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मदर्स डे पर मां के द्वारा एक मां की दर्द भरी कहानी व सीख देने वाली कविता

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आप सबको मदर डे की ढेर सारी शुभकामनाएं. आज मैं फिर हाजिर हूं, एक दुखियारि मां की कहानी लेकर, जिसको अपनों ने ही भिखारिन बनने के लिए मजबूर कर दिया. लेकिन, इससे पहले मैं आप माओं को कुछ कहना चाहती हूं.

मैं जानती हूं कि आप में से कुछ भाग्यशाली होंगी. आपको आपके बेटे मान देते होंगे, ख्याल रखते होंगे. आपके पति भी पूरे सम्मान के साथ व्यवहार करते होंगे. मेरी आप से गुजारिश है कि आप उनकी कदर करें, क्योंकि जब सब मिलता है तो अक्सर हम लापरवाह हो जातें हैं और हम समय की कद्र नहीं करते.

इसलिये आप समय की कद्र करते हुए अपने आप को समझें और अपनों को प्यार देना और कद्र करना कभी भी न भूलें. कुछ को तो कुछ भी नसीब नहीं होता है फिर भी प्यार लुटा कर वो अपने आप को खुशनसीब मानती हैं.

हम सब अपनों की व अपने बच्चों की बहुत प्यारी है. जो कुछ भी मैं आप को बताने जा रही हूं. वो इसलिए बताना चाहूंगी कि आप आपके पास जो है उसमे संतुष्ट रहें और खुश रहें. अपनी किस्मत पर नाज करें.

मैं घर खाना खाने के लिए बैठी ही थी कि एक आवाज आयी. रोटी दे,दे माई. मैने दो रोटी ली और उसको दी. वो मुझे ही देख रही थी. मैं जा ही रही थी कि वो बोली:-तेरा घर आबाद रहे.

मैं वापस लौट आयी. मुझे आवाज कुछ पहचानी सी लगी. गौर से देखा तो पहचान गयी कि ये तो रेखा है. इसके तो पति, दो बेटे और बहू, तीन मकान की मालकिन है. इसकी ये हालत क्यूं? अब मैं उसकी कहानी जानना चाहती थी.

उसने बताया कि बेटे की शादी के बाद उसके पति ओर बेटों ने उसके मकानों पर कब्जा कर लिया और दुःख दीये. उसने विरोध किया तो उसे अपने ही घर से बाहर निकाल दिया.

वो आज कल भीख मांग कर गुजारा करती है. अब मैं सोच रही थी कि क्या अपनों का खून पानी हो गया है? क्या उस मां को दो रोटियां भी नहीं खिला सकते? क्या मां के दूध को भी भूल गये हैं? क्यूँ वो ये भूल जाते हैं कि अगर ये माँ न होती तो? क्या उनका कोई वजूद होता? कितना स्वार्थी हो गया है अपनों का खून?

ऐसे बेटे ये भूल जाते हैं कि एक दिन जिंदगी घूम कर वहीं आ जाती है. ऐसे बेटों से मेरा अनुरोध है कि मां को मान दें. उनकी आत्मा को दुखाना भगवान की आत्मा को दुखाने के बराबर है.

अब आप ही बताएं कि हम सब कितने भाग्यशाली हैं. आज का दिन बहुत ही पावन है क्योंकि आज मां को मान और बधाई दोनो साथ मिलेगें. आपको भी इंतजार होगा कि आज मैं बच्चों को आशीर्वाद दूंगी, ढेर सारा प्यार लुटाउंगीं और केक भी हैं न.

आप अपने हाथों से केक काटेंगी. फिर वो सब अपने हाथ से खिलाएंगे, आप उनको खिलायेंगी. कितना अच्छा पल है कि आप मुस्कराई और खुशियां आयीं. देखा न खुशियां वहां पर आपके घर संसार में आने का इंतजार कर रही थी.

और अपनी मां के लाडले बच्चों याद है न. आज क्या है. जरुर याद होगा, आजकल के बच्चे ज्यादा ही स्मार्ट हैं. वो सब भूल सकते हैं पर मदर डे नहीं भूल सकते हैं.

कल रात को ही सब प्लान कर लिया होगा. क्या उपहार देना है? कौन सा केक मां को पसन्द है. सब कुछ चुपके-चुपके से प्लान कर लिया होगा और हां केक जब आपकी मां काटकर आपको खिलाये तो एक टुकड़ा मेरी तरफ से भी मां के हाथों से खा लेना. मां तो बस मां होती है. ढेर सारा प्यार और आशीर्वाद मिलेगा.आप सभी लोगों को.

आप सब की तरफ से एक कविता लिखी है, आपकी मां के लिए जिसको मै यहां प्रस्तुत करना चाहती हूं.

-:मां तुझे सलाम:-

मां तुझे सलाम याद रखेगें उम्र तमाम

रौनक है घर भर की सच्ची दोस्त है हम सब की

छांव में तेरी मुस्कान है लोरी की मधुर तान है

तेरे आंचल तले हर जिन्दगी पलती है

गृहलझ्मी,अन्नपूर्णा कहलाती है मां तू महान है, त्याग की मूरत है

ठोकर खाकर गिरते हैं हमें थाम लेती है

जब देर से घर आते हैं खिड़की में से झांकती है

रोते हैं तो आंसू पोंछ गले लगाती है

खुशिओं की सेज सजाती है मां ऐसी होती है.

आंचल में शीतलता, नयनों से बरसती ममता, एसी होती है मां

आप सब बच्चों को मेरी तरफ से बहुत प्यार ओर ढेर सारा आशीर्वाद और सबको जय श्री कृष्ण. सब मांओं को मेरी तरफ से-:happy mothers day

 

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