JPSC छठी मुख्‍य परीक्षा के स्‍क्रूटनी में लगाये गये प्रारंभिक परीक्षा पास हुए 18 सहायक

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Ranchi: झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन (JPSC) की छठी सिविल सेवा परीक्षा में नियम-कानून धज्जियां उड़ायी जा रही हैं. 22 अक्टूबर 2018 को झारखंड लोक सेवा आयोग के सचिव राजीव रंजन राय के हस्ताक्षर से पत्रांक 2400 निकाला गया. इसमें 55 सहायक प्रशाखा पदाधिकारी को स्क्रूटनी की जिम्मेवारी दी गयी.

वेब मीडिया से मिल रही जानकारी के अनुसार इन 55 सहायक प्रशाखा पदाधिकारी में से 18 सहायक ऐसे हैं, जिन्होंने झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी)की प्रारंभिक परीक्षा पास किया है. ऐसे में इन सहायकों को परीक्षा कार्य में लगाने का उद्देश्य क्‍या हो सकता है? यह बड़ा सवाल है.

झारखंड लोक सेवा आयोग के कर्मियों को ही इस काम में लगाया गया था ऐसा नहीं है. आयोग ने सचिवालय से भी सहायक प्रशाखा पदाधिकारियों को प्रतिनियुक्त किया था. ऐसे में आयोग में प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले अभ्यर्थियों को इससे अलग क्यों नहीं रखा गया, यह भी एक बड़ा सवाल है?

उन सहायकों के नाम कुछ इस प्रकार से हैं मुकेश रजक ,फणीश्वर रजवार, दीपक कुमार, अनिल कुमार चौधरी, मनोरंजन कुमार, विष्णु कुमार जयसवाल, सोनू कुमार, अरुण कुमार, अनवर अंसारी, ब्रज कुमार, उत्तम कुमार विश्वास, भूपेंद्र कुमार अनुराग, आशुतोष कुमार राय, राधा रानी हसदा, कुमार सत्यप्रीत, देवेंद्र चंद्र मांझी, संजीव कुमार महतो ,और शैलेश कुमार… आदि.

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झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) के द्वारा जारी अधिसूचना में यदि तीसरे पन्ने पर हम अपनी नजर डालते हैं, तो उसमें लिखा है कि‍ आयोग में जो भी कर्मी स्क्रूटनी में लगे हैं उनका या उनके सगे संबंधियों का आवेदन पत्र यदि काम के दौरान उन्हें मिल जाता है, तो वह उस आवेदन को अपने ऊपर के पदाधिकारी या अपने किसी अन्य कर्मी से स्क्रूटनी करवाएंगे.

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सवाल सबसे बड़ा यह है कि जब सचिव को यह पता है कि किन-किन सहायकों का झारखंड लोक सेवा आयोग की प्रारंभिक परीक्षा में चयन हुआ है? फिर वह इस प्रकार का हास्यास्पद पत्र निकाल कर अपनी किस प्रकार की मंशा को साबित करना चाहते हैं? क्या यह अभ्यर्थी स्वच्छ मानसिकता के साथ स्क्रूटनी के काम को अंजाम दे सकते हैं?

इस मामले को लेकर कई अभ्यर्थियों से भी बातें की. किसी ने बताया कि हम लोग छोटे स्टाफ हैं. हम लोगों को जहां लगाया जाता है. काम करना हमारी मजबूरी होती है. फिर किसी ने बताया कि मैं स्क्रूटनी के काम में नहीं लगा था. लेकिन, जब हमने उन्हें बताया कि हमारे पास पत्र है तब उन्होंने कबूल किया कि हां इस काम में मैं लगा था.

साभार: बवाल न्‍यूज

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