गांधी परिवार के बेहद करीबी और कांग्रेस के चाणक्य थे अहमद पटेल, फिर भी कभी सरकार में मंत्री नहीं बने

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सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) के करीबी और कांग्रेस (Congress) के वरिष्ठ नेता अहमत पटेल का 71 साल की उम्र में निधन हो गया. पटेल एक महीने पहले कोरोनावायरस से संक्रमित हुए थे और उनका मेदांता अस्पताल में इलाज़ चल रहा था. पटेल के निधन से पार्टी को बड़ा झटका लगा है. उन्हें कांग्रेस का ब्रेन कहा जाता था. वर्तमान में वो राज्यसभा सांसद थे.

गुजरात के भरूच ज़िले के अलकेश्वर में जन्म लेने वाले अहमद पटेल 3 बार लोकसभा सांसद और पांच बार राज्यसभा (1993,1999, 2005, 2011, 2017) के लिए चुने गए. पटेल ने पहली बार लोकसभा का चुनाव इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) के वक्त में लड़ा.

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साल 1977 में भरूच लोकसभा सीट से उन्होंने चुनाव लड़ा और जीते भी. उनका राजनीति रसूख ऐसा था कि आपातकाल के बाद हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के खिलाफ माहौल था, ऐसे वक्त में भी पटेल अपनी सीट जीते. जिसके बाद लगातार 1980, 1984 में लोकसभा के सदस्य चुने गए.

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1993 से वो राज्यसभा के सदस्य रहे. साल 2001 में अहमद पटेल सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार बने. वो उनके बेहद करीबी रहे.

पार्टी की हर मर्ज की दवा

पटेल का राजनीति कांग्रेस के लिए बेहद मायने रखती है, क्योंकि उन्हें पार्टी के चाणक्य के तौर पर जाना जाता था. माना जाता था कि पटेल की हार सोनिया गांधी की हार होती थी और अहमद पटेल की जीत सोनिया गांधी की जीत.

ऐसे में ये समझा जा सकता है कि सोनिया गांधी के इस राजनीतिक सलाहकार की पार्टी में क्या भूमिका थी. वो लंबे समय से सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार थे.

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बड़ा राजनीति रसूख फिर भी सादा मिजाज़

यहां तक कहा जाता है कि सोनिया गांधी को राजनीति में स्थापित करने में अहमद पटेल की बड़ी भूमिका थी. राजीव गांधी की हत्या के बाद पार्टी को संभालने के लिए महत्पूर्ण सलाह देने के लिए अहमद पटेल ही उनके पीछे थे.

अहमद पटेल की एक और खास बात की वो कभी मंत्री नहीं रहे, लेकिन हमेशा सत्ता के केंद्र में रहे. पार्टी में ताकतवर स्थिति रखने के बावजूद अहमद पटेल हमेशा लोप्रोफाइल रहे.

कहा जाता है कि उन्हें सादगी से जीवन जीना बेहद पसंद था. खबरों से दूर रहने वाले पटेल को राजनीतिक रसूख गांधी परिवार से वफादारी के चलते लग़ातार बढ़ता चला गया.

राजीव गांधी के भी रहे करीबी

साल 1977 में कांग्रेस जब हार से वापसी करने की कोशिश कर रही थी तो अहमद पटेल ने इंदिरा गांधी को भरूच में अपनी सीट पर प्रचार के लिए बुलाया था.

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ये भी कहा जाता है कि इंदिरा की वापसी के लिए ये वाकया बेहद अहम साबित हुआ था. पटेल का राजनीति में आगमन ऐसे समय में हुआ जब इंदिरा राजीव गांधी को पार्टी में लाने की तैयारी कर रही थीं. तब तक लाइमलाइट में न आने वाले पटेल पर राजीव गांधी की नज़र पड़ी, जिसके बाद वो गांधी परिवार को लग़ातार करीब होते गए.

इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव गांधी ने उन्हें अपना संसदीय सचिव बनाया. सोनिया गांधी ने ही उन्‍हें पार्टी के ट्रेजरार की जिम्‍मेदारी भी सौंपी.

उन्‍होंने 14वीं और 15वीं लोकसभा के लिए यूपीए के गठन की सलाह दी थी और सरकार गठन के लिए नंबर जुटाने के पीछे भी पटेल की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है.

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