झारखंड को क्लीन एनर्जी में अग्रणी राज्य बनाने के लिए रिन्यूएबल एनर्जी इकोसिस्टम बनाने पर जारी

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Ranchi: इनिशिएटिव फॉर सस्टेनेबल एनर्जी पॉलिसी (ISEP) की ओर से पावर फॉर ऑल के सहयोग से एक वेबिनार का आयोजन हुआ. जहां झारखंड में स्वच्छ ऊर्जा (क्लीन एनर्जी) प्रसार पर एक रोडमैप जारी किया. रिपोर्ट में अक्षय ऊर्जा के उत्थान, नवाचार और उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के लिए राज्य में एक नवीकरणीय ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र बनाने पर ध्यान केंद्रित किया या है. 

इस अवसर पर झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) के सीओओ बिष्णु सी परिडा ने कहा कि, “राज्य में सभी आजीविका गतिविधियों की रीढ़ ऊर्जा है. सौर ऊर्जा की भरपूर उपलब्धता के साथ हमें तय करना होगा कि हर उस पहलू को जोड़ा जाए जो इससे संबंधित हो और जहां तक ऐसा करना संभव हो. हमारे झारखंड राज्य सरकार परियोजना में जेएसएलपीएस और जोहार परियोजना के रूप में हमने 900 से अधिक सौर आधारित लिफ्ट सिंचाई प्रणाली स्थापित की हैं. यह राज्य में 18,000 से अधिक महिला किसानों की आजीविका को सीधे लाभ पहुंचाती है.’’

उन्होंने बताया कि,‘’न केवल कुछ बहुत अच्छे पायलट, बल्कि व्यवहारिक व्यवसायिक मॉडल भी हैं. ये पूरी तरह से सौर पर स्विच करने में सक्षम हैं. ऐसे करने के बाद समय और ईंधन लागत में बड़ी बचत देखने को मिली है. जिससे राजस्व में वृद्धि देखी गई है. राज्य में विद्युत के बारे में जानने वाले युवाओं की भी पर्याप्त संख्या है, जिन्हें उद्यमियों और सेवा प्रदाताओं द्वारा इस क्षेत्र में काम करने के लिए तैयार किया जा सकता है.’’

रिपोर्ट की मुख्य विशेषता के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए प्रो. जोहान्स उरपेलनेन, सीईओ ISEP, ने कहा कि “झारखंड केंद्र सरकार के 24 * 7 पावर फॉर ऑल प्लान (दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना) के लिए केंद्र सरकार के सहमति ज्ञापन पर हस्ताक्षर (2015-16) करने वाले पहले राज्यों में से एक था. जिसका उद्देश्य 2022 तक अतिरिक्त 4.5 गीगावाट (जीडब्ल्यू) उत्पादन क्षमता को विकसित करना था. इसमें से 1.5 गीगावॉट सौर ऊर्जा को आवंटित किया गया था. नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) के अनुसार, झारखंड में सौर ऊर्जा की 18.2 गीगावॉट और बायोमास जेनरेशन की 4.5 गीगावॉट (एमएनआरई 2020) की क्षमता है. इसके बावजूद, राज्य में अक्षय ऊर्जा का विस्तार काफी धीमा रहा है.’’ 

उनके मुताबिक, ‘’हमारे विश्लेषण के अनुसार प्रमुख चुनौतियों में ग्रिड पावर की विश्वसनीयता, रसोई गैस की रिफिल की अक्षमता और नीति लागू करनेवाली एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी जैसी चीजें शामिल हैं. झारखंड में सक्रिय नवीकरणीय ऊर्जा कार्यक्रमों की एक रूपरेखा को प्रभावी ढंग से विकसित करने और कार्यान्वित करने के लिए एक बेहतर कार्य योजना की आवश्यकता है, ताकि अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके.’’ 

मुख्य शोधकर्ता और रिपोर्ट के लेखक एकलव्य शरण ने विस्तार से बताया कि “हमने राज्य में एक बेहतर अक्षय ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक फ्रेमवर्क तैयार किया है. फ़्रेम वर्क 1 मौजूदा ग्रिड और ऑफग्रिड सिस्टम को बेहतर बनाने के उद्देश्य से कई सुधारों पर केंद्रित है. इसके प्रमुख सुझाओं में रूफ टॉप सोलर (छतों पर स्थापित होनेवाला) का ढांचा तैयार करना, मिनी ग्रिड को अपग्रेड करना, और आजीविका से जुड़े इनोवेटिव योजनाओं को तैयार करने और उसे लागू करने के लिए सही रणनीति और तंत्र तैयार करना शामिल है.’’

शरण डिसेंट्रलाइज्ड एनर्जी सिस्टम प्रा. लिमिटेड (DESI पावर) के निदेशक भी हैं. उन्होंने बताया कि, इस रिपोर्ट में बायोमास जेनरेशन सिस्टम को बढ़ावा देने और ग्रामीण घरों में स्वच्छ खाना पकाने के लिए एलपीजी रिफिल तक पहुंच बढ़ाने के लिए नए बिजनेस मॉडल और वित्तीय तंत्र का भी जिक्र है.

वहीं, फ्रेमवर्क 2 सुझाव देता है कि ऊर्जा क्षेत्र में अग्रणी उद्योगों और नवाचारों (नई खोज, नए तरीकों) पर ध्यान केंद्रित किया जाए. अधिक प्रदूषण फैलानेवाले औद्योगिक इकाइयों को भी क्लीन एनर्जी पर शिफ्ट किया जाए. साथ ही अक्षय ऊर्जा के लिए जरूरी पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण में जरूरी परियोजनाओं को लागू करने का रास्ता भी बताता है. 

वेबिनार में राज्य के प्रमुख थिंक टैंकों में एक सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड के प्रो एसके समदर्शी, सीईईडी के सीईओ रमापति कुमार और श्री गौरव भट्टाचार्य, लीड रिसर्चर, स्वान्ति पहल ने भी मौजूदा नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू करने के बारे में अपने विचार साझा किए.

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