सपनों का घर बनाना अब होगा आसान, कोल इंडिया बेचेगा 75 फीसदी सस्‍ता बालू

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Ranchi: क्‍या आप अपने लिए सपनों के घर बनाने की प्‍लानिंग कर रहे हैं. क्‍या इसे बजट की समस्‍या आ रही है. तब आपकी यह टेंशन काफी हद तक दूर होने वाली है. आपको मकान बनाने के लिए इस्‍तेमाल होने वाला बालू बहुत ही सस्‍ता मिलने वाला है. आप यकीन नहीं करेंगे लेकिन आपको बालू बाजार की दर से 75 फीसदी कम दर पर मिलेगा. इसके लिए कोल इंडिया ने पहल की है. कैसे मिलेगा आपको सस्‍ता बालू चलिए जानते हैं.  

दरअसल कोल इंडिया ने कोयला उत्‍पादन के साथ अब सस्‍ती दर पर ओवरबर्डन से रेत बनाने का निर्णय लिया है. इससे ओवरबर्डन से प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगा. कोल इंडिया के महाप्रबंधन सुनील कुमार का कहना है कि वेस्‍टर्न कोल फिल्‍ड लिमिटेड की योजना के अनुसार, बीसीसीएल को यह काम शुरू करने का आदेश दे दिया गया है. दो से तीन माह में बालू का उत्‍पादन शुरू हो जाएगा. इसके बाद ग्राहक परियोजना के पास से बालू खरीद सकेंगे.

कोल इंडिया के महाप्रबंधक ने बताया कि अभी बालू कारोबारी जितनी दर पर लोगों को बालू उपलब्‍ध कराते हैं, उसकी एक चौथाई दर पर उपलब्‍ध कराया जाएगा. यानी अभी बाजार में बालू का रेट तीन हजार से साढ़े तीन हजार रूपये प्रति ट्रक है, जिसे 750-875 रुपये में उपलब्‍ध कराया जाएगा. हालांकि, परियोजना शुरू होने के बाद रेट में उतार-चढ़ाव संभव है.

जानकारी के अनुसार बीसीसीएल द्वारा बालू के उत्‍पादन के बाद झारखंड में कहां-कहां सस्‍ता बालू की बिक्री होगी, इसकी भी जानकारी जल्‍द दी जाएगी.

पांच सालों में करीब 8 मिलियन टन बालू का होगा उत्‍पादन

कोल इंडिया के हेडक्‍वार्टर से मिली जानकारी के अनुसार, कोल इंडिया की कंपनियों में 15 प्रमुख रेत संयंत्रों को चालू करके अगले पांच वर्षों में करीब 8 मिलियन टन रेत उत्‍पादान का लक्ष्‍य रखा गया है. इस वित्‍त वर्ष के अंत तक करीब तीन लाख क्‍यूबिक मीटर उत्‍पादन के साथ 15 में से 9 संयंत्रों को लगाने का काम शुरू किया गया है. इस प्रयास से बड़े पैमाने पर लोगों को घर और बिल्डिंग बनाने में मदद मिलेगी.

परियोजन की सफलता और सस्‍ती रेत की बढ़ती मांग के साथ WCL ने नागपुर के पास देश के सबसे बड़े रेत उत्‍पादन संयंत्र को चालू कर वाणिज्यिक उत्‍पादन शुरू किया है. यह यूनिट बाजार मूल्‍य से आधी कीमत पर हर दिन 2500 क्‍यूबिक मीटर रेत का उत्‍पादन कर करी है. कोल इंडिया की यह पहल नदी तल के रेत खनन के प्रतिकूल प्रभाव को भी कम करती है.

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