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यूपीईएस ने वर्तमान पीढ़ी को भविष्य के लिये तैयार करने के लिए शहर के शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया

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अक्‍टूबर 2019: देहरादून में स्थित यूनिवर्सिटी यूपीईएस ने शहर में 21वीं सदी के शिक्षकों के लिये एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया। मेरठ शहर के शीर्ष 15 स्कूलों के 30 प्रिंसिपल्स, वाइस प्रिंसिपल्स, विभाग प्रमुखों और वरिष्ठ शिक्षकों को डिजिटल दुनिया के विद्यार्थियों की शिक्षा के लिये नये तरीकों के बारे में प्रशिक्षित किया गया। इन शिक्षकों को आत्मविकास का प्रशिक्षण भी दिया गया।

मेरठ के ऋषभ अकादमी की वाइस प्रिंसिपल श्रीमती राज बाला जैन ने कहा, ‘‘शिक्षकों के तौर पर हमें खुद पर और अपने विषयों पर पूर्ण विश्वास होना चाहिये। हमें विद्यार्थियों का स्वभाव, व्यवहार और विभिन्न विषयों में रूचि भी समझनी चाहिये। तभी हम उनके भविष्य के लिये उनका मार्गदर्शन कर सकेंगे। यूपीईएस का यह प्रशिक्षण कार्यक्रम मेरे विद्यार्थियों में वे कुशलताएं विकसित करने में मेरी मदद करेगा, जो 21वीं सदी में जरूरी हैं।’’

यूपीईएस का यह प्रशिक्षण शिक्षकों के लिये पूरक था, क्योंकि यूनिवर्सिटी उन्हें आज की पीढ़ी के उज्जवल और सफल भविष्य के विकास में महत्वपूर्ण भागीदार मानती है। इस कार्यक्रम से शीर्ष स्कूलों, जैसे आर्मी पब्लिक स्कूल, शांति निकेतन विद्यापीठ, के.एल. इंटरनेशनल स्कूल, सेंट जेवियर्स वर्ल्ड स्कूल, मिलेनियम पब्लिक स्कूल, आदि के शिक्षक लाभान्वित हुए।

इस पहल के बारे में यूपीईएस के प्रवक्ता ने कहा, ‘‘लीप 21वीं सदी के शिक्षकों के लिये एक अनूठा प्रशिक्षण कार्यक्रम है। हमने इस कार्यक्रम का निर्माण ड्राफ्ट एज्युकेशन पॉलिसी 2019 को ध्यान में रखकर किया है। आज के विद्यार्थी अपने पेशेवर जीवन में नई और अनजान चुनौतियों का सामना करेंगे। हमारे शिक्षक सही तरीके से प्रशिक्षित होने चाहिये, ताकि वे विद्यार्थियों को तैयार कर सकें और उन्हें सही कुशलता दे सकें। इस कार्यक्रम के माध्यम से हम स्कूलों के शिक्षकों और प्रिंसिपल्स को बेरोजगारी के मुद्दे पर साथ में लेना चाहते हैं, ताकि आज की पीढ़ी का भविष्य उज्जवल हो।’’

फ्यूचर ऑफ वर्क इन 2022 पर ईवाय रिपोर्ट के अनुसार 9 प्रतिशत नौकरियाँ बिलकुल नई होंगी और 37 प्रतिशत नौकरियों के लिये नई कुशलताओं की आवश्यकता होगी। ऐसे परिदृश्य में विद्यार्थियों को समस्या के समाधान, रचनात्मकता और तार्किक सोच में छोटी आयु से प्रशिक्षित होना होगा। यूपीईएस भारत के अन्य शहरों में भी ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन करेगा, जिससे हजारों शिक्षकों और लाखों विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा।

यूपीईएस के विषय में

उत्तराखण्ड की विधानसभा के यूपीईएस अधिनियम, 2003 के माध्यम से वर्ष 2003 में संस्थापित यूपीईएस को यूजीसी और एनएएसी से मान्यता प्राप्त है। वैश्विक स्तर पर यूपीईएस को रोजगारशीलता (नियुक्तियों) और परिसर की सुविधाओं के लिये क्यूएस रेटिंग में 5 स्टार मिले हैं और शिक्षा के लिये 4 स्टार मिले हैं। यूपीईएस अपने छह स्कूलों के माध्यम से उद्योग-संबद्ध और विशेषीकृत ग्रेजुएट तथा पोस्ट ग्रेजुएट कोर्सेस की पेशकश करता हैः स्कूल ऑफ इंजिनियरिंग, स्कूल ऑफ कंप्यूटर साइंस, स्कूल ऑफ डिजाइन, स्कूल ऑफ लॉ, स्कूल ऑफ बिजनेस और स्कूल ऑफ हेल्थ साइंसेस। यूपीईएस के उद्योग उन्मुख कार्यक्रमों और सर्वांगीण विकास पर जोर के कारण इसके ग्रेजुएट्स को कंपनियाँ पसंद करती हैं, विगत कुछ वर्षों में नियुक्तियों का ट्रैक रिकॉर्ड 90 प्रतिशत से अधिक रहा है। यूपीईएस का मुख्य दर्शन और उद्देश्य है विद्यार्थियों के परिणामों को उत्कृष्ट बनाना।

अधिक जानकारी के लिये www.upes.ac.in देखें।

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