झारखंड में सरकारी स्‍कूलों के 85% बच्‍चे ऑनलाइन पढ़ाई से वंचित: सर्वे रिपोर्ट

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Ranchi: ज्ञान विज्ञान समिति झारखंड के द्वारा झारखंड की सरकारी शिक्षा व्‍यवस्‍था पर एक ताजा सर्वे किया गया है. इस सर्वे को राज्‍य के 17 जिलों के 115 प्रखंडो 620 पंचायतों, 877 गांवों के 5118 घरों में जाकर किया गया.

सर्वे में लोगो से कोरोना काल में गांवों में सरकारी स्‍कूलों में पढाई लिखाई को लेकर जानकारी इकट्ठा किया गया् इस सर्वे की रिपोर्ट में कई चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं.

कोरोना महामारी पिछले 18 महीने से अधिक समय में अपना कहर ढाया है. हर तबके पर इसका बुरा असर पड़ा था. खासकर बच्चों की पढ़ाई भी बहुत प्रभावित हुई है. खासकर प्राथमिक स्कूलों के बच्चों की हालत खस्ता है.

सरकारी दावों की मानें तो ऑनलाईन पढ़ाई के जरिये शैक्षणिक गतिविधियां चालू हैं पर हकीकत बेहद डरावना है. ज्ञान विज्ञान समिति, झारखंड ने कोरोना काल में प्राथमिक स्कूलों के बच्चों की पढ़ाई पर महीनेभर (जुलाई- 10 अगस्त) तक एक सर्वे किया. मंगलवार को इसे जारी किया गया.

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24 में से 17 जिलों में किये गये इस सर्वे के दौरान 115 प्रखंडों के 620 पंचायतों, 877 गांवों और 5118 घरों तक पहुंची.

इनमें से 84.27 घरों के बच्चे सरकारी स्कूलों में जबकि 16.32 फीसदी प्राइवेट स्कूलों के मिले. इनमें से 85 फीसदी से भी अधिक ऐसे बच्चे मिले जिन्हें ऑनलाइन पढ़ाई की सुविधा नहीं मिल सकी है.

स्मार्टफोन की कमी और स्कूलों, घरों में इंटनरेट की कमी इसकी सबसे बड़ी वजह रही. बच्चों की बर्बाद होती पढ़ाई की चिंता में आस में 92 फीसदी से अधिक अभिभावकों ने स्कूल जल्दी से खोले जाने की गुहार लगायी.

ज्यां द्रेज की पहल पर सर्वे

ज्ञान विज्ञान समिति के राष्ट्रीय सचिव काशीनाथ चटर्जी और संस्था के झारखंड प्रमुख शिवशंकर प्रसाद ने बताया कि कोरोना महामारी के बाद इस साल आयी दूसरी लहर के दौरान जनजागरुकता अभियान चलाया जा रहा था.

इसी क्रम में इकोनॉमिस्ट ज्यां द्रेज की सलाह पर प्राथमिक शिक्षा की स्थिति को जानने के लिये सर्वे किया गया.

इन जिलों में हुआ सर्वे

इस क्रम में गिरिडीह, पलामू, धनबाद, कोडरमा, खूंटी, बोकारो, लातेहार, गढ़वा, गोड्डा, दुमका, जामताड़ा, पूर्वी सिंहभूम, साहेबगंज, रामगढ़, लोहरदगा, रांची और पाकुड़ में काम किया गया. आदिवासी, दलित, मजदूर, मुस्लिम और ओबीसी टोले में बच्चों की प्राथमिक शिक्षा पर कोरोना के असर का मूल्यांकन करने की कोशिश हुई.

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सर्वे में 66 वोलेंटियर्स लगे थे. सर्वे के नतीजे चिंताजनक हैं. ऑनलाईन शिक्षा की हालत दयनीय है. शिक्षा सचिव को समिति ने 23 अगस्त को सारी जानकारी दे दी है. जल्द ही सीएम हेमंत सोरेन से भेंट कर शिक्षा व्यवस्था को लेकर आ रही चुनौतियों, समाधान की जानकारी दी जायेगी.

95 फीसदी बच्चे सरकारी स्कूलों के भरोसे

समिति के मुताबिक राज्य में 28,010 प्राथमिक स्कूल हैं. 15,970 उच्च प्राथमिक और 3,392 माध्यमिक स्कूल हैं. अब भी राज्य के 95 फीसदी बच्चों की पढ़ाई सरकारी स्कूलों के भरोसे ही चल रही है.

कोरोना काल में इंटरनेट, स्मार्ट फोन की कमी से बच्चों की पढ़ाई चौपट हुई है. हालत यह है कि पिछले एक महीने की अवधि में 62 फीसदी से अधिक बच्चों की भेंट अपने टीचर से एक-दो बार ही या कभी नहीं हो पायी है.

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मात्र 6.23 प्रतिशत बच्चे ही ऐसे मिले हैं जो ऑनलाइन क्लास के भरोसे अपनी पढ़ाई को किसी तरह बनाये हुए हैं. लगभग 17 फीसदी उनमें से हैं जो कभी-कभी ऐसा कर पा रहे हैं.

बुनियाद चौपट होने की आशंकाः काशीनाथ

काशीनाथ चटर्जी के मुताबिक उच्चतर शिक्षा पा चुके छात्रों की भी हालत आज के समय में किसी से छिपी नहीं है. वे स्किल्ड नहीं दिखते. अब कोरोना काल प्राथमिक शिक्षा पर जिस तरह से अपना प्रभाव डाल रहा है, उसका नतीजा 8-10 सालों बाद दिखेगा जब बच्चे बगैर ठोस बुनियाद के हाथों में केवल सर्टिफिकेट रखे घुमेंगे.

केवल क्लास में प्रमोट कर देने के तरीके से ही काम नहीं चलने वाला. स्कूलों के ताले खुलेंगे तभी बच्चों के लिये बेहतर शिक्षा के रास्ते भी खुलेंगे. भले कोरोना का खतरा है पर इसके लिये जरूरी प्रोटोकॉल और अन्य शर्तों को देखते हुए स्कूल खोलने की पहल हो.

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