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क,ख,ग के साथ कदम मिलाए, हिन्दी को उसका स्थान वापिस दिलाएं

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– क,ख,ग (एक प्रयास… हिन्दी के सम्मान के लिए) 12 – 19 अक्टूबर और 8 नवंबर को ऑडिशन का आयोजन 

देश को आजाद हुए तो 72 साल बीत चुके हैं, लेकिन इस देश के लोगो की मानसिकता अभी भी गुलामी की जंजीरों में जकड़ी हुई है। हम इसदेश में जरूर रह रहे हैं, लेकिन अंग्रेजी भाषा के गुलाम बन के।  देश के अग्रणी हिन्दी न्यूज पोर्टल ट्रूपल के को फाउंडर अतुल मलिकराम ने कहा। उन्होंने आगे कहा कि कितना शर्मनाक है कि जिस देश के संविधान ने आज से 70 साल पहले यानि 14 सितंबर 1949 को हिन्दी को राजभाषा का दर्जा दिया था, उसी देश में साजिश के तहत हिन्दी को दूसरे स्थान पर ढकेल दिया गया, यही वजह है कि जब कोई व्यक्ति, जानकारी हेतु, ग्राहक सेवा केन्द्र में फोन लगाता है तो उसे अनुदेश प्राप्त होता है, ‘हिंदी जानकारी के लिए दो दबाएं।’ क्यूँ! क्यूंकि पहला स्थान तो अंग्रेजी के लिए सुरक्षित है। अपने ही देश में हमने आज हिन्दी को इतना पराया कर दिया है कि वो अपने अस्तित्व के संरक्षण के लिए जूझ रही है।

 उन्होंने बताया कि  ट्रूपल द्वारा ‘क,ख,ग, (एक प्रयास… हिन्दी के सम्मान के लिए) की प्रस्तुति की जा रही है। क, ख, ग, एक प्रयास है, हिन्दी के संरक्षण का। क, ख,ग, उन लोगो को मंच प्रदान करता है, जो हिन्दी भाषा प्रेमी हैं, हिन्दी के लिए प्रयासरत हैं, लेकिन उनकी आवाज को पहचान नही मिल पा रही है।

क, ख, ग द्वारा ऑडिशन का आयोजन कराया जा रहा है, जो कि 12 अक्टूबर, 19 अक्टूबर एवं 8 नवंबर को होंगे। इस ऑडिशन में प्रतिभागी स्वयं द्वारा रचित हिन्दी रचनाएं (गद्य, पद्य, कविता, कहानियां) सुनाएंगे, जिसमें से सर्वश्रेष्ठ प्रतिभागी की रचना का चयन किया जायेगा।

अगर आप भी हिन्दी भाषा प्रेमी हैं, तो हिन्दी के सम्मान में एक कदम आगे की ओर बढ़ाएं ताकि हम सब मिलकर हिन्दी को पुनः उसका स्थान और अधिकार दिलाने में जीत हासिल कर पाएं।

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