तीन राज्यों में चुनावी नतीजों के बाद बीजेपी को झारखंड की चिंता, अर्जुन मुंडा दिल्ली तलब

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Ranchi: छत्तीसगढ़, राजस्थान और मध्य प्रदेश के चुनावी नतीजों के बाद बीजेपी अलर्ट मोड में आ गयी है. अब बीजेपी को झारखंड समेत दूसरे भाजपा शाषित प्रदेशों की चिंता होने लगी है, जहां 2019 में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. बीजेपी हार के बाद की रणनीति पर काम करने लगी थी. करीब 3.45 बजे पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा को दिल्ली पार्टी मुख्यालय से फोन आया. श्री मुंडा अपने कुछ सहयोगियों के साथ बैठे हुए थे. मुख्यालय का फोन होने की वजह से वो अलग हटे और फोन रिसीव किया. फोन पर दो मिनट तक बात करने के बाद उन्होंने अपने पीए से अविलंब दिल्ली जाने की तैयारी करने की बात कही. कहा कि पहली फ्लाइट का टिकट कराओ. निर्देश सुनते ही पीए एयरपोर्ट गए और 4.55 की एयर एशिया की फ्लाइट का टिकट करवाया. श्री मुंडा फ्लाइट छूटने से कुछ देर पहुंचे और दिल्ली गए. दिल्ली में उन्होंने पार्टी मुख्यालय जाकर आला अधिकारियों से मुलाकात की. देर रात तक मंथन हुआ. दूसरे दिन यानी बुधवार की फ्लाइट लेकर वो वापस रांची आ गए.

दुबई के दौरे पर सीएम रघुवर दास

खबर है कि आरएसएस मुख्यालय नागपुर से बीजेपी के सभी बड़े नेताओं को नागपुर बुलाया गया है. यहां तक कि अमित शाह भी आरएसएस की बैठक में शामिल होने के लिए नागपुर पहुंचनेवाले हैं. पुख्ता सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक अमित शाह को विशेष रूप से नागपुर बुलाया गया है. राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में मिली करारी शिकस्त के बाद आरएसएस पार्टी को कुछ दिशा-निर्देश देना चाह रहा है. इस बैठक में शामिल होने के लिए राज्य के कुछ नेता शामिल हो सकते हैं. अर्जुन मुंडा निश्चित तौर पर इस बैठक में शामिल होनेवाले हैं. वहीं सीएम इस दौरान दुबई के दौरे पर हैं.

झारखंड में सत्ता परिवर्तन की अटकलें

राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश कांग्रेस की झोली में जाने के बाद झारखंड में सत्ता परिवर्तन की अटकलें काफी तेज हो गयी हैं. हालांकि, बीजेपी का कोई भी नेता इन अटकलों से इत्तेफाक नहीं रखता. लेकिन सरकारी अधिकारियों, कर्मियों और आम लोगों के बीच यह चर्चा आम हो चली है कि झारखंड में आगामी चुनाव के मद्देनजर सत्ता में परिवर्तन हो सकता है. व्हाट्सएप पर इस तरह के कई मैसेज वायरल हो रहे हैं. राजनीतिक पंडित इस बहस में दो हिस्से में बंटे हुए हैं. एक का कहना है कि बीजेपी चुनाव से पहले ऐसी गलती कभी नहीं कर सकती, क्योंकि ऐसा करने से विपक्ष को बैठे-बिठाए एक तगड़ा मुद्दा चुनाव के लिए मिल जाएगा. वहीं दूसरे हिस्से के राजनीतिक पंडितों का कहना है कि आगामी चुनाव को लेकर ऐसा संभव है. उदाहरण के तौर पर मोदी के गढ़ गुजरात में हुए राजनीतिक उठा-पटक का हवाला दिया जा रहा है.

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