रिम्‍स रांची में सस्‍ती दवा की दुकान कहां है, कहां मिलेगी दवाओं में 85% तक छूट

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Ranchi: रांची के रिम्‍स में सिर्फ पूरे झारखंड के ही नहीं बल्कि दूसरे राज्‍यों के मरीज इलाज के लिए आते हैं. कहा जाता है कि राज्‍य के सबसे बड़े इस सरकारी अस्‍पताल में सबसे सस्‍ता इलाज होता है. रिम्‍स के डॉक्‍टर गंभीर से गंभीर बीमारी का इलाज करने की क्षमता रखते हैं. खास बात यह है कि यहां डॉक्‍टरों की फीस महज 5 रुपये है. बाजवूद इसके अब यहां पर मरीजों को सस्‍ती इलाज की चिंता सता रही है.

रिम्‍स में भले ही डॉक्‍टरों की फीस 5 रुपये है. यहां मरीज की जान बचाने वाले डॉक्‍टरों को देवता की तरह पूजा जाता है. लेकिन अब रिम्‍स के मरीजों को सस्‍ती दवाएं कहां से मिलेंगी चिंता की बात यही है. सरकारी आदेश के बाद 85% तक सस्‍ती दवाएं बेचने वाले दवाई दोस्‍त को सरकारी आदेश के बाद बंद कर दिया गया है.

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बिना तैयारी के सस्‍ती दवाई की दुकान बंद

दवाई दोस्‍त का संचालन करने वाले प्रेमसंस एंड बैरोलिया ट्रस्‍ट के राजीव बैरोरिया का कहना है कि रिम्‍स की दवाई दोस्‍त दुकान से रोज 800 से 1000 मरीज दवाएं खरीदकर ले जाते हैं. रिम्‍स आने वाले आधा से ज्‍यादा मरीज ब्रांडेड मेडिसिन अफोर्ड नहीं कर सकते हैं.

इधर इस मामले में रिम्‍स के चिकित्‍सा अधीक्षक ने कहा कि प्रबंधन नहीं चाहता है कि गरीब व असहाय मरीजो को परेशानी हो. प्रबंधन ने दवाई दोस्‍त को हटाने का निर्देश दिया है तो वैकल्पिक तैयारी भी कर रहा है.

सस्‍ती दवाई वाली प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र फेल

झारखंड में मरीजों को सस्‍ती दवाएं उपलब्‍ध कराने वाली प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र फेल है. ड्रग डिपार्टमेंट के अनुसार झारखंड में जन औषधि केंद्र के लिए 85 लाइसेंस जारी किए गए हैं. इनमें से रांची में विभिन्‍न अस्‍पतालों में 21 केंद्र हैं. इनमें 50 फीसदी केंद्र बंद पड़े हुए हैं. सिर्फ 11 केंद्र काम कर रहे हैं. इन 11 केंद्रों में कुछ गिनी-चुनी दवाएं ही उपलब्‍ध होती हैं.

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सबसे ज्‍यादा मरीजों की संख्‍या रिम्‍स में होती है. यहां जन औषधि केंद्र में महीने की बिक्री महज 4 से 5 हजार रुपये की है. दुकान में जीवन रक्षक दवाओं स्‍टॉक भी नहीं रहता है. ऐसे में सस्‍ती दवाओं के लिए मरीजों की निर्भरता दवाई दोस्‍त पर है. यहां प्रतिदिन 80000 रुपये तक की दवाएं बिकती हैं.

रिम्‍स स्थित जन औषधि केंद्र को साल 2016 में निर्देश देकर विभाग द्वारा टेंडर निकालकर इसका संचालन आउटसोर्स के तहत करने का निर्देश दिया गया था. लेकिन, इस दौरान प्रबंधन की लापरवाही के कारण टेंडर नहीं निकाला गया. बगैर टेंडर के ही केंद्र का संचालन किया गया. 2018 में टेंडर नहीं होने से विभाग से दवा की सप्‍लाई बंद कर दी गई. तब से जन औषधि केंद्र में स्‍टॉक नहीं है.

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जन औषधि केंद्र के संचालक ने बताया कि केंद्र में साल 2018 में ही 24 तरह की दवाएं एक्‍सपायर हो चुकी हैं. इसकी कुल लागत एक लाख 20 हजार रूपये है. रिम्‍स प्रबंधन द्वारा 11 दिसंबर 2019 में ही दवा उपलब्‍ध कराने वाली कंपनी जीपी सेल्‍स को एक्‍सपायर हो चुकी दवाओं को वापस करने के लिए लिखा गया था. लेकिन, अब तक जन औषधि केंद्र में ही पड़ी हुई है.

कहीं मेडिकल सिंडिकेट के दबाव में तो नहीं सिस्‍टम

रांची के सांसद संजय सेठ ने जेनरिक दवा दुकान दवाई दोस्‍त को प्रबंधन द्वारा अचानक हटाने के निर्देश का विरोध किया. उन्‍होंने ट्वीट करते हुए लिखा है कि लोगों को यह आशंका जता रहे हैं कि सिस्‍टम मेडिकल सिंडिकेट के दबाव में तो नहीं है.

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