झारखंड बजट सत्र में बाबूलाल की दो टूक: नेता प्रतिपक्ष सत्‍ता के किसी विधायक को बना दें, भाजपा सदन में हंगामा नहीं करेगी

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Ranchi: झारखंड विधानसभा बजट सत्र के सांतवे कार्यदिवस के दिन सदन शुरू होने के बाद नेता प्रतिपक्ष के मामले को लेकर बाबूलाल मरांडी ने बड़ा बयान दे दिया है. उन्होंने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष को जब फैसला देना होगा देंगे, लेकिन इस बीच हमारे विधायक नेता प्रतिपक्ष का सवाल ना तो सदन में उठाएंगे और ना ही इस मामले को लेकर वेल में जाएंगे.

राज्य की चिंता करते हुए बाबूलाल मरांडी ने कहा कि राज्य के बहुत सारे ज्वलंत मुद्दे हैं जिस पर सदन में चर्चा जरूरी है.

इस पर विधानसभा के अध्यक्ष ने कहा कि विधि विमर्श के बाद इस मामले पर उचित निर्णय ले लिया जाएगा.

जिस पर बाबूलाल मरांडी ने कहा कि अगर विधानसभा अध्यक्ष को लगे तो वह सत्ता पक्ष से ही किसी एक नेता को नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी दे दे.

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बाबूलाल मरांडी ने बाद में मीडिया से बात करते हुए कहा कि 2 तारीख से विधान सभा का बजट सत्र चल रहा है. 11 फरवरी को जेवीएम ने प्रस्ताव पारित किया कि भाजपा और जेवीएम का विलय होगा. 17 फरवरी को जगरनाथ मैदान में समारोह आयोजित हुआ जिसमें भाजपा और जेवीएम का विलय हुआ.

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि विलय के बाद का प्रस्ताव भरक्त निर्वाचन आयोग के साथ भाजपा पार्टी और झारखंड विधान सभा के अध्यक्ष को भी एक प्रति भेजा गया. उन्होंने कहा कि विलय से पूर्व पार्टी ने दो विधायक को पार्टी से निष्कासित भी कर दिया था. वहीं 6 मार्च को भरक्त निर्वाचन आयोग ने विलय पर अपनी मुहर लगा दी. इस आशय का पत्र भाजपा पार्टी और विधान सभा अध्यक्ष को भेजा गया.

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उन्होंने कहा कि 2 मार्च से सदन में नेता प्रतिपक्ष को लेकर हंगामा हो रहा है. जिस कारण सदन में जनता के सवाल नहीं आ पा रहे है.

बाबूलाल ने कहा कि मैं सदन की व्यवस्था को जनता हूं. मुझे लग रहा कि ऐसी व्यवस्था से जनता के सवाल सदन के पटल पर नही पहुंच पा रहे है. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि राज्य में भूख से हो रही मौत, लाचार बिजली व्यवस्था, आदिवासी नरसंहार, लोहरदगा में हुई सुनियोजित दंगा आदि जैसे कई मुद्दे है जिसपर सदन में बहस करने की जरूरत है. इसलिए मैंने सदन में कहा कि अब इस मुद्दे पर भाजपा के कोई भी विधायक सदन को बाधित नही करेंगे और न ही वेल में जाएंगे.

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राज्य सभा चुनाव पर उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष का मामला का असर इस पर नही पड़ेगा. उन्होंने कहा कि विधान सभा में जो दलगत स्थिति है उससे दूसरा प्रत्यशी को मैदान में उतारना गलत होगा. अगर तीसरा प्रत्यशी मैदान में उतारा जाता है तो होरसेट्रडिंग जैसी घटना दोबारा राज्य में होगी. जो गलत संदेश राज्य में जाएगा.

उन्‍होने उम्मीद जताते हुए कहा कि इस मामले में राज्य के मुखिया से बात करेंगे और ऐसे मामले पर चर्चा करेंगे.

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