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विदेश दौरे से लौटकर सुदेश ले सकते हैं एनडीए से नाता तोडने पर फैसला

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#RANCHI : आजसू पार्टी के प्रमुख सुदेश महतो ने एनडीए से नाता तोडने का संकेत दिया है. अपनी परंपरागत सीट सिल्ली से लगातार दूसरी बार चुनाव हारने के बाद सुदेश ने ऐसा संकेत दिया है. सुदेश के करीबी सूत्रों के अनुसार विदेश दौरे से लौटने के बाद वह इस दिशा में कदम बढायेंगे.

परिवार के साथ स्‍पेन गये सुदेश

सुदेश चुनावी थकान मिटाने के लिये सपरिवार एक सप्ताह के निजी दौरे पर मंगलवार को स्पेन के लिये रवाना हो गये . सूत्रों के अनुसार सम्भवत: 12 जून को वह रांची लौट आयेंगे.

आजसू करेगा गठबंधन की पुर्नसमीक्षा

झारखंड में गोमिया व सिल्ली विधानसभा उपचुनाव के परिणाम आने के बाद सत्ताधारी गठबंधन के सहयोगियों भाजपा और आजसू के बीच दूरी बढने लगी है. उपचुनाव के नतीजे आने के बाद आजसू प्रमुख सुदेश महतो ने कहा था कि गठबंधन पर पुनर्विचार किया जायेगा. सुदेश ने परिणाम घोषित होने के कुछ ही देर बाद बाकायदा प्रेस कान्फ्रेंस बुला कर कहा कि इस उपचुनाव में सहयोगी दल का कैसा सहयोग रहा, इसकी समीक्षा की जायेगी.

सीपी सिंह ने कहा था ‘आजसू एनडीए का कोई बडा घटक नहीं’

इस पर नगर विकास मंत्री सीपी सिंह ने कहा कि गठबंधन का घटक होने के नाते सभी को समीक्षा का हक है. उन्होंने कहा कि आजसू ही क्यों ,भाजपा को भी समीक्षा करनी चाहिये. सिंह ने यह भी कहा कि आजसू एनडीए का कोई बहुत बडा घटक नहीं है.

मुद्दों को लेकर सुदेश ने सीएम को लिखा पत्र

सिंह के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये आजसू प्रवक्ता देवशरण भगत ने कहा कि उनकी पार्टी ने कभी यह नहीं कहा कि वह बहुत बडा दल है. आजसू तो भाजपा को हमेशा बडा भाई कहती रही है. गठबंधन के दोनों सहयोगियों की बयानबाजी के बीच आजसू प्रमुख सुदेश महतो ने मुख्यमंत्री रघुवर दास को पत्र लिख कर स्थानीय और नियोजन नीति में संशोधन करने की मांग कर दी. सुदेश ने पत्र में सरकार पर झारखंडी हितों की अनदेखी सहित कई सवाल उठाये हैं.

आजसू विधायक ने भाजपा को दिया आमने-सामने समीक्षा का प्रस्‍ताव

दोनों दलों में बढती तल्खी के बीच अब आजसू के प्रधान महामंत्री व विधायक रामचन्द्र सहिस ने भाजपा और रघुवर सरकार पर हमला बोला है. सहिस ने कहा है कि आजसू पार्टी चाहेगी कि आमने-सामने बैठकर स्थिति की समीक्षा हो,ताकि हम बता सकें कि कैसे झारखंडी भावना और झारखंडियों के हितों की अनदेखी की जा रही है.

दरअसल इस उपचुनाव में उम्मीदवारी को लेकर पहले ही भाजपा और आजसू में तकरार शुरू हो गयी थी. भाजपा चाहती थी कि गठबंधन के तहत सिल्ली सीट पर आजसू लडे और गोमिया से वह लेकिन आजसू दोनों सीटों पर लडने को लेकर अड गयी और सिल्ली तथा गोमिया में उम्मीदवारों की घोषणा कर दी. भाजपा ने गठबंधन धर्म का पालन करते हुये सिल्ली में उम्मीदवार नहीं दिया, लेकिन उसने गोमिया में अपना प्रत्याशी खडा कर दिया. गोमिया में आजसू और भाजपा दोनों के प्रत्याशी चुनाव मैदान में रहने का लाभ झामुमो उम्मीदवार को मिला. उधर सिल्ली में आजसू अपने बल बूते पर चुनाव लडी .

उसकी शिकायत है कि सिल्ली में उसे भाजपा का सहयोग नहीं मिल पाया . जबकि दूसरी तरफ झामुमो के समर्थन में विपक्ष पूरी तरह एकजुट रहा. नतीजतन झामुमो दोनों सीटों पर कब्जा बरकरार रखने में कामयाब रहा. गोमिया व सिल्ली उपचुनाव का असर राज्य की भावी राजनीति के साथ ही सत्ताधारी गठबंधन पर दिख सकता है.

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