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बीजेपी आजसू से पीछा छुड़ाना तो नहीं चाहती?

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Ranchi:आजसू ने आगामी झारखंड विधानसभा चुनाव में एनडीए से 26 सीटों पर मजबूती के साथ चुनाव लड़ने की दावेदारी पेश की है. लेकिन, बीजेपी झारखंड के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुआ ने साफ कह दिया है कि 2014 के विधानसभा चुनाव के फार्मूले पर ही सहयोगी दलों के साथ सीटों का बंटवारा होगा. 2014 चुनाव में आजसू को 8 सीट और लोक जन शक्ति पार्टी को एक सीट दिया गया था. 2019 के चुनाव में भी आजसू को 8 सीट और लोजपा को एक सीट ही मिलेगा.

बता दें कि 2014 विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने आजसू को जो 8 सीटें दिये थे. 2014 चुनाव में आजसू ने चंदनकियारी, बड़कागांव, सिल्ली, रामगढ़, लोहरदगा, जुगसलाई, टुंडी और तमाड़ में उम्मीदवार उतारे थे. इनमें से आजसू ने पांच सीटों पर जीत दर्ज की थी.

अगर आजसू बीजेपी के 2014 फार्मूले को मान भी ले, तो क्या बीजेपी आपने सहयोगी आजसू को यही आठ सीट देगी. जबकि इस बार चंदनकियारी, लोहरदगा और रामगढ़ में बीजेपी अपना उम्मीपदवार देना चाहती है.

चंदनकियारी लोहरदगा और रामगढ़ का पेंच

चंदनकियारी: झारखंड विकास मोर्चा के टिकट से अमर बाउरी चंदनकियारी विधायक बने. जेवीएम के 6 विधायकों के साथ उन्होंंने बीजेपी ज्वाइन किया और रघुवर सरकार में मंत्री बने. अब वह मुख्यमंत्री रघुवर दास और पीएम मोदी के विचारों पर चलने का दावा करते हैं. ऐसे में बीजेपी 2019 चुनाव में अमर बाउरी को ही चंदनकियारी से चुनाव लड़ाना चाहती है. इस सीट को आजसू अपनी उपजाउ जमीन मानती है. उमाकांत रजक आजसू से यह सीट जीतकर सरकार में मंत्री रह चुके हैं.

लोहरदगा: 2014 विधानसभा सीट में आजसू की सीटिंग सीट थी. यहां के विधायक कमल किशोर भगत को सजा हो जाने के बाद लोहरदगा सीटे के लिए उपचुनाव हुआ और कांग्रेस के सुखदेव भगत जीते और विधायक बने. अब 2019 चुनाव से पहले सुखदेव बीजेपी ज्वाइन कर लिये हैं और लोहरदगा सीट से चुनाव लड़ना चाहते हैं.

रामगढ़: यह आजसू के लिए हमेशा से ही सीटिंग सीट रही है. झारखंड के मंत्री रहे चंद्रप्रकाश चौधरी रामगढ़ विधानसभा चुनाव हर बार जीतते आए हैं. सांसद बनने के बाद सीपी चौधरी अपनी पत्नीे सुनीता चौधरी को चुनाव लड़ाने की तैयारी कर रहे हैं. जबकि बीजेपी आजसू की इस मजबूत सीट पर यह कहकर दावा कर रही है कि 2019 लोकसभा चुनाव में उसने अपनी मजबूत सीटिंग गिरिडीह सीट आजसू को दिया था. इसलिए आजसू भी अपनी मजबूत सीटिंग सीट रामगढ़ बीजेपी को सौंप दे.

2014 में आजसू को 8 सीट बीजेपी से मिला. आजसू ने 8 में 5 सीट पर जीत दर्ज की थी. यानि की आजसू को 62.5 फीसदी सीटों पर सफलता मिली. बाकी के सीटों पर आजसू के हार के बावजूद नंबर दो पॉजिशन रहा.

वहीं बीजेपी 2014 के झारखंड विधानसभा चुनाव में सबसे अधिक 73 सीटों पर चुनाव लड़ा. इसमें से बीजेपी को 37 सीटों पर जीत मिली. प्रशिशत के हिसाब से देखा जाये तो 50.6 फीसदी सीटों पर बीजेपी को सफलता मिली.

ऐसे में विधानसभा चुनाव में अपनी रणनीति तय करने में बीजेपी से ज्यादा आजसू को तेज माना जा सकता है. अब आजसू ने बीजेपी के सामने 26 सीटों पर मजबूती के साथ दावेदारी पेश कर दिया है. अगर बीजेपी डिमांड मान ले और 2019 चुनाव में आजसू को 26 सीटें दे दे. उसके बाद नतीजे पिछली बार की तरह ही 60 फीसदी से ज्यादा मिल जाये तो आगामी सरकार में वह बराबरी के दर्जे का डिमांड भी कर सकती है.

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