता रहा है.

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11- जेएमएम को यह बताना चाहिए कि परिवारवाद पर पार्टी की नीति और नीयत क्या है. पार्टी के सभी बड़े पदों पर एक ही परिवार का कब्जा कब तक रहेगा. क्या यह झारखंड के आदिवासियों और मूलवासियों की हकमारी नहीं है.

12- चुनाव के मद्देनजर झारखंड यह भी जानना चाहता है कि जेएमएम के किन नेताओं ने कितनी जगहों पर सीएनटी-एसपीटी एक्ट का उल्लंघन कर संपत्तियां हासिल की है?

जेएमएम के सवालों का जवाब

1- आजसू पार्टी ने किस दल के साथ कब बार्गेनिंग की राजनीति की, झामुमो को पहले यह बताना चाहिये. आजसू ने राज्य हित में ही हर फैसले लिये हैं. आजसू झामुमों की तरह सरकार गिराने और बनाने की राजनीति भी नहीं करती.

2- स्थानीयता पर पार्टी द्वारा चलाए गए पोस्‍ट कार्ड अभियान के पश्चात् स्थानियता नीति में कई संशोधन हुए हैं. आजसू के आंदोलन के परिणाम स्वरूप ही सीएनटी/एसपीटी एक्ट में संशोधन के प्रस्ताव का निर्णय सरकार को वापस लेना पड़ा था. झारखंडी स्वाभिमान और अस्मिता की रक्षा के लिए पार्टी सडक से सदन तक सदैव संघर्षशील रहती है और आगे भी रहेगी. क्योंकि पार्टी नेतृत्व संघर्ष के ऊपज है न कि परिवारवाद के.

3- सुदर्शन कंपनी पब्लिक डोमेन में है और चुनाव आयोग को दिए जाने वाले हलफनामे में इसकी जानकारी उपलब्ध है. हिंडाल्को में ट्रांसपोर्टिंग का काम करने वाली कई कंपनियों में यह भी शामिल है.

4- स्वराज स्वाभिमान यात्रा के मकसद को लेकर पार्टी के प्रमुख पहले ही अपना नजरिया आलेख जनता के नाम खुला पत्र के जरिये पेश कर चुके हैं. उस आलेख में आजसू प्रमुख ने पहली पंक्ति में ही लिखा था कि स्वराज स्वाभिमान यात्रा का मकसद चुनावी आहटों से कतई जुड़ा नहीं है. दरअसल  स्वराज की अवधारणा गांधी जी ने गढ़ी थी और उसका मूल मंत्र था कि लोकतंत्र की बुनियाद नीचे से मजबूत होते हुए उपर तक जाए. शक्ति का केंद्र आम आदमी और उसका समूह हो.

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स्वराज स्वाभिमान यात्रा के जरिये आजसू प्रमुख गांव- गांव में यही जानने की कोशिश करते रहे कि स्वराज के इस पैमाने पर झारखंड में आखिरी कतार के लोग किस मुकाम पर  पर खड़े हैं. और स्वायत पंचायती व्यवस्था में झारखंडी जनमानस का कितना ख्याल रखा जा रहा है.

इस यात्रा का मकसद क्रांतिवीर भगवान बिरसा मुण्डा की सोच और हुंकार का मुनादी करना भी है जिसमें धरतीपुत्र ने ‘‘अबुआ दिशुम अबुआ राज’’ का मंत्र दिया था.

याद रहे यह यात्रा आगे भी चलेगी अभी तो चुनाव के लिहाज से विराम दिया गया है. हमारा लक्ष्य महात्मा गांधी और भगवान बिरसा के संदेश को झारखंड के जन-जन तक पहुंचने का है.

विशेष राज्य का दर्जा इस संसदीय चुनाव का अंग है और आजसू पार्टी प्रतिनिधि के दिल्ली पहुंचते ही इसका स्वरूप दिख जाएगा.

5- आजसू ने अपने जन अभियान या किसी आंदोलन में गिरिडीह संसदीय सीट की बात नहीं की. चुनाव का अहम आधार गठबंधन होता है. आजसू ने गठबंधन के तहत यह सीट हासिल की. किसी सौदेबाजी के तहत ये सीट हासिल नहीं की.

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