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शराब-सिगरेट ही नहीं टूथपेस्‍ट-एयरफ्रेशनर जैसे 12 चीजों से भी हो सकता है कैंसर

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विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक भारत में हर साल पांच लाख लोग कैंसर से मर जाते हैं. हालांकि दवा और स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्रों में हुई प्रगति ने इस बीमारी को कुछ हद तक कम भी किया है, लेकिन अब भी इसका स्वरूप और परिमाण डरावना ही है. ज्यादा उम्र के लोगों के साथ-साथ युवा भी इनका शिकार हो रहे हैं.

जानकारों के मुताबिक हमारा खान-पान और पर्यावरण से संबंधित कुछ विशेष कारण कैंसर में बड़ी भूमिका निभाते हैं. यह बात आपको हैरान कर सकती है कि हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में हम जिन चीजों के आदी हो चुके हैं वे हमारे लिए कैंसर का कारण बन सकती हैं.

ग्रेनाइट मार्बल: घर बनाने के दौरान ग्रेनाइट मार्बल का इस्तेमाल होना आम बात है. यह आसानी से साफ हो जाता है और इसमें जल्दी धब्बे भी नहीं लगते. लेकिन, ग्रेनाइट मार्बल रेडियोएक्टिव गैस रेडॉन छोड़ता है जिससे कैंसर का खतरा बढ़ सकता है. ज्यादा परेशानी की बात यह है कि इस रंगहीन और गंधहीन गैस का पता लगाना लगभग नामुमकिन है. रेडॉन गैस को फेफड़ों के कैंसर का दूसरा सबसे आम कारण बताया जाता है.

मोमबत्ती: भारत में घरों व दफ्तरों की बत्ती गुल होना आम बात है. इसलिए मोमबत्ती का इस्तेमाल भी आम जिंदगी का हिस्सा है. लेकिन यह जानकर आपको हैरानी होगी कि मोमबत्ती के इस्तेमाल से भी कैंसर हो सकता है. मोमबत्ती में कैंसरजनक तत्व और अन्य यौगिक मिश्रण होते हैं. नीले रंग की मोमबत्तियों से निकलने वाले धुएं में जीवाश्म ईंधन के अलावा ऐसे घटक होते हैं जो सेहत के लिए ठीक नहीं हैं.

एयर फ्रेशनर: एयर फ्रेशनर की खुशबू हमें काफी पसंद आती है. दफ्तरों के साथ अब घरों में भी एयर फ्रेशनर का इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है. लेकिन इन्हें बनाने में जो कैमिकल इस्तेमाल किए जाते हैं उनसे वायु प्रदूषण बढ़ता है जो कैंसर के प्रमुख कारणों में से एक है. इनसे हमारे नाक के नथुनों पर भी बुरा असर पड़ता है जिससे अन्य गंधों को पहचानने की क्षमता प्रभावित होती है.

कार का धुआं: गाड़ियों से निकलने वाला धुआं कैंसर होने का एक बड़ा कारण है. जानकारों के मुताबिक डीजल से चलने वाली कारें ज़्यादा नुक़सानदेह हैं. बच्चों को होने वाले फेफड़ों के कैंसर के लिए डीजल कारों का धुआं विशेष रूप से जिम्मेदार है. डीजल-पेट्रोल के जलने पर इंजन से कार्बन मोनोक्साइड और बेंजीन जैसी जहरीली गैसें निकलती हैं. बेंजीन से कई प्रकार का ब्लड कैंसर हो सकता है. यह हड्डियों के लिए भी नुकसानदेह है.

टूथपेस्ट: सुबह उठकर दांत साफ करना दिन के सबसे पहले कामों में से एक होता है. अधिकतर लोग दांत साफ करने के लिए टूथपेस्ट का ही इस्तेमाल करते हैं. ये उत्पाद भी कैंसर का कारण बन सकता है. टूथपेस्ट में फ़्लोराइड होता है. बताया जाता है कि इससे हड्डियों का कैंसर हो सकता है. हालांकि इस पर कम ही ध्यान दिया जाता है क्योंकि इसके सबूत काफी कम हैं. ट्रिक्लोसन एक और घटक है जो टूथपेस्ट में मिलाया जाता है. इससे कैंसर हो सकता है. टूथपेस्ट बनाने वाली ज्यादातर कंपनियां इसका इस्तेमाल करती हैं.

कॉस्मेटिक्स: त्वचा के लिए इस्तेमाल होने वाले कॉस्मेटिक उत्पादो को लेकर एक गलत धारणा यह है कि वे पानी से धोने के बाद हमारी त्वचा से पूरी तरह हट जाते हैं. लेकिन कुछ उत्पाद ऐसे हैं जो हमारी त्वचा पर बने रहते हैं. खासकर त्वचा को धूप से बचाने वाले आइटम. इन उत्पादों में बेंजोफेन-3 नाम का केमिकल होता है. इस्तेमाल के बाद यह पेशाब में काफी दिनों तक मौजूद रहता है. इसके अलावा कॉस्मेटिक उत्पादों में जिन कैंसरकारी कैमिकलों का इस्तेमाल होता है, उनमें फॉर्मेल्डिहाइड, बेंजीन, टॉल्युईन और डाइऑक्सेन-1 व 4 शामिल हैं.

सोडा: डाइट सोडा भी कैंसर का कारण हो सकता है. इसे मीठा बनाने के लिए इसमें ऐसी चीजें मिलाई जाती हैं जिनसे ब्रेन ट्यूमर और मूत्राशय का कैंसर हो सकता है.

चाय: चाय पीना भी एक आम आदत है. कुछ लोग बहुत ज्यादा चाय पीते हैं और कुछ लोग बहुत ज्यादा गर्म चाय पीते हैं. जानकारों के मुताबिक बहुत ज्यादा गर्म चाय पीने से भोजन-नलिका के कैंसर का खतरा हो सकता है. इसलिए चाय को थोड़ा ठंडा करके पीने की सलाह दी जाती है.

डिब्बा बंद खाना यानी पैक्ड फूड: डिब्बा बंद खाने को स्तन कैंसर का एक कारण बताया जाता है. धातु से बने डब्बों पर प्लास्टिक की कोटिंग की जाती है. पैकिंग के समय खतरनाक कैमिकल खाने में मिल जाते हैं. जानकारों के मुताबिक डिब्बा बंद खाने से डीएनए और हार्मोन में बदलाव आते हैं जिससे महिलाओं में स्तन कैंसर का खतरा हो सकता है.

ज्यादा पका खाना: जला या ज्यादा पका हुआ खाना भी सेहत के लिए ठीक नहीं है. इससे पेट, मलाशय और अग्नाशय का कैंसर हो सकता है. चिकन, मछली और मीट में प्रोटीन की मात्रा ज्यादा होती है. लेकिन इन्हें ज्यादा पकाने से उनमें मौजूद अमीनो एसिड, हेटरोसाइक्लिक एमिन में बदल जाता है जो एक कैंसरकारी तत्व है.

गर्भनिरोधक गोलियां: महिलाओं में गर्भनिरोधक गोलियां लेने का चलन बढ़ा है. इन गोलियों को स्तन, गर्भाशय और लिवर कैंसर से जोड़ कर देखा जाता है. गर्भावस्था को बार-बार रोकने से स्तन कैंसर की संभावना काफी बढ़ जाती है. यह माना जाता है कि 30 साल की उम्र से पहले गर्भवती होने और बच्चा जनने से महिलाओं में स्तन कैंसर की समस्या कम होती है.

शराब: इससे दिल को तो खतरा रहता ही है, कैंसर की संभावना भी बढ़ती है. कैंसर की 200 से भी ज्यादा किस्में हैं. इनमें से इन सात की वजह शराब को पाया गया है. रोजाना शराब के सेवन से गुदा, स्तन, भोजन-नलिका और पेट का कैंसर हो सकता है. महिलाओं में इससे छाती के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है. पहले धारणा थी कि कम मात्रा में शराब कैंसर से बचा सकती है. लेकिन एक हालिया शोध बताता है कि अगर आप रोज एक या दो ड्रिंक भी लेते हैं तो कैंसर का खतरा बढ़ जाता है.

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