झारखंड की 30 फीसदी पत्नियां मानती हैं घरेलू हिंसा जायज

by

Ranchi : केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं को मिलाकर लगभग 21 योजनाएं ऐसी हैं जो सिर्फ महिलाओं के विकास और उत्थान के लिए समर्पित हैं. झारखंड जैसे राज्य में एक तरफ तो महिलाओं के कल्याण के लिए तमाम उपाय किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी और किसी राज्य में महिलाएं घरेलू हिंसा की शिकार सबसे ज्यादा हो रही हैं यहां उनकी पिटाई को 34 फ़ीसदी पति जायज मानते हैं. इसके लिए कई वाजिब कारण भी हैं.

ऐसा हम नहीं बल्कि झारखंड को फोकस कर किए गए सर्वे की विस्तृत रिपोर्ट कह रही है. यह रिपोर्ट राष्ट्रीय परिवार कल्याण सर्वेक्षण 2015 16 की है. इस रिपोर्ट को हाल ही में जारी किया गया है. यह रिपोर्ट राज्य में महिलाओं की घरेलू हिंसा को लेकर क्या स्थिति है, उसके बारे में बता रही है. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2015 झारखंड के मुताबिक झारखंड में 34 फ़ीसदी पुरुष मानते हैं कि कुछ बातों के लिए पत्नियों पर होने वाली घरेलू हिंसा जायज है. इसके लिए वह कई तरह के तर्क भी देते हैं.

Read Also  7th Pay Commission : दिवाली में सरकारी कर्मचारियों का कितना बढ़ेगा महंगाई भत्‍ता, जानिए दिवाली गिफ्ट में क्‍या खास मिलेगा

इस रिपोर्ट की सबसे रोचक बात यह है कि घरेलू हिंसा को कुछ हद तक महिलाएं भी सही मानती हैं. आंकडों के मुताबिक राज्य की 30 फ़ीसदी महिलाएं ऐसी हैं जिनका तर्क है कि पति द्वारा की जाने वाली पिटाई जायज है और यह हमें स्वीकार है.

दो फीसदी महिलाओं ने उठाया घरेलू हिंसा के खिलाफ कदम

12 वर्षों तक स्कूली शिक्षा ले चुकी 19 फीसदी महिलाएं व 28 फीसदी पुरुष भी मानते हैं कुछ स्थितियों में पति द्वारा पति को पीटा जाना सही है. रिपोर्ट की गंभीर बात यह है कि केवल दो फीसदी शादीशुदा महिलाएं ऐसी है जिन्होंने अपने ऊपर की गई हिंसा के खिलाफ कदम उठाया है.

खास बात यह है कि शहरी इलाकों की अपेक्षा ग्रामीण इलाकों की महिलाओं को पति द्वारा दोगुनी हिंसा का सामना करना पड़ता है जो महिलाएं पढ़ी-लिखी हैं यानी जो कम से कम 12 साल तक स्कूल गई हैं, उनके साथ हिंसा की दर कम देखी गई. ऐसी पढ़ी लिखी महिलाओं की संख्या 19 फीसदी ही है. रिपोर्ट में ऐसी 60 फीसदी महिलाओं का जिक्र है जिन्होंने यह स्वीकारा कि उन्होंने पिता को भी मां के साथ मारपीट करते देखा है और आज उनके पति भी उनके साथ मारपीट करते हैं. जिनके पति अक्सर शराब के नशे में रहते हैं ऐसी 61 फीसदी महिलाओं ने स्वीकार किया है कि उन्हें पति पीटते हैं.

Read Also  7th Pay Commission : दिवाली में सरकारी कर्मचारियों का कितना बढ़ेगा महंगाई भत्‍ता, जानिए दिवाली गिफ्ट में क्‍या खास मिलेगा

74 फीसदी महिलाओं ने हिंसा की जानकारी नहीं दी

इस राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण रिपोर्ट का काला सच यह भी है जितनी महिलाओं के साथ घरेलू हिंसा जैसी बात होती है उनमें से 74 फ़ीसदी महिलाएं इसके खिलाफ आवाज उठाने के बजाय चुप रहना पसंद करती हैं. केवल 16 महिलाओं ने इसके खिलाफ किसी से मदद मांगी है.

आंकड़े बताते हैं 24 महिलाओं में हिंसा के बाद कटने व खरोंच की शिकायत मिली है.. सात फीसदी को आंख की चोट डिस्लोकेशन व थोडा जलने जैसी चोटों का सामना करना पड़ा. 5 फ़ीसदी महिलाओं में पति की पिटाई की वजह से गहरे घाव, हड्डी टूटने, दांत टूटने पर गंभीर चोट जैसी शिकायत मिली है.

Read Also  7th Pay Commission : दिवाली में सरकारी कर्मचारियों का कितना बढ़ेगा महंगाई भत्‍ता, जानिए दिवाली गिफ्ट में क्‍या खास मिलेगा

तर्क कैसे-कैसे

  • 20 फीसदी महिलायें और 34 फीसदी पुरूष के अनुसार अगर पत्‍नी अपने सा-सासुर का सम्‍मान नहीं करती हैं तो उसे पीटना जायजा है.
  • 15 फीसदी महिलायें व 20 फीसदी पुरूष मानते हैं कि पति के साथ बहस करने पर पत्‍नी को पीटने का हक है.
  • 33 महिलायें मानती हैं कि घर या बच्‍चों का ध्‍यान रखने के लिए पत्‍नी की पिटाई सही है.
  • 19 फीसदी पुरुष मानते हैं कि उनकी जीवन संगिनी अगर उनके प्रति वफादार नहीं है तो उसे पीटना जायज है.
  • 21 फीसदी पुरुष का मानना हे कि अगर पत्‍नी संबंध बनाने के लिए मना करती है तो उनको गुस्‍सा करने आर्थिक अधिकार छीनने जबर्दस्‍ती संबंध बनाने या किसी दूसरी महिला के साथ सबंध बनाने का अधिकार है.
  • 40 फीसदी पुरुषों के मुताबिक पत्‍नी किसी भी परिस्थिति में शारीरिक संबंध बनाने से मना नहीं कर सकती है.

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.