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बिहार में 800 करोड़ का जीएसटी घोटाला, पांच फर्जी कंपनियां शामिल

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Patna: जीएसटी की इंटेलिजेंस विंग ने राज्य में 800 करोड़ रुपये के जीएसटी फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ किया है. फर्जी कंपनियों के रजिस्ट्रेशन से इस फर्जीवाड़े का खेल शुरू हुआ. इसके तहत बिना सामान के वास्तविक सप्लाई के इनवॉयस जारी किया जाता था. फिर तीन-चार फर्जी लेयर बनाकर इस कड़ी की अगली कंपनियों द्वारा फर्जी इनवॉयस पर करोड़ों का इनपुट टैक्स क्रेडिट ले लिया जाता था. इस तरह सरकार को करोड़ों के राजस्व की क्षति पहुंचाई जा रही थी.

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फिलहाल मामले की जांच चल रही है.

पांच कंपनियां शामिल

जीएसटी इंटेलिजेंस, पटना जोनल इकाई द्वारा यह अब तक की बिहार के सबसे बड़ी कर चोरी पकड़ी गयी है. आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि इसके लिए छपरा, दिल्ली व कोलकाता में छापेमारी की गयी. छपरा की दो कंपनियों ने सारा स्क्रैप दिल्ली भेजा. पुन: दिल्ली की दो कंपनियों ने करोड़ों के स्क्रैप को फर्जी कागजात द्वारा कोलकाता के सेंट्रलाइज मर्चेंट को बेच दिया.

छपरा की दोनों कंपनियों के मालिक कोलकाता निवासी दिखे और उनके बैंक खाते भी वहीं के पाए गये. ई-वे बिल सिस्टम में स्क्रैप की बिक्री को जिन ट्रकों से भेजा गया, रैंडम जांच में कई वाहनों के निबंधन फर्जी पाए गए. स्क्रैप की बिक्री छपरा से दिल्ली और पुन: दिल्ली से कोलकाता तक व्यापारिक सुलभता, आर्थिक लाभ, इस ट्रेड नियमों के प्रतिकूल पाए गए.

जांच के क्रम में कई व्यक्तियों से पूछताछ की गई तो पांच कंपनियों के खिलाफ 800 करोड़ के फर्जीवाड़े और 140 करोड़ के इनपुट टैक्स क्रेडिट का गलत और गैरकानूनी उपयोग का खुलासा हुआ.

इंटेलिजेंस विंग का कहना है कि ये घोटाला 1300-1400 करोड़ तक पहुँच सकता है. फर्जी कंपनियों ने कागज़ पर बेचे गए माल को तीन चार फर्जी कंपनियों के अकाउंट में ही घुमाया और कोलकाता के एक व्यक्ति के अकाउंट में जमा करवा दिया. मामले में पैसे का रोटेशन दिखा कर टैक्स चोरी किया गया साथ ही सरकार से इनपुट टैक्स पर 70 करोड़ का फायदा ले लिया. जब इंटेलिजेंस विंग की टीम कंपनियों के पते पर पहुंची तो वहां कोई कम्पनी थी ही नहीं. सारी कंपनी सिर्फ कागजों पर ही चल रही थी और कागज़ पर ही माल की सप्लाई और पूरा बिजनेस चल रहा था.

छपरा स्थित कम्पनी का नाम था भरतिया उद्योग, महावीर ट्रेडर्स, दिल्ली स्थित जेनरल ट्रेडिंग, कोलकाता स्थित भारतीया ट्रेडर्स और सेंट्रलाइज मर्चेंट. सभी शहरों में इन कंपनियों के पते फर्जी पाए गए। छपरा की कम्पनियों ने करीब 250 करोड़ का फर्जी माल दिल्ली की कंपनी को बेचा. दिल्ली की कंपनी ने कोलकाता की कंपनी को इसी माल को बेच दिया. एक ही फर्जी माल तीन चार कंपनियों को बेचा गया और पैसों का अरोटेशन दिखाते हुए 400 करोड़ रुपये के टैक्स की चोरी कर ली गई. फर्जी ई-वे बिल पर माल का ट्रांसपोर्टेशन किया गया.

कंपनियों ने हर स्तर पर सरकार से इनपुट क्रेडिट का फायदा लिया और सरकार को करीब 100 करोड़ की चपत लगा दी. स्क्रैप पर 18 फीसदी जीएसटी लगता है और ये कंपनिया 5 फीसदी टैक्स देती थी. सारे इनवॉइस भी फर्जी पाए गए। सभी फर्जी कंपनियों ने अलग-अलग राज्यों में अपना जाल फैला कर करोड़ों रुपये की चपत सरकार को लगायी है.

 

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