झारखंड के 703 एनजीओ को 13 साल में मिले करीब 19 अरब रुपये विदेशी फंड

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Ranchi: झारखंड में काम कर रहे 703 एनजीओ को 13 सालों में करीब 19 अरब विदेशी फंड मिले. मतलब हर साल औसतन डेढ़ अरब रूपये इन एनजीओ को प्राप्‍त हुआ. एक रिपोर्ट के मुताबिक 2006 से लेकर 2019 तक विदेशी एफसीआरए फंड से 18 अरब, 83 करोड़ 17 लाख 41 हजार 631 रुपए मिले हैं. हैरान करने वाली बात यह है कि एनजीओ द्वारा विदेशी फंड मिलने की भी जानकारी छिपाई जा रही है. इतनी बड़ी रकम कहां और कैसे खर्च की गई इसकी जानकारी नहीं दी जा रही है.

सरकार से छिपा रहे हैं जानकारी 

बताते चलें कि लगभग दो साल पहले झारखंड के 88 एनजीओं के दफ्तरों पर सीआईडी का छापा पड़ा था, इन सभी एनजीओ पर विदेश से चंदा लेने और उनकी जानकारी सरकार से छिपाने का आरोप भी लगा.

88 एनजीओ ने सरकार के बार-बार के अल्टीमेटम के बावजूद विदेशी फंड के स्रोत की जानकारी नहीं दी थी. इस समय 14 करोड़ रुपए और कई महत्वपूर्ण कागजात भी सीआइडी के हाथ लगे थे. वहीं झारखंड पुलिस के अपराध जांच विभाग ने 2013 से तीन साल के भीतर में कुल 265 करोड़ रुपये की निधि प्राप्त करने वाले 88 गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) को नोटिस दिया था.

एनजीओ से पूछा गया था कि क्या वे प्रासंगिक कानून के तहत पंजीकृत है या नहीं, साथ ही उनके पदाधिकारियों का विवरण, विदेश सहित धन का स्रोत और बीते पांच साल के खर्च व आय का विवरण व अन्य जानकारियां मांगी गई थी.

तब एक मीडिया रिपोर्ट में बताया गया कि सरकार के आदेश पर झारखंड के 88 एनजीओ की जांच कर रही सीआइडी ने 10 एनजीओ की प्रारंभिक जांच पूरी कर ली है. सीआइडी के तत्‍कालीन एडीजी अजय कुमार सिंह ने इन सभी 10 एनजीओ की जांच रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय व सरकार को भेजी. रिपोर्ट में कहा गया कि विदेशी फंड की राशि का दुरुपयोग हुआ है और इसकी राशि से धर्म परिवर्तन कराया गया है.

एडीजी अजय कुमार सिंह ने अपनी अनुशंसा में लिखा है कि प्रारंभिक तौर पर जिन 10 संस्थाओं की जांच की गई है, उनमें गंभीर त्रुटियां मिली हैं. यह स्पष्ट तौर पर करोडों रुपये की हेराफेरी, भुगतान की संदिग्ध स्थिति, ईसाई धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए निधि का उपयोग व सरकार को गलत सूचना दिए जाने को प्रमाणित करती है. एफसीआरए के तहत यह दंडनीय अपराध है. चूंकि इन संस्थाओं की संख्या झारखंड में 88 है और इनके द्वारा किए गए लेनदेन विभिन्न राज्यों व अंतरराष्ट्रीय स्तर से संबंधित हैं, इसलिए एफसीआरए के तहत इसकी जांच सीबीआई से कराने के बिंदु पर विचार किया जा सकता है.

10 एनजीओ, जिनकी प्रारंभिक जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपी गई

  • लुथेरन ग‌र्ल्स हॉस्टल
  • रांची कैथोलिक आर्कडायोसिस
  • डॉउटर्स ऑफ संत अन्ना
  • रांची कार्मेलाइट सोसाइटी
  • इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिश्चियन डॉक्ट्रीन फादर्स सोसाइटी
  • हॉली फेथ ट्राइबल वेलफेयर एंड डेवलपमेंट ट्रस्ट
  • इंस्टीट्यूट ऑफ ओबलेट सिस्टर्स ऑफ नाजारेथ सोसाइटी
  • संत अलबर्ट्स कॉलेज
  • सिस्टर्स ऑफ संत चा‌र्ल्स सोसाइटी
  • सिस्टर्स ऑफ चेरिटी ऑफ विंसेंट डी पॉल

जांच में क्या पाया गया ?

1. लुथेरन ग‌र्ल्स हॉस्टल ने 2016-17 का रिटर्न ही दाखिल नहीं किया. इसमें करोडों रुपये की अनियमितता की आशंका है.

2. गैर सरकार संगठनों से बडी राशि का नकद भुगतान भी किया गया है. जबकि, एफसीआरए के तहत अधिकतम 20 हजार रुपये तक ही नकद भुगतान किया जा सकता है.

3. संस्थाओं ने एफसीआरए खाते को घरेलू फंड के खाते के साथ घालमेल किया है। यह एफसीआरए में पूरी तरह वर्जित है.

4. एफसीआरए कोष को नन एफसीआरए कोष में स्थानांतरित नहीं किया जा सकता है, लेकिन रांची कार्मेलाइट सोसाइटी ने इसका उल्लंघन किया है.

5. एफसीआरए के अनुसार एक करोड रुपये से अधिक की विदेशी सहायता की राशि को पब्लिक डोमेन पर अपलोड करना है, लेकिन इन संगठनों ने इसका पालन नहीं किया.

265 करोड़ रुपये बरामद

विदेश मंत्रालय को सूचना मिली थी कि देश में कुछ एनडीओ विदेशों से फंड प्राप्त कर रहे हैं जो संदिग्ध है. इसके बाद 2014 में राज्य सरकारों को केन्द्र की ओर से निर्देश दिये गये. उधर केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने भी FCRA के तहत विदेशी चंदा हासिल करने वाले एनजीओ को विदेशी फंड के स्रोतों पर जानकारी मांगी थी. बावजूद इसके इन एनजीओ ने कथित तौर पर वार्षिक आयकर दाखिल नहीं किया और इन्होंने अपने आय व खर्च के स्रोत को छिपाया.’

6000 NGO को शो कॉज

सरकार ने बताया कि पिछले कुछ वित्तीय वर्षों में वार्षिक रिटर्न फाइल नहीं करने को लेकर करीब 6,000 गैर सरकारी संगठनों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया.

उस वक्त भी रिजिजू ने कहा था कि एफसीआरए-2010 और इसके बाद बनाए गए नियमों के अनुसार इस कानून के तहत विदेश से अनुदान हासिल करने वाले हर व्यक्ति को आय और खर्च के स्टेटमेंट, रशीद, भुगतान खाते और बैलेंस शीट की स्कैन कॉपी के साथ एक हस्ताक्षरित यानी कि डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित रिपोर्ट ऑनलाइन सौंपनी होती है.

विदेशी चंदा हासिल कर रहे गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) पर कार्रवाई करते हुए सरकार ने तकरीबन 9000 एनजीओ का लाइसेंस विदेशी चंदा नियमन कानून (एफसीआरए) का उल्लंघन करने के संबंध में रद्द कर दिए थे. एक आदेश में गृह मंत्रालय ने कहा कि साल 2009-10, 2010-11 और 2011-12 के लिए वार्षिक रिटर्न दाखिल नहीं करने वाले 10 हजार 343 एनजीओ को नोटिस जारी किए गए थे.

गृह मंत्रालय के मुताबिक 16 अक्टूबर 2014 को इन एनजीओ को नोटिस जारी कर कहा गया कि वे एक महीने के भीतर अपना वार्षिक रिटर्न दाखिल कर बताएं कि उन्हें कितना विदेशी चंदा मिला, इस चंदे का क्या स्रोत है, किस उद्देश्य के लिए इसे हासिल किया गया और किस तरीके से विदेशी चंदे का इस्तेमाल किया गया. कुल 10 हजार 344 एनजीओ में से मात्र 229 ने जवाब दिया था.

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